‘विश्व शांति यात्रा’ का छिंदवाड़ा से शंखनाद..

रामनारायण सराठे की ‘विश्व शांति यात्रा’ का छिंदवाड़ा से शंखनाद ..

संवाददाता : राकेश प्रजापति

“जब इरादे नेक हों, तो उम्र महज एक नंबर रह जाती है! 🚩

छिंदवाड़ा के रामनारायण सराठे (62 वर्ष) ने समाज को नई दिशा देने के लिए अपनी देह दान करने का संकल्प लिया है। उन्होंने ‘विश्व शांति यात्रा’ का शंखनाद किया और छिंदवाड़ा से बागेश्वर धाम की पदयात्रा पर रवाना हुए। नशा मुक्ति, गौ-रक्षा और राष्ट्र रक्षकों के सम्मान का यह संकल्प हर किसी के लिए प्रेरणा है।

जब इरादे नेक हों और आदर्श ऊंचे हों, तो व्यक्ति समाज के लिए चलता-फिरता प्रेरणापुंज बन जाता है। छिंदवाड़ा के 62 वर्षीय श्री रामनारायण सराठे (सेन) ने कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश किया है, जो आज के समय में समाजसेवा और त्याग की पराकाष्ठा है। सोमवार को उन्होंने अपनी आस्था और संकल्पों की पूर्ति के लिए छिंदवाड़ा से बागेश्वर धाम तक की पदयात्रा का ऐतिहासिक शुभारंभ किया।

आदर्शों की राह: देहदान का महासंकल्प

जननायक स्व. कर्पूरी ठाकुर जी को अपना आदर्श मानने वाले रामनारायण जी ने समाज को एक नई दिशा दिखाने का साहस किया है। उन्होंने बीते वर्ष अपनी देह को मृत्यु पश्चात दान करने का संकल्प लेकर मानवता की सेवा का उच्चतम मानक स्थापित किया। उनका मानना है कि जिस प्रकार कर्पूरी ठाकुर जी ने अपना पूरा जीवन वंचितों के उत्थान में लगाया, उसी प्रकार मृत्यु के बाद भी उनका शरीर चिकित्सा अनुसंधान या किसी जरूरतमंद के काम आ सके, यही उनके जीवन की सार्थकता होगी।

भक्ति और शक्ति का संगम: पदयात्रा का शुभारंभ

06 अप्रैल 2026, सोमवार को दोपहर 2 बजे, नरसिंहपुर रोड स्थित श्री संत शिरोमणि सेन महाराज मंदिर प्रांगण से इस ‘विश्व शांति यात्रा’ का विधिवत शंखनाद हुआ। यात्रा प्रारंभ करने से पूर्व रामनारायण जी ने सेन समाज भवन में सेन जी महाराज की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस भावुक और गौरवपूर्ण अवसर पर बड़ी संख्या में सामाजिक बंधु, मातृशक्तियां और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने पुष्पवर्षा कर यात्री का उत्साहवर्धन किया।

यात्रा के पांच संकल्प: समाज के नाम संदेश

यह यात्रा केवल एक धार्मिक प्रवास नहीं, बल्कि सामाजिक जागृति का एक बड़ा अभियान है। रामनारायण जी इन प्रमुख उद्देश्यों को लेकर बागेश्वर धाम की ओर बढ़ रहे हैं:

  1. विश्व शांति एवं सनातन एकता: वैश्विक सद्भावना का प्रसार।

  2. गौ-रक्षा: गौ-माता के संरक्षण हेतु समाज को प्रेरित करना।

  3. नशा मुक्ति: युवा पीढ़ी को नशे की कुरीतियों से बचाना।

  4. राष्ट्र रक्षकों का सम्मान: देश सेवा में तैनात सेना, पुलिस और लोकतंत्र के प्रहरी पत्रकारों का सम्मान करना।

  5. मानवता की अलख: देहदान और अंगदान जैसे पुनीत कार्यों के प्रति जागरूकता लाना।

युवाओं के लिए प्रेरणापुंज

62 वर्ष की आयु में इस कठिन पदयात्रा का बीड़ा उठाना युवाओं के लिए एक बड़ी सीख है। रामनारायण जी ने सिद्ध कर दिया है कि इंसान अपने विचारों और कार्यों से अमर होता है। यात्रा की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा:

“सेवा का मार्ग ही सबसे कठिन और सबसे पवित्र है। यदि मेरा शरीर जाने के बाद भी समाज के काम आ सके, तो यही मेरे जीवन का सार्थक होना है।”

छिंदवाड़ा से शुरू हुई यह यात्रा अब मानवता और शांति का संदेश लेकर बागेश्वर धाम की ओर अग्रसर है। समाज के हर वर्ग ने उनके इस जज्बे की सराहना की है।

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