नगर वन में जीवन लौटा – पंखों की फड़फड़ाहट में गूंजा पर्यावरणीय संदेश ..

पोआमा नगर वन में जीवन लौटा – पंखों की फड़फड़ाहट में गूंजा जल, जंगल, जमीन का संदेश 

जब जमीन सुरक्षित होती है, जंगल सांस लेता है और जल स्रोतों में जीवन बना रहता है, तभी आकाश में प्रवासी पंख लौटते हैं। शहर पोआमा नगर वन में कुछ ऐसा ही पर्यावरणीय द्रश्य नजर आया। सतपुड़ा साइंस एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसायटी द्वारा आयोजित बर्ड वॉक में 44 पक्षी प्रजातियों की मौजूदगी ने बता दिया कि यह नगर वन सिर्फ एक पार्क नहीं, बल्कि छिंदवाड़ा की पारिस्थितिकी का धड़कता हुआ दिल है।

✍️ राकेश प्रजापति 

यह सिर्फ एक पक्षी गणना नहीं थी, यह इस बात का प्रमाण था कि हमारा जल, जंगल और जमीन अभी भी जीवंत है।बर्ड वॉक की सबसे बड़ी पर्यावरणीय उपलब्धि रही तीन नई शीतकालीन प्रवासी प्रजातियों का रिकॉर्ड – ब्राउन श्राइक, कॉमन चिफचैफ और यूरेशियन वाइननेक।

ये पक्षी हजारों किलोमीटर का सफर तय करके वहीं उतरते हैं जहाँ जमीन में जहर नहीं, जहाँ कीट-पतंगे, बीज और प्राकृतिक घास मौजूद हो। इनका पोआमा में उतरना इस बात का जैव-संकेतक है कि यहाँ की मिट्टी और जमीन का तंत्र अभी भी स्वस्थ है। यह शहर के बीच बसा एक ऐसा ‘लैंड-बैंक’ है जो आने वाली पीढ़ी के लिए शुद्ध हवा और उपजाऊपन बचा रहा है।

इसके साथ ही ओरिएंटल हनी-बज़र्ड, लॉन्ग-टेल्ड श्राइक, पफ-थ्रोटेड बैबलर, कॉमन आयोरा और जंगल बैबलर जैसी 44 प्रजातियों का दिखना इस जमीन की समृद्ध जैव विविधता का दस्तावेज है। पोआमा नगर वन जैसे शहरी वन ही वह सेतु हैं जो इंसान को जंगल से जोड़ते हैं। यहाँ बबूल-कत्था नहीं, बल्कि देशी पेड़ों की छाँव, झाड़ियों का जाल और घोंसले बनाने लायक शांत कोना है, तभी पक्षी यहाँ रुकते हैं।

एसएसईडब्ल्यूएस की डायरेक्टर मनीषा परिहार ने इसी बात को रेखांकित किया –“पोआमा में शीतकालीन प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू होना छिंदवाड़ा के लिए खुशी की बात है। तीन नई प्रजातियों का रिकॉर्ड होना विशेष उपलब्धि है। नियमित पक्षी भ्रमण और नागरिक विज्ञान के जरिए हम इस जैव विविधता को दस्तावेज कर रहे हैं, ताकि जंगल बचा रहे।”

पक्षियों की उपस्थिति सीधे तौर पर जल स्रोतों से जुड़ी है। पोआमा की नमी, उसके आसपास के छोटे तालाब और जमीन में बचा जल ही कीटों को जन्म देता है, जो इन प्रवासी पक्षियों का भोजन है। यदि जल सूखा, तो यह आकाश सूना हो जाएगा। इसलिए 44 प्रजातियों का दिखना यह भी बताता है कि इस क्षेत्र का जल-चक्र अभी संतुलित है।

छिंदवाड़ा रेंज ऑफिसर नीरज बिसेन की उपस्थिति ने इस जन-भागीदारी को बल दिया। पोआमा में हुई यह बर्ड वॉक एक नई शुरुआत है। यह याद दिलाती है कि – जमीन बचेगी तो अन्न बचेगा, जंगल बचेगा तो पंछी लौटेंगे, और जल बचेगा तो जीवन बचेगा।

छिंदवाड़ा के बीचों-बीच मौजूद यह नगर वन, जल, जंगल और जमीन के इसी त्रिकोण को साधे हुए है।