भाजपा को महाझटका: सत्ता के गुरूर में अपनों की ही सुपारी! पूर्व जिला महामंत्री और वर्तमान नपाध्यक्ष के खिलाफ कोर्ट में केस दर्ज !
सत्ता की हवस और कुर्सी का गुरूर जब सिर चढ़कर बोलने लगे, तो इंसान सारे नैतिक मूल्य और सामाजिक ताने-बाने को भूल जाता है। छिंदवाड़ा भाजपा के भीतर से एक ऐसा ही घिनौना और सनसनीखेज आपराधिक चारित्रिक कारनामा सामने आया है, जिसने पूरी सियासत को हिलाकर रख दिया है। खुद को सबसे अनुशासित बताने वाली पार्टी के दिग्गज नेता अब अपनों की ही राजनीतिक हत्या करने के लिए ‘सुपारी’ देने पर उतारू हो गए हैं!
पार्टी के पूर्व जिला महामंत्री परमजीत सिंह बिज और भाजपा से निष्कासित नगर पालिका परासिया के वर्तमान अध्यक्ष विनोद मालवीय के खिलाफ न्यायालय ने संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। इन रसूखदार नेताओं पर आरोप है कि इन्होंने अपनी ही पार्टी के तत्कालीन जिला मंत्री अनुज पाटकर की जासूसी करवाने के लिए उनके ड्राइवर को मोहरा बनाया और बकायदा नगर पालिका के सरकारी खाते से जनता के पैसे को पानी की तरह बहाकर जासूसी की सुपारी दी!
जब सत्ता के दबाव में पुलिस ने मामला दबाने की कोशिश की, तो पीड़ित ने सीधे कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अब न्यायालय के इस कड़े रुख ने साफ कर दिया है कि अहंकार की इस लड़ाई में कानून किसी को बख्शने वाला नहीं है। इस रसूख और सत्ता के अहंकार की पूरी इनसाइड स्टोरी …
सत्ता का नशा जब सिर चढ़कर बोलता है, तो इंसान अपनों और बेगानों में फर्क भूल जाता है। छिंदवाड़ा भाजपा में एक ऐसा ही सनसनीखेज और शर्मनाक मामला सामने आया है, जिसने पार्टी के कथित ‘अनुशासित’ और ‘साफ-सुथरे’ चरित्र की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। भाजपा नेताओं के आपराधिक और घिनौने चारित्रिक कारनामे अब सरेआम हो चुके हैं।
सत्ता के गुरूर में चूर इन नेताओं ने न सिर्फ कानून को ठेंगा दिखाया, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी तार-तार कर दिया। मामला किसी और का नहीं, बल्कि भाजपा के ही नेताओं द्वारा अपनी ही पार्टी के पदाधिकारी की जासूसी और सुपारी देने का है!
क्या है पूरा ‘सुपारी कांड’?
मामला करीब 2 साल पुराना है, जिसने अब जाकर कानूनी रूप से भूचाल ला दिया है। आरोप है कि:
भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री परमजीत सिंह बिज और भाजपा से निष्कासित नगर पालिका परासिया के वर्तमान अध्यक्ष विनोद मालवीय। इन दोनों ने मिलकर भाजपा के ही तत्कालीन जिला मंत्री अनुज पाटकर की जासूसी करवाने का घिनौना जाल बुना। जासूसी के लिए किसी और को नहीं, बल्कि अनुज पाटकर के ही ड्राइवर दुर्गेश विश्वकर्मा को मोहरा बनाया गया और उसे बकायदा ‘सुपारी’ दी गई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस जासूसी और सुपारी का भुगतान किसी निजी जेब से नहीं, बल्कि नगर पालिका परासिया के सरकारी खाते से जनता के पैसे को पानी की तरह बहाकर किया गया !
खाकी ने फेरा मुंह, तो कोर्ट ने दिखाया आईना
शिकायतकर्ता ड्राइवर दुर्गेश विश्वकर्मा ने जब इस बात का खुलासा किया और पुलिस के पास गुहार लगाई, तो सत्ता के दबाव और राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते पुलिस ने मामला दबा दिया। लेकिन कहते हैं न कि ‘कानून के हाथ लंबे होते हैं’।
पुलिस से निराश होकर दुर्गेश ने अपने अधिवक्ता मुकेश मौर्य के माध्यम से न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। लगभग 2 साल की लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार सच की जीत हुई। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी परासिया शैलेंद्र उईके ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों रसूखदार आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संगीन धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करने का आदेश दे दिया है:
इन धाराओं में फंसा पेंच:
BNS धारा 318 (धोखाधड़ी/Cheating)
BNS धारा 3 (5) (संयुक्त जिम्मेदारी/Joint Liability)
सहपठित धारा 61 (क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी/Criminal Conspiracy)
सत्ता के अहंकार में तार-तार हुआ सामाजिक ताना-बाना
इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि भाजपा के इन नेताओं को न तो कानून का डर है और न ही समाज की फिक्र। जनता के विकास के लिए मिले नगर पालिका के फंड का इस्तेमाल अपनों की ही जासूसी और आपराधिक कृत्य में करना, इनके नैतिक पतन की पराकाष्ठा को दर्शाता है। आपसी गुटबाजी और सत्ता की हवस इस कदर हावी हो चुकी है कि नेता अब किसी भी हद तक गिरने को तैयार हैं।
अगली सुनवाई 6 जुलाई 2026 को: न्यायालय द्वारा प्रकरण दर्ज किए जाने के बाद अब इन रसूखदार नेताओं की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई 2026 को मुकर्रर की गई है। देखना बेहद दिलचस्प होगा कि खुद को पाक-साफ बताने वाली भाजपा अब इन दागदार चेहरों पर क्या रुख अपनाती है!