‘जन विश्वास अभियान’ या मीडिया पर बैन ? पत्रकारों से क्या छिपा रहे हैं अफसर ..

‘जन विश्वास’ या ‘पत्रकार उपेक्षा’ अभियान ? छिंदवाड़ा प्रशासन के रवैये से सरकार की मंशा पर फिरा पानी !

आम जनता के बीच सरकार की पहुंच बढ़ाने और उनके छोटे-बड़े मुद्दों को उनके दरवाजे पर ही सुलझाने के बड़े दावों के साथ मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान की शुरुआत हुई। विडंबना देखिए कि जिस अभियान का मकसद जनता में ‘विश्वास’ जगाना था, उसे छिंदवाड़ा जिला प्रशासन ने ‘गोपनीयता’ और ‘उपेक्षा’ के साए में धकेल दिया है। सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर छिंदवाड़ा जिला प्रशासन पत्रकारों से ऐसा क्या छुपाना चाह रहा है, जो मीडिया के प्रवेश पर ही अघोषित पाबंदी लगा दी गई है ?
✍️ राकेश प्रजापति 
शुरुआत से ही पत्रकारों से दूरी, मंशा पर उठे सवाल
छिंदवाड़ा// बीती 7 अगस्त को छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में इस बड़े अभियान का आगाज हुआ। उम्मीद थी कि सरकार की इस जनहितैषी योजना को मीडिया के माध्यम से प्रदेश के कोने-कोने तक पहुंचाया जाएगा। लेकिन प्रशासन ने इस मुख्य कार्यक्रम में ही पत्रकारों को दूर रखा। हद तो तब हो गई जब सजग प्रहरी माने जाने वाले लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के प्रवेश पर ही प्रतिबंध जैसी स्थिति पैदा कर दी गई।
तामिया के छिंदी में भी दोहराया गया रवैया
प्रशासन की यह ‘भूल’ कोई इत्तेफाक नहीं थी, बल्कि यह उनका रवैया बन चुका है। आज जब तामिया विकासखंड के छिंदी में इसी अभियान के तहत बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया, तब भी जिला प्रशासन के आलाधिकारियों ने पत्रकारों को आमंत्रित करना तक मुनासिब नहीं समझा।
विज्ञप्ति और चमचमाती तस्वीरों से कब तक सजेगी ‘हकीकत’ ? प्रशासन का यह रवैया कई गंभीर सवाल खड़े करता है:
    • सफलता का पैमाना कौन तय करेगा ?: क्या इस अभियान के उद्देश्य, इसकी सफलता या विफलता का पैमाना केवल प्रशासन द्वारा जारी की जाने वाली वातानुकूलित शासकीय विज्ञप्तियां और चुनिंदा तस्वीरें तय करेंगी ?
    • सच्चाई का गला घोंटने की कोशिश ?: पत्रकारों को दूर रखकर प्रशासन जमीनी स्तर की कमियों, जनता के गुस्से या अव्यवस्थाओं को उजागर होने से बचाना चाहता है ?
    • सरकारी मंशा पर चोट: जब खुद मुख्यमंत्री पूरी सरकार को जनता के द्वार पर ले जाने की बात कह रहे हैं, तो छिंदवाड़ा प्रशासन बंद कमरों और मीडिया-मुक्त दौरों के जरिए किसे खुश करना चाहता है ?

इस अभियान से पत्रकारों को दूर रखे जाने पर तीखा सवाल उठना शत-प्रतिशत जायज है। केवल एकतरफा प्रेस नोट भेज देने भर से जमीनी हकीकत को न तो छुपाया जा सकता है और न ही बदला जा सकता है। मीडिया का काम केवल सरकारी वाहवाही को छापना नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं के निपटारे की असलियत को सामने लाना है।
यदि जिला प्रशासन इसी तरह हकीकत पर पर्दा डालता रहा, तो ‘जन विश्वास अभियान’ केवल कागजी आंकड़ों और तस्वीरों तक सिमटकर रह जाएगा। प्रशासन को इस अलोकतांत्रिक रवैये पर जवाब देना ही होगा कि आखिर उन्हें मीडिया के कैमरों और तीखे सवालों से इतना डर क्यों लग रहा है ?