शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ EOW में शिकायत, संपत्तियों की जांच की मांग

सियासत में भूचाल: पूर्व सीएम शिवराज के खिलाफ EOW में विस्फोटक शिकायत ! 

रिटायर्ड IFS अफसर ने खोली ‘काली कमाई’ की फाइल, बेटों के नाम पर अकूत साम्राज्य खड़ा करने का सनसनीखेज आरोप ..

मध्य प्रदेश की राजनीति के शांत समंदर में एक बहुत बड़ा पत्थर फेंका गया है, जिसकी लहरें दिल्ली तक महसूस की जा सकती हैं। ‘सिस्टम परिवर्तन अभियान’ के अध्यक्ष और निडर पूर्व आईएफएस (IFS) अधिकारी आजाद सिंह डबास ने सीधे तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा खोल दिया है।

डबास ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) के महानिदेशक को जो शिकायत सौंपी है, वह महज़ एक कागज़ नहीं, बल्कि आरोपों का एक ऐसा ‘टाइम-बम’ है, जिसने सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है।

इस हाई-प्रोफाइल शिकायत के सबसे बड़े और चौंकाने वाले खुलासे कुछ इस प्रकार हैं :

मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने से पहले सीमित कृषि भूमि के मालिक रहे शिवराज के परिवार ने अचानक विदिशा और सीहोर (ढोलखेड़ी, बदनपुर) में ज़मीनों का अंबार कैसे लगा लिया? डबास ने सीधे तौर पर सवाल दागा है कि इन बेशकीमती संपत्तियों को खरीदने के लिए पैसा कहाँ से आया? कुणाल और कार्तिकेय सिंह चौहान पर नेशनल हाईवे और ढोलखेड़ी में ज़मीनें खरीदकर उनके ‘लैंड यूज़’ (Land Use) बदलने के गंभीर आरोप हैं।

कोकिला ऑर्गेनिक, ट्रिटियम केमटेक एलएलपी, के2 सिनर्जी, और भारत फोटोवोल्टेनिक जैसी कई हाई-फाई कंपनियों के संचालन पर सवालिया निशान खड़े किए गए हैं। शिकायत में यह भी बेहद चौंकाने वाला दावा किया गया है कि कुणाल सिंह की कंपनी में ‘माही खान’ नाम की एक साझीदार भी शामिल हैं, जिसकी पड़ताल ज़रूरी है।

‘सुधामृत’ ब्रांड: डेयरी का कारोबार या काले धन को सफेद करने की मशीन ?

विदिशा के ढोलखेड़ी में करोड़ों के निवेश से तैयार ‘सुधामृत’ ब्रांड (डेयरी और पैकेज्ड वॉटर) पर सबसे तीखा प्रहार किया गया है। आरोप है कि बाज़ार में इनके उत्पादों की वास्तविक बिक्री न के बराबर है, और यह पूरी कंपनी महज़ ‘काले धन को सफेद’ (Money Laundering) करने का एक ज़रिया बनी हुई है।

यह महज़ इत्तेफाक है या सत्ता का चमत्कार ? डबास ने अपनी शिकायत में बताया है कि मात्र 5 करोड़ के टर्नओवर वाली ‘मेसर्स दिलीप बिल्डर्स’, शिवराज के सीएम बनने के बाद अचानक एक विशालकाय पब्लिक लिमिटेड कंपनी में कैसे तब्दील हो गई, जिसका टर्नओवर वर्ष 2025-26 आते-आते 10 हज़ार करोड़ को पार कर गया। आरोप है कि इस कंपनी की सफलता के पीछे शिवराज का ही पैसा लगा हो सकता है।

डबास ने व्यापम, ई-टेंडर, डंपर कांड, पोषण आहार, अवैध रेत खनन, और मिड-डे मील जैसे बहुचर्चित मामलों की फाइलें भी दोबारा खोलने की हुंकार भरी है। उनका स्पष्ट आरोप है कि सत्ता में रहते हुए इन मामलों की कभी निष्पक्ष जांच होने ही नहीं दी गई।

यह खबर महज़ आरोप नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के एक कद्दावर राजनेता के वित्तीय इतिहास पर उठाया गया सबसे बड़ा सवालिया निशान है। अब देखना यह है कि क्या EOW इस ‘सियासी तूफान’ से टकराने की हिम्मत जुटा पाता है, या फिर यह शिकायत भी फाइलों के ढेर में कहीं गुम हो जाएगी !