‘मन की बात’ में गूंजा नरसिंहपुर: जल संरक्षण में बनी राष्ट्रीय मिसाल

जनभागीदारी से जल क्रांति: जब नरसिंहपुर के प्रयासों की गूंज ‘मन की बात’ में सुनाई दी

एक बूंद पानी, एक बड़ा बदलाव ! जब नीति, नेतृत्व और जनभागीदारी का संगम होता है, तो सूखी जमीन भी हरियाली से लहलहा उठती है। मध्य प्रदेश का नरसिंहपुर जिला आज देश के सामने जल संरक्षण का एक अनुकरणीय और राष्ट्रीय मॉडल बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में ‘कैच द रेन’ (Catch the Rain) अभियान के तहत नरसिंहपुर जिले में किए गए जल संरक्षण कार्यों की खुलकर सराहना की है। यह सिर्फ एक प्रशंसा नहीं, बल्कि ग्रामीण और शहरी भारत के लिए सामूहिक प्रयास की शक्ति का राष्ट्रीय प्रमाण पत्र है।

✍️ त्वरित टिप्पणी : राकेश प्रजापति 

  • राष्ट्रीय पहचान: ‘मन की बात’ कार्यक्रम में नरसिंहपुर मॉडल का विशेष उल्लेख।

  • कंटूर ट्रेंच निर्माण: भू-जल स्तर को बढ़ाने के लिए रिकॉर्ड लगभग 79 हजार कंटूर ट्रेंच (Contour Trenches) तैयार किए गए।

  • अतिक्रमण से मुक्ति: सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराकर बड़े पैमाने पर जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया।

  • छत से जल संचयन (Roof Water Harvesting): जिले के सभी स्कूलों, शासकीय कार्यालयों और निजी/सरकारी भवनों में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था की गई।

  • अमृत सरोवर एवं पुनर्जीवन: प्राचीन जल स्रोतों के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के साथ नए अमृत सरोवरों का निर्माण।

नरसिंहपुर मॉडल की सफलता के 3 स्तम्भ :  1. प्रशासनिक दूरदर्शिता और सतत निगरानी

कलेक्टर रजनी सिंह और जिला पंचायत सीईओ गजेंद्र सिंह नागेश के कुशल नेतृत्व में योजना को केवल कागजों तक सीमित न रखकर धरातल पर उतारा गया। सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराना और निजी व सार्वजनिक भवनों में रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य बनाना एक निर्णायक कदम साबित हुआ।

2. ‘जल संरक्षण’ से ‘जन आंदोलन’ का सफर

यह अभियान केवल एक सरकारी योजना नहीं रहा, बल्कि इसमें ग्राम पंचायतों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। जब समाज अपनी संपदा (पानी) की जिम्मेदारी खुद उठाता है, तो ऐसे ही स्थायी परिणाम सामने आते हैं।

3. पारिस्थितिकी संतुलन और हरित क्षेत्र का विस्तार

पानी रोकने के साथ-साथ जिले में हरित क्षेत्र (Green Belt) को बढ़ाने पर ध्यान दिया गया। जल संरचनाओं के आसपास पौधरोपण करने से न केवल भू-जल स्तर सुधरा है, बल्कि स्थानीय पर्यावरण भी समृद्ध हुआ है।

“प्रधानमंत्री जी द्वारा जिले का उल्लेख पूरे नरसिंहपुर के लिए सम्मान की बात है। जल संरक्षण का अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है। सभी शासकीय भवनों, स्कूलों और शहरी क्षेत्रों में भी वर्षा जल संचयन कार्यों को और गति दी जाएगी।”

रजनी सिंह, कलेक्टर, नरसिंहपुर

“यह उपलब्धि जिले के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। अमृत सरोवरों और नदी पुनर्जीवन के साथ जल संरचनाओं के आसपास हरित क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। पंचायतों को इसकी नियमित निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।”

गजेंद्र सिंह नागेश, सीईओ, जिला पंचायत नरसिंहपुर

नरसिंहपुर की यह सफलता साबित करती है कि “पानी बचाने के लिए केवल बजट की नहीं, बल्कि दूरदृष्टि और जनभागीदारी की जरूरत होती है।” केंद्रीय जल आयोग द्वारा पहले भी सराहा जा चुका यह मॉडल आज देश के अन्य जिलों के लिए प्रेरणास्रोत है। जल संकट से जूझती दुनिया में नरसिंहपुर ने यह दिखाया है कि यदि नीयत साफ हो और हाथ से हाथ मिले, तो बारिश की हर बूंद को सहेजा जा सकता है।