लाइक्स की भूख और इंसानियत का पतन: जब रील्स के लिए मगरमच्छ को तड़पाया, तो STSF ने सिखाया कानून का सबक !
आज के डिजिटल युग में ‘लाइक्स’ और ‘फॉलोअर्स’ की अंधी दौड़ इंसान को किस कदर संवेदनहीन बना रही है, इसका एक शर्मनाक उदाहरण मध्य प्रदेश के शिवपुरी से सामने आया है। सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरने के लिए अनुसूची-1 में शामिल अत्यंत संरक्षित वन्यजीव मगरमच्छ के साथ बर्बरता करने वाले दो आरोपियों को स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) और स्थानीय वन अमले ने दबोच लिया है। यह खबर केवल एक गिरफ्तारी की नहीं है, बल्कि हमारे भीतर मरती जा रही पर्यावरणीय संवेदनाओं पर एक ज़ोरदार तमाचा है।
राकेश प्रजापति
रील्स के लिए बेज़ुबान पर ज़ुल्म ..
शिवपुरी जिले के ग्राम गरेंठा (तहसील पिछोर) के रहने वाले दो आरोपियों—सुखनंदन केवट एवं गुलई सिंह—ने महज़ चंद लाइक्स और इंस्टाग्राम रील पर वाहवाही लूटने के लिए क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं।
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अमानवीय कृत्य: इन्होंने एक मगरमच्छ को अवैध तरीके से पकड़ा, उसे बेरहमी से घसीटा, उठाकर पटका और उसके साथ गंभीर छेड़छाड़ की।
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नदी में मौत का करंट: पूछताछ में जो सच सामने आया, वह और भी खौफनाक है। आरोपी मछली मारने के लिए बुधना नदी में लगातार बिजली का करंट दौड़ाते थे, जिसकी चपेट में आकर ये बेज़ुबान मगरमच्छ भी मौत के मुंह में जा रहे थे।
कानून का कड़ा प्रहार: STSF की मुस्तैदी
प्रकृति के इन प्रहरियों पर अत्याचार करने वालों को यह भूलना भारी पड़ गया कि कानून की नज़रें डिजिटल दुनिया पर भी उतनी ही पैनी हैं। STSF ने मुखबिर की सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर इन्हें माननीय न्यायालय पिछोर के समक्ष पेश कर दिया गया है।
याद रखें: वन्यजीव मगरमच्छ को मारना या उसके साथ छेड़छाड़ करना एक गंभीर गैर-जमानती अपराध है, जिसमें न्यूनतम 3 वर्ष और अधिकतम 7 वर्ष की कड़ी सज़ा का प्रावधान है।
बेज़ुबान खिलौना नहीं, इस धरती का संतुलन हैं !
यह घटना हमें एक गंभीर आत्मचिंतन के मोड़ पर लाकर खड़ा करती है। नदियां और उनमें रहने वाले जीव हमारी रील्स के “कंटेंट” या मनोरंजन के साधन नहीं हैं। मगरमच्छ नदियों के इकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) को साफ और संतुलित रखने में रीढ़ की हड्डी की तरह काम करते हैं। यदि हम अपने क्षणिक फायदे या वर्चुअल लोकप्रियता के लिए इन्हें बिजली के झटके देंगे या प्रताड़ित करेंगे, तो हम सीधे तौर पर अपनी आने वाली पीढ़ियों के पानी और पर्यावरण में ज़हर घोल रहे हैं।
वन विभाग की अपील: सोशल मीडिया पर झूठी शान और सुर्खियां बटोरने के लिए निरीह और बेज़ुबान वन्यजीवों के साथ खिलवाड़ कतई न करें। प्रकृति का सम्मान करें, क्योंकि यदि यह जैव-विविधता (Biodiversity) नष्ट हो गई, तो इंसान का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा।