दुर्लभ पीला पलाश खोजा  वैद्य प्रीतम डोंगरे ने……

दुर्लभ पीला पलाश खोजा  वैद्य प्रीतम डोंगरे ने

  •  राकेश प्रजापति
  • प्लोरा आफ मध्य प्रदेश कहा जाता है औषधीय गुणों से युक्त पीले रंग के पलाश को 
  • तामिया इलाके में पाए जाते है पीले पलाश का दुर्लभ पेड़

छिंदवाड़ा // सतपुड़ा की सुरम्य वादियों में स्थित इस जिले की प्रकृति ने दिल खोल कर अनेकानेक औषधीय पौधो का उपहार दिया है और ख़ासकर तामिया और महादेव वैली में, वनस्पति शास्त्र में अनेक दुर्लभ पौधो का उल्लेख है ऐसे अनेक औषधीय पौधे यहाँ पाए जाते है ,प्रकृति के ऐसे अनमोल उप

हार को इस जिले के नौकरशाह और राजनेताओ की अदूरदर्शिता ने इस क्षेत्र को पर्यटन स्थल बनाने की चाह से लोगो की आबाजाही बढ़ा दी जिसका दुस्परिणाम यह हुआ की यहां से अनेकानेक दुर्लभ औषधीय पौधे नष्ट हो गए है या नष्ट होने की कगार पर आ गए है ! रस क्षेत्र को जैव विविधता संरक्षित क्षेत्र घोषित कर लोगो की आवाजाही पर रोक लगा देना होगा तभी इस क्षेत्र को बचाया जाए सकता है और यह समय की मांग भी है जो जलवायु परिवर्तन को रोकने की दिशा  में सार्थक प्रयास होगा और इस क्षेत्र में जैव विविधता संरक्षित रह पायेगी ! इसी में से एक पीला पलाश जो कि बहुत कम मात्रा में पाया जाता है परन्तु  हमारे जिले की वादियों में इसके कुछ दुर्लभ पेड़ आज भी मौजूद है । इन्हीं में से एक पेड़ मोहखेड़ ब्लॉक के ग्राम तंसरामाल के वैद्य प्रीतम डोंगरे ने खोजा है इसके पहले भी प्रीतम ने अत्यंत दुर्लभ पौधा टेलीग्राफ प्लांट (डांसिंग प्लांट ) इसी क्षेत्र से खोज निकाला था । ऐसा माना जा रहा है कि आसपास के जंगलों में एक पीले पलाश का पेड़ है। पीले पलास का वृक्ष  अनेक औषधीय गुणों से परिपूर्ण है। जानकार बताते है की पीले पलास के पंचांग से पुरषो के शुक्राणुओं को को बलिष्ट करता है साथ ही शीतल होने कारण महिलाओ के प्रदर रोगो को समूल नष्ट करने की छमता इस वृक्ष में है व्ही इस वृक्ष के पत्तो व् रस के सेवन विष नाशक

और बावासीरजैसे रोगो के लिए कारगार औषधि है।

         जानकार  बताते है की इस वृक्ष के पत्तेऔर पुष्प छोटे आकार के होते है, इस वृक्ष के पंचांग से कायाकल्प चूर्ण बनता है जो चिर यौवन बनाये रखने के काम आता है ,इसके फूलो के सेवन से वात  रोग जड़
 से दूर किया जा सकता है ,इसके वृक्ष की गोंद  कमरकसके नाम से जानी जाती है जो कमर दर्द हड्डी के दर्द और ग्रीष्म ऋतू में लू उतारने जैसी व्याधितो के लिए रामबाण औषधि है। 
बुजुर्ग और जानकार बैध बताते है की नेसके वृक्ष पर कभी भी आकाशीय बिजली नहीं गिरती है इसलिए पुराने जमाने में बारिश के दिनों में लोग पलास के पत्तो से बनी छतरी या टोपी लगा क्र खेतो में काम किया करते थे और आकाशीय बिजली के खर से अपने आप को सुरक्षित रखते थे ,

पौराणिक मान्यता है कि पीले पलाश में मां पितांबरी देवी के साथ साथ भगवान विष्णु और धन की देवी लक्ष्मी का वास पाया जाता है । तंत्र विद्या में इसका उल्लेख मिलता है । इसे घर में रखना शुभ माना जाता है । कुछ बर्षो पूर्व भी तामिया इलाके में पीले रंग के पलाश का पेड़ चर्चा में आया था ।जमुनियाखुर्द माध्यमिक शाला में पदस्थ शिक्षक नीरज मुरकुटे तथा तामिया वन परिक्षेत्र में श्रीझौंत बीट में पदस्थ वनरक्षक संतोष भलावी सोनू व्यक्तिगत तौर पर लाल-पीले पलाश के संरक्षण के कार्य में जुटे हुए हैं।
तामिया विकासखंड में पीला पलाश का एकमात्र वृक्ष तामिया के दौरियाखेड़ा में बचा है। जहां पहले दो पेड़ थे एक काटा जा चुका है। वहीं दूसरे पीले पलाश के पेड़ कोइ संरक्षित किया जा रहा है।

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