जहरीला पानी पीने से 80 ग्रामीण बीमार, जांच शुरू

किशनपुर में ज़हर का कुआं ! 70 से अधिक ग्रामीण बीमार, कुएं में सल्फास मिलाने की आशंका से हड़कंप

छिंदवाड़ा/बिछुआ। बिछुआ विकासखंड के ग्राम किशनपुर में आज को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब सार्वजनिक कुएं का पानी पीने के बाद एक के बाद एक ग्रामीणों की तबीयत बिगड़ने लगी। देखते ही देखते 70 से 80 ग्रामीण उल्टी, घबराहट और बेचैनी की शिकायत के साथ बीमार पड़ गए, जिससे पूरे गांव में दहशत का माहौल बन गया।

ग्रामीणों का आरोप है कि किसी असामाजिक तत्व ने गांव के सार्वजनिक कुएं में सल्फास जैसा जहरीला पदार्थ डाल दिया, जिसके कारण यह गंभीर घटना हुई। आरोपों को बल तब मिला जब ग्रामीणों को कुएं के पास सल्फास के खाली पैकेट, पाउडर के अवशेष और मृत कीड़े-मकोड़े दिखाई दिए।

सुबह भरा पानी, दोपहर तक अस्पताल पहुंच गए लोग

जानकारी के अनुसार ग्रामीण रोज की तरह इसी सार्वजनिक कुएं से पीने और घरेलू उपयोग के लिए पानी भरकर ले गए थे। कुछ लोगों ने पानी में असामान्य गंध महसूस की, लेकिन तब तक कई परिवार उस पानी का उपयोग कर चुके थे। थोड़ी ही देर में लोगों को उल्टियां, चक्कर, घबराहट और बेचैनी की शिकायत होने लगी।

जैसे-जैसे बीमारों की संख्या बढ़ती गई, पूरे गांव में हड़कंप मच गया। परिजन अपने बीमार सदस्यों को लेकर इधर-उधर भागते नजर आए।

कुएं के पास मिले सल्फास के पैकेट, साजिश की आशंका गहराई

घटना के बाद ग्रामीण जब कुएं के पास पहुंचे तो वहां कथित रूप से सल्फास के खाली पैकेट और पाउडर के अंश मिले। कुएं में कई कीड़े-मकोड़े भी मृत पाए गए। इन तथ्यों ने पूरे मामले को महज लापरवाही नहीं बल्कि संभावित आपराधिक साजिश की दिशा में खड़ा कर दिया है।

ग्रामीणों का सवाल है कि यदि वास्तव में कुएं में जहर मिलाया गया है तो यह सामूहिक जनहानि की कोशिश नहीं तो और क्या है ?

प्रशासन हरकत में, पांच एंबुलेंस भेजी गईं

घटना की सूचना मिलते ही तहसीलदार सहित प्रशासनिक अमला गांव पहुंचा। प्रभावित ग्रामीणों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए पांच एंबुलेंसों की व्यवस्था की गई। सभी बीमारों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और आसपास के स्वास्थ्य संस्थानों में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया।

सबसे बड़ा सवाल—गांव के पानी में जहर किसने मिलाया?

यह घटना केवल स्वास्थ्य संकट नहीं बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है। यदि कुएं में वास्तव में सल्फास डाला गया है तो दोषी कौन है ? क्या यह शरारत थी, निजी रंजिश या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा ?

प्रशासन को अब केवल इलाज तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पानी के नमूनों की तत्काल फोरेंसिक जांच, पुलिस जांच और दोषियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करनी होगी। क्योंकि यह मामला सीधे-सीधे सैकड़ों ग्रामीणों की जिंदगी से जुड़ा है।

किशनपुर का यह “जहरीला कुआं” अब केवल एक हादसा नहीं, बल्कि जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी परीक्षा बन गया है।