दशहरा मैदान में 200 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न..

शहनाइयों की गूंज और खाली मैदान के बीच संपन्न हुआ ‘सियासत और सादगी’ का संगम

छिंदवाड़ा के दशहरा मैदान में शुक्रवार को ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ के तहत 200 जोड़ों का परिणय संस्कार संपन्न हुआ। कहीं टाउन हॉल से निकली बारात में जनप्रतिनिधियों का उल्लास दिखा, तो कहीं विशाल मैदान के खाली कोनों ने पिछले आयोजनों की भव्यता पर सवाल खड़े कर दिए। आस्था, राजनीति और सरकारी इंतज़ामों के बीच इस बार का आयोजन उम्मीद से ‘फीका’ लेकिन चर्चाओं में ‘तीखा’ रहा।

कार्यक्रम का आगाज़ शाही अंदाज़ में हुआ। टाउन हॉल से जब बारात निकली, तो मंज़र देखने लायक था। सिर पर पारंपरिक साफा बांधे जनप्रतिनिधि ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरकते नज़र आए। शहर के मुख्य मार्गों से गुजरती इस बारात ने दशहरा मैदान तक उत्साह का माहौल बनाए रखा, जहाँ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जोड़ों ने एक-दूसरे का हाथ थामा।

भीड़ का ‘सूखा’ और खाली पंडाल: क्या चमक खो रहा है आयोजन?

छिंदवाड़ा में यह आयोजन हमेशा अपनी विशालता के लिए जाना जाता रहा है, जहाँ संख्या 10 हज़ार के पार चली जाती थी। लेकिन इस बार का नज़ारा जुदा था:

आधी उपस्थिति: जहाँ कभी लाल मैदान और इनर ग्राउंड जैसे बड़े स्थलों की ज़रूरत पड़ती थी, वहीं इस बार दशहरा मैदान भी आधा खाली नज़र आया। करीब 2 हज़ार लोगों की उपस्थिति ने आयोजन की रौनक को कम कर दिया।

बर्बादी की आशंका: प्रशासन ने 8 हज़ार लोगों के भोजन का प्रबंध किया था, लेकिन भीड़ न जुटने के कारण बड़ी मात्रा में कच्चा राशन और सामग्री शेष रह गई। यहाँ तक कि नगर निगम के कर्मचारी भी काम के अभाव में सुस्ताते नज़र आए।

नल’ के भरोसे पर ‘केन’ का प्रहार

आयोजन में पानी की व्यवस्था ने एक नया विवाद छेड़ दिया। नगर निगम ने प्यास बुझाने के लिए निजी सप्लायरों से 700 पानी की केन मंगवाईं।

सवाल: एक तरफ निगम शहर में शुद्ध पेयजल का दावा करता है, वहीं अपने ही सरकारी कार्यक्रम में उसे अपने जल प्रदाय तंत्र पर भरोसा नहीं रहा? गर्मी का तर्क दिया जरूर गया, लेकिन जनता के बीच यह चर्चा का विषय बना रहा कि “जब साहब को खुद के पानी पर भरोसा नहीं, तो हम कैसे करें?”

मंच पर भाषण, ज़मीन पर ‘उलझी’ जयमाला

जहाँ मंच से नेताजी के संबोधन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की गूंज थी, वहीं पंडाल के नीचे भावनाओं का अपना संसार चल रहा था।

एक अनूठा दृश्य: भाषणों के शोर के बीच एक जोड़ा अपनी उलझी हुई जयमाला को सुलझाने में मशगूल दिखा। सादगी और प्रेम के इस छोटे से पल ने वहां मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया, जो यह बताने के लिए काफी था कि दांपत्य की शुरुआत सहयोग से होती है।

सियासत का संदेश: “बेटियां अब बोझ नहीं”

सांसद विवेक बंटी साहू ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इसे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के विजन की जीत बताया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस योजना ने गरीब परिवारों के माथे से बेटियों की शादी की चिंता की लकीरें मिटा दी हैं। कार्यक्रम में महापौर विक्रम अहके, निगम आयुक्त सीपी राय और भाजपा के वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे।

कुल मिलाकर, छिंदवाड़ा का यह सामूहिक विवाह सम्मेलन सरकारी दावों और ज़मीनी हकीकत के बीच झूलता नज़र आया। जहाँ 200 घरों में खुशियां आईं, वहीं इंतज़ामों की सुस्ती और भीड़ की कमी ने प्रशासन को भविष्य के आयोजनों के लिए आत्ममंथन का संदेश भी दे दिया।