प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी होगी भंग, नई टीम का रोडमैप तैयार..

सियासी कायाकल्प: एमपी कांग्रेस में ‘मेजर सर्जरी’ की उल्टी गिनती, जंबो टीम की जगह लेगी ‘स्ट्राइकिंग फोर्स’

मध्यप्रदेश की सियासी बिसात पर कांग्रेस अपने सबसे बड़े ‘ओवरहाल’ (व्यापक बदलाव) की तैयारी में है। प्रदेश कांग्रेस की विशालकाय और सुस्त पड़ चुकी कार्यकारिणी पर जल्द ही कैंची चलने वाली है। कांग्रेस की ‘पॉलिटिकल अफेयर कमेटी’ (PAC) की हाई-वोल्टेज बैठक में यह साफ हो गया कि मौजूदा जंबो कार्यकारिणी को भंग कर एक नई, चुस्त और मारक टीम का गठन किया जाएगा। मकसद साफ है—भीड़ की जगह उन चेहरों को तरजीह देना, जिनकी जमीन पर पकड़ है।

✍️ राकेश प्रजापति 

कांग्रेस का यह कदम यूं ही नहीं उठाया गया है। दरअसल, 328 पदाधिकारियों वाली मौजूदा प्रदेश कार्यकारिणी अपने ही वजन से दब गई थी। बैठक में इस बात पर तीखी बहस हुई कि पदों की रेवड़ियां उन लोगों को बांट दी गईं, जिनका कोई जनाधार नहीं है।

पूर्व नेता प्रतिपक्ष और PAC सदस्य डॉ. गोविंद सिंह ने तल्ख लहजे में पार्टी की दुखती रग पर हाथ रखा। उन्होंने साफ कहा, “मैं खुद अपने जिले के किसान कांग्रेस अध्यक्ष को नहीं जानता। ऐसे अनाम लोगों को जिम्मेदारियां दे दी गईं, जिन्हें उनके खुद के जिले में कोई नहीं पहचानता।” इसी के बाद तय हुआ कि वरिष्ठ और प्रभाव वाले जो नेता अब तक हाशिए पर थे, उन्हें मुख्यधारा में लाया जाएगा और केवल नेताओं की सिफारिश पर कागजी नियुक्तियां बंद होंगी।

इस अहम बैठक में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, डॉ. गोविंद सिंह और CWC सदस्य कमलेश्वर पटेल प्रत्यक्ष रूप से शामिल रहे, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने वर्चुअली जुड़कर रणनीतिक मंथन में हिस्सा लिया।

‘जन विश्वास अभियान’ के चक्रव्यूह को भेदने की तैयारी

सत्ताधारी दल द्वारा हाल ही में पूरे प्रदेश में छेड़े गए ‘मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान’ ने कांग्रेस आलाकमान के कान खड़े कर दिए हैं। भाजपा का यह अभियान सीधे तौर पर एंटी-इनकंबेंसी को खत्म करने और जनता के बीच सरकार की छवि को चमकाने का एक मेगा-प्लान है।

इसकी ‘काट’ के रूप में कांग्रेस ने भी अपनी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। नई कार्यकारिणी का मुख्य एजेंडा ही यही होगा कि ‘जन विश्वास अभियान’ के समानांतर एक आक्रामक जमीनी अभियान चलाया जाए। कांग्रेस अब सरकारी दावों की जमीनी हकीकत का ‘कच्चा चिट्ठा’ लेकर सीधे जनता के दरवाजे तक जाएगी। नई टीम को टास्क दिया जाएगा कि वे भाजपा के इस अभियान के दौरान उठाए गए मुद्दों की पोल खोलें और जनता को बताएं कि ‘विश्वास’ के नाम पर छलावा हो रहा है।

आसन्न नगरीय निकाय चुनाव कांग्रेस के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं हैं। नई कार्यकारिणी के गठन के पीछे सबसे बड़ा रणनीतिक ब्लूप्रिंट इन्हीं चुनावों को फतह करना है। कांग्रेस अब समझ चुकी है कि ‘ड्राइंग रूम पॉलिटिक्स’ से चुनाव नहीं जीते जा सकते।

बूथ मैनेजमेंट का नया फॉर्मूला:

  • माइक्रो-लेवल एक्टिवेशन: प्रदेश स्तर से लेकर वार्ड स्तर तक एक सीधी चेन कमांड बनाई जा रही है। हर वार्ड और बूथ के लिए एक ‘प्रभारी’ नियुक्त होगा, जिसकी जवाबदेही सीधे प्रदेश अध्यक्ष को होगी।

  • पन्ना प्रभारियों की तर्ज पर ‘बूथ रक्षक’: मैदानी कार्यकर्ताओं की फौज को फिर से चार्ज करने के लिए कांग्रेस ‘बूथ रक्षक’ मॉडल पर काम कर रही है। नई कार्यकारिणी का हर पदाधिकारी कम से कम 10 बूथों की सीधी मॉनिटरिंग करेगा।

  • युवा और आक्रामक चेहरों को तरजीह: नगरीय निकायों में युवाओं और महिलाओं की बड़ी भागीदारी को देखते हुए, नई टीम में ऐसे चेहरों को आगे किया जाएगा जो सड़कों पर संघर्ष करने का माद्दा रखते हों।

मध्यप्रदेश कांग्रेस अब ‘वेट एंड वॉच’ की मुद्रा से बाहर आकर ‘अटैक मोड’ में आ रही है। कार्यकारिणी भंग कर नई टीम का गठन केवल एक सांगठनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि यह भाजपा के ‘जन विश्वास अभियान’ को काउंटर करने और निकाय चुनावों में सत्ता की चाबी छीनने के लिए बिछाई जा रही एक नई सियासी बिसात है।