दतिया का सन्नाटा ! कम वोटिंग ने उड़ाई BJP-कांग्रेस के दिग्गजों की नींद

दतिया का कुरुक्षेत्र: घटे मतदान के सन्नाटे में गूंज रही दिग्गजों की धड़कनें

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट का उपचुनाव अब महज एक सीट का चुनावी दंगल नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रदेश के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने वाला ‘महासमर’ बन चुका है। गुरुवार को दतिया की जनता ने अपना फैसला ईवीएम (EVM) में कैद कर दिया। लेकिन 71.44 प्रतिशत के मतदान ने—जो 2023 के मुकाबले 8.76 फीसदी कम है—एक ऐसा सन्नाटा पैदा कर दिया है, जिसने भाजपा और कांग्रेस दोनों ही खेमों के रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है।अब सबकी निगाहें 3 अगस्त पर टिकी हैं, क्योंकि यह दिन केवल एक विधायक का नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के तीन सबसे कद्दावर चेहरों के राजनीतिक कद का फैसला करेगा।

विशेष रिपोर्ट : राकेश प्रजापति

सत्ता के त्रिकोण में फंसी दिग्गजों की साख

यह चुनाव केवल आशुतोष तिवारी या घनश्याम सिंह का नहीं है, बल्कि यह बैकग्राउंड में खड़े उन दिग्गजों का ‘लिटमस टेस्ट’ है, जिनकी साख सीधे तौर पर दांव पर लगी है:

डॉ. मोहन यादव (सत्ता और नेतृत्व की परीक्षा): मुख्यमंत्री के तौर पर दतिया का यह रण उनके नेतृत्व और सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर साबित होगा। जीत मिली, तो संगठन में उनका कद और विशाल होगा; हार मिली, तो विपक्ष को एक बड़ा हथियार मिल जाएगा।

  • डॉ. नरोत्तम मिश्रा (प्रभाव और वर्चस्व की लड़ाई): दतिया नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक कर्मभूमि रही है। टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों के सामूहिक इस्तीफे के ड्रामे ने इस चुनाव को और भी दिलचस्प बना दिया था। खुद टिकट न मिलने के बावजूद उन्होंने घर-घर जाकर भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के लिए पसीना बहाया। अब यह चुनाव साबित करेगा कि दतिया में नरोत्तम का ‘सिस्टम’ और प्रभाव अभी भी कितना प्रासंगिक है।

  • जीतू पटवारी (संगठन की अग्निपरीक्षा): लोकसभा चुनाव की करारी हार के बाद, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में यह उपचुनाव पटवारी के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति है। अगर कांग्रेस यह सीट बचा लेती है, तो यह उनके नेतृत्व में संजीवनी का काम करेगा।

यह उपचुनाव कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की एक आपराधिक मामले में सदस्यता रद्द होने के बाद उपजी राजनीतिक शून्यता को भरने के लिए हो रहा है। चुनावी रण में कुल 21 योद्धा मैदान में हैं, लेकिन असली टक्कर राजघराने और संगठन के बीच है:

  • कांग्रेस का दांव: पार्टी ने दतिया राजघराने के चेहरे घनश्याम सिंह पर भरोसा जताया है।

  • भाजपा का भरोसा: पार्टी ने पुराने चेहरे के बजाय आशुतोष तिवारी के रूप में संगठन के आदमी को मैदान में उतारा है।

  • त्रिकोणीय पेंच: आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार दामोदर यादव ने इस सीधे मुकाबले को त्रिकोणीय बनाकर दोनों राष्ट्रीय पार्टियों के समीकरण उलझा दिए हैं।

वोटिंग का दिन बिना किसी हंगामे के नहीं बीता। सिरोल, जिगना और रामनगर के पोलिंग बूथों पर हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला।

कांग्रेस ने फर्जी मतदान और पुलिस द्वारा उनके पोलिंग एजेंट को जबरन ले जाने के गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह खुद बूथों पर पहुंचे और पुलिस-प्रशासन से तीखी नोकझोंक हुई। भाजपा ने इसे कांग्रेस की संभावित हार से उपजी ‘हताशा’ करार दिया।

मतदान खत्म होते ही दावों की आंधी भी शुरू हो गई है:

  • भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल: “हम सरकार के विकास और नीतियों के दम पर एकतरफा और बड़े अंतर से यह चुनाव जीत रहे हैं।”

  • पीसीसी चीफ जीतू पटवारी: “भाजपा ने प्रशासनिक मशीनरी का जो दुरुपयोग किया है, उसे जनता ने नकार दिया है। कांग्रेस भारी बहुमत से जीतकर इस तानाशाही का करारा जवाब देगी।”

दतिया की खामोश जनता ने अपना फैसला सुना दिया है। अब यह खामोशी 3 अगस्त को टूटेगी, और जब यह टूटेगी, तो मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा भूचाल तय है। किसके दावों में कितना दम है और कौन सा दिग्गज अपनी साख बचाने में कामयाब रहता है, इसका फैसला अब सिर्फ समय के हाथ में है।