वन विभाग का बड़ा एक्शन: रेत से भरा टिप्पर जब्त, माफिया में हड़कंप

आधी रात का सन्नाटा, वन अमले का चक्रव्यूह और दबोचा गया रेत माफिया: छिंदवाड़ा वन विभाग की जाखावाड़ी में सर्जिकल स्ट्राइक !

रात के सन्नाटे में जब पूरी दुनिया गहरी नींद में डूबी थी, तभी कुदरत के सीने को छलनी करने निकले रेत माफिया के मंसूबों पर वन विभाग ने आधी रात को जोरदार प्रहार कर दिया। 14 अगस्त 2026 की दरमियानी रात छिंदवाड़ा के पूर्व वनमण्डल अंतर्गत जाखावाड़ी वन चौकी का इलाका अचानक किसी एक्शन थ्रिलर फिल्म के मैदान में तब्दील हो गया।मुखबिर से पुख्ता इनपुट मिलते ही पूर्व उपवनमंडल अधिकारी श्री अनादि बुधोलिया एवं परिक्षेत्र अधिकारी नीरज बिसेन के सटीक निर्देशन में एक विशेष रणनीति तैयार की गई। रणनीति साफ थी—माफिया को भागने का एक भी मौका नहीं देना।

जब अंधेरे को चीरती लाइटों के बीच घिर गया ‘टिप्पर’

जाखावाड़ी वन चौकी पर तैनात वन अमला चौकन्ना था। सन्नाटे को चीरती हुई एक भारी इंजन की आवाज गूंजती है। नदी का सीना चीरकर अवैध रेत से लदा आयशर टिप्पर (क्रमांक MP 28 ZN 9390) तेज रफ्तार में वन क्षेत्र से गुजरने की फिराक में था।

ड्राइवर को लगा कि रात का अंधेरा उसका सुरक्षा कवच बन जाएगा, लेकिन उसे अंदाजा नहीं था कि आगे वन विभाग का अचूक जाल बिछा है। जैसे ही वाहन चौकी के करीब पहुंचा, परिसर सहायक जाखावाड़ी मनोज शुक्ला, वन रक्षक रमेश मर्सकोले, वन रक्षक दामोदर सिरस्वे और उनकी टीम ने बिजली की फुर्ती से घेराबंदी कर दी। टिप्पर को चारों तरफ से घेरकर उसके पहियों को वहीं थाम दिया गया।

रेत माफिया के गुर्गों के होश उड़ गए, भागने की हर कोशिश नाकाम साबित हुई और टीम ने मौके पर ही अवैध रेत से लदे टिप्पर को धर दबोचा।

नदियों का सीना छलनी कर अवैध उत्खनन करने वाले यह भूल जाते हैं कि उनका यह लालच पर्यावरण, जलीय जीवन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को गहरे संकट में धकेल रहा है। नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को नष्ट कर केवल अपनी जेबें भरने वाले माफियाओं को छिंदवाड़ा वन विभाग ने यह कड़ा संदेश दिया है कि पर्यावरण से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

माफियाओं में हड़कंप

जब्त किए गए वाहन MP 28 ZN 9390 और उस पर लदी अवैध रेत को कब्जे में लेकर वन अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत विधिवत कार्रवाई और विवेचना शुरू कर दी गई है। वन विभाग की इस मुस्तैदी और तेजतर्रार कार्रवाई से पूरे अंचल के रेत माफियाओं और अवैध परिवहनकर्ताओं में हड़कंप मच गया है।

वन संपदा और पर्यावरण की रक्षा के लिए वन अमला 24 घंटे मुस्तैद है। कानून को धता बताकर जंगलों और नदियों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ यह प्रहार आगे भी इसी आक्रामकता से जारी रहेगा।