भैंसादंड में ‘मट्ठा’ बना मुसीबत: बारात की खुशियों में घुला रेबीज का खौफ, 92 लोगों को लगे इंजेक्शन!
“अक्सर दावतों में लोग स्वाद पूछते हैं, लेकिन भैंसादंड की इस बारात में अब लोग एक-दूसरे से स्वास्थ्य पूछ रहे हैं। एक बीमार गाय, घर की लापरवाही और 92 शिकार ! क्या आप जानते हैं कि आपके खाने की थाली में परोसा गया ‘शुद्ध’ मट्ठा भी आपको अस्पताल पहुंचा सकता है ? छिंदवाड़ा की इस चौंकाने वाली खबर को सुनकर आप अगली बारात में कुछ भी खाने से पहले सौ बार सोचेंगे।”
छिंदवाड़ा // कहते हैं सावधानी हटी और दुर्घटना घटी, लेकिन छिंदवाड़ा के पास भैंसादंड गांव में जो हुआ, उसने पूरी बारात के जायके को ‘खौफ’ में बदल दिया। यहाँ शादी की दावत में परोसा गया ‘मट्ठा’ मेहमानों के लिए जी का जंजाल बन गया। मामला इतना गंभीर है कि अब तक 92 से ज्यादा लोग अस्पताल की कतार में खड़े होकर रेबीज के इंजेक्शन लगवा रहे हैं।
लापरवाही की ‘सफेद’ सजा
मामले की जड़ में एक बेजुबान जानवर की बीमारी और इंसानी लापरवाही है। जानकारी के मुताबिक, जिस गाय के दूध से बारात के लिए मट्ठा तैयार किया गया था, उसे करीब एक हफ्ते पहले एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था। नियमानुसार ऐसे जानवर का दूध इस्तेमाल करना खतरनाक हो सकता है, लेकिन परिजनों ने इसे हल्के में लिया। मंगलवार को जब बारात में मेहमान मट्ठे का आनंद ले रहे थे, तभी अचानक उस गाय की हालत नाजुक हो गई।
जैसे ही यह खबर फैली कि ‘बीमार गाय’ का मट्ठा सबको परोसा गया है, शादी के घर में अफरा-तफरी मच गई। आनंद और उल्लास की जगह अब चेहरे पर बीमारी का डर साफ नजर आने लगा।
स्वास्थ्य विभाग का ‘रेस्क्यू ऑपरेशन’
खबर मिलते ही छिंदवाड़ा स्वास्थ्य विभाग एक्शन मोड में आ गया। उप स्वास्थ्य केंद्र भैंसादंड को तत्काल ‘इमरजेंसी कैंप’ में तब्दील कर दिया गया।
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अब तक का आंकड़ा: लगभग 92 लोगों को रेबीज रोधी टीके (ARV) लगाए जा चुके हैं।
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दवा का संकट: भीड़ इतनी ज्यादा थी कि गांव में इंजेक्शन कम पड़ गए, जिसके बाद जिला मुख्यालय से अतिरिक्त डोज मंगवाई गई।
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निगरानी: स्वास्थ्य अमला अभी भी मौके पर तैनात है और बारात की लिस्ट के आधार पर एक-एक मेहमान की पहचान की जा रही है।
“बारात में बड़ी संख्या में लोग थे। जैसे ही सच्चाई पता चली, हड़कंप मच गया। हम हर उस व्यक्ति को बुला रहे हैं जिसने मट्ठा पिया था ताकि किसी की जान को खतरा न हो।” — उमेश सोनी, स्थानीय निवासी
विशेषज्ञों की राय और अपील
मेडिकल कालेज के प्राध्यापक डॉ दिनेश ठाकुर का कहना है कि संक्रमित पशु का कच्चा दूध या उससे बने उत्पाद रेबीज का खतरा पैदा कर सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि:
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यदि आपने उस दिन मट्ठा पिया था, तो बिना देरी किए अपनी जांच कराएं।
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पशुओं के बीमार होने या कुत्ते के काटने पर उनका दूध उपयोग न करें और तुरंत पशु चिकित्सक को दिखाएं।
भैंसादंड की यह घटना एक सबक है कि छोटी सी लापरवाही कितनी बड़ी आबादी की जान जोखिम में डाल सकती है। फिलहाल, पूरा गांव दुआ कर रहा है कि वैक्सीन का सुरक्षा चक्र इस अनचाहे खतरे को टाल दे।