छिंदवाड़ा कोतवाली की दहलीज पर इंसाफ की जंग: रातभर धरने पर बैठी दीपिका के बाद दर्ज हुई FIR
जब कानून के रक्षक ही मौन हो जाएं, तो एक बेटी को अपनी ही सुरक्षा के लिए थाने की चौखट पर रात गुजारनी पड़ती है। छिंदवाड़ा कोतवाली थाने के सामने बीती रात कुछ ऐसा ही हुआ, जहां पीड़िता दीपिका मिलामपुरे अपने परिवार के साथ रात 9 बजे से सुबह तक धरने पर बैठी रही। उसकी एक ही मांग थी – कार्रवाई करो..
तीन दिन तक भटकने, आवेदन देने और तीन बार धरने पर बैठने के बाद आखिरकार पुलिस को झुकना पड़ा और FIR क्रमांक 0749, दिनांक 28 सितंबर 2026 दर्ज की गई।
क्या है पूरा मामला ?
पीड़िता दीपिका मिलामपुरे ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि भाजपा जिला उपाध्यक्ष योगेंद्र प्रताप राणा, श्रद्धा पटेल समेत 5 लोगों ने उसके घर में घुसकर अभद्रता, गाली-गलौज, मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी।
FIR के मुताबिक मामला सिर्फ मारपीट का नहीं है:
1. सोशल मीडिया पर छवि खराब करने की साजिश: आरोप है कि दीपिका के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और गलत जानकारी फैलाकर उसकी छवि धूमिल की गई।
2. फोन पर धमकी: जब दीपिका ने इसका विरोध किया तो उसे फोन पर धमकी दी गई।
3. घर में घुसकर हंगामा: इसके बाद आरोपी पक्ष उसके घर पहुंचा और परिजनों के साथ अभद्रता की। पीड़िता का सबसे बड़ा दावा है कि घटना की पूरी वारदात घर में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद है, फिर भी तीन दिन तक पुलिस ने कार्रवाई नहीं की।
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296(अ), 351(2) और 3(5) के तहत योगेंद्र प्रताप राणा, श्रद्धा पटेल सहित एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
तीन दिन का ड्रामा, और सिस्टम की बेबसी ..
रविवार सुबह से लेकर सोमवार देर रात तक कोतवाली थाने के सामने हाईवोल्टेज ड्रामा चलता रहा। TI से लेकर आला अधिकारी समझाते रहे, आश्वासन देते रहे, लेकिन पीड़िता अपनी जिद पर अड़ी रही – “जब तक सभी आरोपियों पर कार्रवाई नहीं होगी, नहीं उठूंगी।”
“TI आ-जा रहे हैं, पर सत्ता के दबाव में पुलिस ने खुद को बेड़ियों में जकड़ लिया है। सत्ता के सामने बेबस और लाचार पुलिस को महिला के आंसुओं की कीमत कीड़े-मकोड़ों जैसी लगती है।”
ये पंक्तियां सिर्फ शिकायत नहीं, छिंदवाड़ा पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान हैं।
दूसरा पक्ष भी आया सामने, जांच जारी ..
इस पूरे घटनाक्रम में अब दूसरा पहलू भी सामने आया है। दूसरे पक्ष की ओर से भी दीपिका पर फोन पर गाली-गलौज और धमकी देने के आरोप लगाते हुए पुलिस को आवेदन दिया गया है। दोनों पक्षों में आरोप-प्रत्यारोप जारी है।
कोतवाली थाना प्रभारी आशीष धुर्वेने बताया कि शिकायत के आधार पर सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है, मौके पर पहुंचकर आसपास के लोगों से भी जानकारी ली जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
FIR के बाद भी अनुत्तरित हैं कई सवाल ..
FIR दर्ज होना पीड़िता की पहली जीत जरूर है, लेकिन इंसाफ की जंग अभी खत्म नहीं हुई।
1. जब पीड़िता ने 5 लोगों के नाम लिए, तो FIR में 3 नाम ही क्यों ?
2. जब CCTV जैसा पुख्ता सबूत मौजूद है, तो कार्रवाई में 3 दिन का विलंब क्यों ?
3. क्या ये FIR न्याय की नीयत से लिखी गई है या रातभर के धरने के दबाव में ?
4. क्या दूसरे पक्ष का आवेदन मामले को कमजोर करने की रणनीति तो नहीं ?
कानून कहता है महिला की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई हो, मानवता कहती है आंसुओं का सम्मान हो। लेकिन छिंदवाड़ा कोतवाली की उस रात दोनों हार गए और जीती सिर्फ एक लड़की की बेबसी।रातभर जागने वाली ये लड़की सो नहीं रही थी, वो इस सोए हुए सिस्टम को जगा रही थी। FIR दर्ज हो चुकी है, अब देखना है कि क्या पुलिस सत्ता के साये से बाहर निकलकर निष्पक्ष जांच करेगी, या ये फाइल भी उन्हीं फाइलों में दब जाएगी जहां आश्वासन दब जाते हैं ?
अगर इस पीड़िता के साथ कोई अनहोनी होती है, तो उसकी जिम्मेदार स्थानीय पुलिस ही होगी, जो तीन दिन से उसे कोतवाली की चौखट पर गिड़गिड़ाने के लिए मजबूर करती रही।
छिंदवाड़ा देख रहा है… और दीपिका अब भी इंसाफ के इंतजार में है।