‘मॉडल’ स्टेशन की सुरक्षा का निकला जनाजा: प्लेटफॉर्म-1 पर जा घुसी कार, ट्रैक पर लटके पहिए, और गहरी नींद में सोती रही RPF !
आम यात्री बिना टिकट जाए तो जुर्माना, कार सीधे ट्रैक तक पहुंच जाए तो किसी को खबर नहीं !
आम जनता से प्लेटफॉर्म टिकट के नाम पर वसूली करने वाले और सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करने वाले रेलवे प्रशासन की गुरुवार रात शर्मनाक पोल खुल गई। तथाकथित ‘मॉडल रेलवे स्टेशन’ छिंदवाड़ा की सुरक्षा व्यवस्था उस वक्त ताश के पत्तों की तरह ढह गई, जब एक कार बेखौफ फर्राटे भरते हुए सीधे प्लेटफॉर्म क्रमांक-1 पर जा घुसी। हद तो तब हो गई जब कार का एक पहिया प्लेटफॉर्म से फिसलकर सीधे रेलवे ट्रैक पर लटक गया। गनीमत सिर्फ इतनी रही कि उस वक्त कोई ट्रेन वहां से नहीं गुजर रही थी, वरना एक बेहद खौफनाक हादसा हो सकता था। इस घटना ने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और स्टेशन प्रबंधन के मुंह पर करारा तमाचा जड़ा है, जो इतनी बड़ी सेंधमारी के वक्त गहरी नींद में सोए हुए थे।
✍️ राकेश प्रजापति
कैसे ट्रैक तक पहुंच गई मौत की गाड़ी ?
जानकारी के मुताबिक, गुरुवार रात करीब 8:30 बजे स्टेशन पर उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब 58 वर्षीय अजय कुमार कच्छ अपनी कार (क्रमांक MP 28 ZH 5279) को लेकर प्लेटफॉर्म-1 पर पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि यह कार पार्सल ऑफिस से प्लेटफॉर्म पर सामान ले जाने वाले रास्ते से अंदर घुसी थी।
हैरानी की बात यह है कि पार्सल गेट से लेकर प्लेटफॉर्म-1 तक पहुँचने के दौरान इस कार को किसी ने नहीं रोका। जब कार ट्रैक पर लटक गई और लोगों की भीड़ जमा होने लगी, तब जाकर RPF के जवानों की नींद टूटी। इसके बाद यात्रियों और जवानों ने मिलकर कार को धक्का दिया और उसे वापस खींचकर RPF पोस्ट ले जाया गया।
RPF की घोर लापरवाही और लीपापोती का खेल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर RPF के जवान कर क्या रहे थे? एक आम आदमी अगर अपने किसी रिश्तेदार को छोड़ने स्टेशन जाए और उसके पास प्लेटफॉर्म टिकट न हो, तो गेट पर ही उसे दबोच कर जलील किया जाता है और जुर्माना वसूला जाता है। लेकिन इतनी बड़ी कार तीन-चार सुरक्षा पॉइंट पार करके सीधे प्लेटफॉर्म तक आ गई और किसी सुरक्षाकर्मी ने उसे टोकने की जहमत तक नहीं उठाई ?
अपनी इस घोर नाकामी और लापरवाही पर पर्दा डालने के लिए RPF ने अब हमेशा की तरह कागजी कार्रवाई का सहारा लिया है। रेलवे पुलिस ने आनन-फानन में चालक के खिलाफ रेलवे अधिनियम की विभिन्न धाराओं (यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डालना, अनधिकृत प्रवेश और रेलवे के कार्य में अवरोध) के तहत मामला दर्ज कर अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री कर ली है।
प्रशासन और RPF से जनता के ज्वलंत सवाल:
सुरक्षा गार्ड कहाँ थे ? पार्सल ऑफिस के वीआईपी और लोडिंग रास्ते पर कोई बैरिकेडिंग या सुरक्षा गार्ड तैनात क्यों नहीं था ?
CCTV रूम में क्या चल रहा था ? जब एक चार पहिया वाहन स्टेशन परिसर के भीतर से प्लेटफॉर्म की तरफ बढ़ रहा था, तब लाखों रुपये के कैमरों की मॉनिटरिंग करने वाले अधिकारी क्या देख रहे थे ?
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार था ? अगर इस कार की जगह कोई आतंकी या असामाजिक तत्व विस्फोटकों से भरी गाड़ी लेकर आ जाता, तो क्या RPF इसी तरह खर्राटे मारती रहती ?
जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब ? चालक पर केस दर्ज करना तो ठीक है, लेकिन उस वक्त ड्यूटी पर तैनात जिन RPF जवानों और अधिकारियों की लापरवाही से यह गाड़ी अंदर घुसी, उन्हें सस्पेंड क्यों नहीं किया गया ?
छिंदवाड़ा मॉडल स्टेशन की यह घटना महज एक चूक नहीं, बल्कि सिस्टम के नकारेपन का सबसे बड़ा सुबूत है। अगर समय रहते सुरक्षा व्यवस्था की यह जंग लगी मशीनरी नहीं बदली गई, तो भविष्य में इसके परिणाम बेहद भयावह हो सकते हैं।