तामिया सावन महोत्सव: आदिवासी संस्कृति और प्रकृति का संगम ..

सतपुड़ा के हृदय में प्रकृति का महा-उत्सव: ‘तामिया सावन महोत्सव 2026’

सतपुड़ा की सुरम्य और हरी-भरी वादियों में एक बार फिर मेघों और माटी का मिलन होने जा रहा है। प्रकृति, आदिवासी संस्कृति और इको-टूरिज्म के अद्भुत संगम का साक्षी बनने के लिए छिंदवाड़ा का तामिया पूरी तरह तैयार है। आगामी 21 से 23 अगस्त तक आयोजित होने वाला तीन दिवसीय ‘तामिया सावन महोत्सव 2026’ महज एक आयोजन नहीं, बल्कि जैव-विविधता और अरण्य संस्कृति का एक शानदार उत्सव है।

✍️ राकेश प्रजापति 

कलेक्टर हरेंद्र नारायण और जिला पंचायत सीईओ अग्रिम कुमार के कुशल मार्गदर्शन में इस महोत्सव को प्रकृति के अनुकूल ढालने की व्यापक तैयारियां की जा रही हैं, जिसकी जमीनी रूपरेखा एसडीएम जुन्नारदेव के नेतृत्व में तैयार की गई है।

अरण्य की अनमोल सौगातें और आकर्षण

इस पर्यावरणीय महाकुंभ में पर्यटकों को माटी की सोंधी महक और स्थानीय लोककला का जादुई अनुभव मिलेगा:

विशुद्ध स्थानीय उत्पाद: सावरवानी के शुद्ध देसी घी और चोपना के मावे की मिठास के साथ क्षेत्र के पारंपरिक व्यंजनों के फूड स्टॉल सजे होंगे।

आदिवासी कला का जीवंत प्रदर्शन: गोंडवाना की समृद्ध विरासत को दर्शाती आदिवासी पेंटिंग, हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद और बांस से गढ़ी गई कलात्मक वस्तुएं आकर्षण का केंद्र होंगी।

सावन का उल्लास: प्रकृति के बीच सावन के पारंपरिक झूले, लोकनृत्य और लोकसंगीत की गूंज पर्यटकों को एक अलग ही दुनिया में ले जाएगी।

रोमांच और अन्वेषण: एडवेंचर के शौकीनों के लिए वल्चर पॉइंट, चीड़ पॉइंट, छोटा महादेव, ग्वालगढ़ पहाड़ी और तुलतुला पहाड़ जैसे नैसर्गिक स्थलों पर प्रशिक्षित गाइड के साथ ट्रेकिंग की व्यवस्था होगी। साथ ही नेचर फोटोग्राफी के जरिए प्रकृति प्रेमी इस सौंदर्य को कैमरों में कैद कर सकेंगे।

प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी: ‘जीरो वेस्ट’ का संकल्प

यह महोत्सव पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनुकरणीय कदम है। आयोजकों ने इसे पूर्णतः ‘प्लास्टिक फ्री’ और ‘जीरो वेस्ट’ बनाने का दृढ़ संकल्प लिया है। प्रकृति के बीच यह आयोजन शत-प्रतिशत इको-फ्रेंडली होगा, ताकि अरण्य की पवित्रता और पारिस्थितिकी तंत्र अक्षुण्ण रहे।

मौसमी उत्सव से ‘बारहमासी ईको-टूरिज्म’ की ओर

तामिया का यह नैसर्गिक सौंदर्य केवल सावन की फुहारों या चंद दिनों के उत्सव तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इस महोत्सव की असली सार्थकता तब सिद्ध होगी, जब इसे एक स्थायी और सस्टेनेबल मॉडल में बदला जाए:

मूलभूत सुविधाओं का हो विस्तार: यदि तामिया और जिले के अन्य पर्यटन स्थलों पर विश्वस्तरीय और इको-फ्रेंडली मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएं, तो यहाँ बारहमासी पर्यटन का मार्ग प्रशस्त होगा।

होमस्टे बने स्थायी रोजगार: महोत्सव के दौरान जिन ग्रामीण ‘होम स्टे’ को प्रमोट किया जा रहा है, उनकी पहुंच वर्ष भर पर्यटकों तक सुनिश्चित होनी चाहिए, ताकि स्थानीय संस्कृति से रूबरू होने का यह सिलसिला कभी न थमे और ग्रामीणों को स्थायी आजीविका मिले।

प्रबुद्धजनों की भागीदारी: जिला प्रशासन को चाहिए कि वह इस ईको-टूरिज्म के महायज्ञ में जिले के बुद्धिजीवियों, प्रगतिशील विचारधारा वाले पत्रकारों और प्रकृति-पर्यटन के स्थानीय जानकारों की राय को भी शामिल करे।

जब प्रशासन की इच्छाशक्ति के साथ स्थानीय पर्यावरणविदों और जानकारों का विजन जुड़ेगा, तो ऐसे मौसमी महोत्सवों की सार्थकता में चार चांद लग जाएंगे और छिंदवाड़ा का तामिया विश्व पर्यटन के मानचित्र पर एक चमकता हुआ सितारा बनकर उभरेगा।