ऑपरेशन ‘हंट द हंटर्स’ (शिकारियों का शिकार)
आधी रात का वो खौफनाक ऑपरेशन… जब नकली नोटों के दम पर वन विभाग के जांबाजों ने दबोचे देश के सबसे शातिर वन्यजीव तस्कर
खोजी रिपोर्ट राकेश प्रजापति
यह कहानी किसी हॉलीवुड सस्पेंस थ्रिलर से कम नहीं है। घने जंगलों की सरसराहट, २० लाख रुपयों का सौदा, लालच का जाल, नकली नोटों की गड्डियां और पल-पल बदलती लोकेशन। लेकिन यह कोई फिल्मी पटकथा नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के नरसिंगपुर/छिंदवाड़ा और हर्रई के जंगलों के बीच खेला गया वह असल और खतरनाक खेल है, जिसे वन विभाग के कुछ जांबाज ‘सीक्रेट एजेंट्स’ ने अपनी जान दांव पर लगाकर अंजाम दिया। हालांकि इसका आधा-अधुरा खुलासा हुआ , परन्तु इतनी बड़ी सफलता को आखिर वन विभाग छिपा क्यों रहा है ? हमारी यह रिपोर्ट पूरा सच आपके सामने रख रही है !
आइए आपको ले चलते हैं इस बेहद खुफिया और रोंगटे खड़े कर देने वाले ऑपरेशन के उस बैकस्टेज में, जहां पलक झपकते ही शिकारियों की बंदूक का रुख इन जांबाजों की तरफ मुड़ सकता था।
मुखबिर की वो एक कॉल… और बुना गया चक्रव्यूह
कहानी शुरू होती है एक बेहद खुफिया सूचना से। उड़नदस्ते के फैज खान, परासिया के लिंकन राठौर और सांवरी रेंज के राहुल शर्मा के पास मुखबिरों के जरिए एक ऐसी खबर आती है जो होश उड़ाने वाली थी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों की कीमत रखने वाले बाघ की खाल और उसके अंगों की तस्करी का एक बड़ा रैकेट सक्रिय था।
इन तीनों जांबाजों ने बिना वक्त गंवाए अपने साथियों से चर्चा की और पूर्व वन मंडल के SDO अनादि बुधौलिया के सामने पूरा खाका रख दिया। SDO से हरी झंडी मिलते ही ऑपरेशन ‘हंट द हंटर्स’ (शिकारियों का शिकार) शुरू हुआ।
योजना के मुताबिक, टीम को एक ऐसे मोहरे की जरूरत थी जो तस्करों के बीच जाकर बैठ सके। इसके लिए टीम ने अपने एक बेहद भरोसेमंद साथी अजय को चुना। अजय को इस खतरनाक खेल में ‘दलाल’ बनाकर उतारा गया। सौदा यह तय हुआ कि जो भी पैसा मिलेगा, उसमें अजय का भी हिस्सा होगा। अजय अब सीधे मौत के कुएं में उतर चुका था।
शातिर सुखदास और चार सगे रिश्तेदारों का 'सिंडिकेट'
तस्करों के नेटवर्क को भेदना आसान नहीं था। परासिया रेंज के ३ और सांवरी रेंज के ५ वनरक्षकों सहित फैज खान ने अपनी पहचान छुपाकर तस्करों के सबसे बड़े मोहरे—PWD विभाग के रिटायर्ड कर्मचारी सुखदास को अपने जाल में फंसाया। सुखदास को लगा कि उसे अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी मछली मिल गई है।
सुखदास ने वनरक्षकों की इस ‘अंडरकवर टीम’ को असली तस्करों से मिलवाया। जब तस्करों के नाम सामने आए, तो जांच अधिकारी भी हैरान रह गए। यह पूरा का पूरा एक पारिवारिक सिंडिकेट था, जो आपस में सगे रिश्तेदार थे: १. दानशा उइके (६३ वर्ष, हर्रई) २. गौतम धुर्वे (५३ वर्ष, हर्रई) ३. हरिराम इनवाती (६८ वर्ष, हर्रई) ४. सुखदास उइके (४४ वर्ष, पटनिया हर्रई)
सारी डीलिंग का जिम्मा इसी सुखदास के कंधों पर था।
जब चार बार फेल हुई मीटिंग… और काम आया ५-५ लाख का ‘मास्टरस्ट्रोक’
वनरक्षकों की टीम ने खुद को बहुत बड़ा खरीदार दिखाया। मुख्य खरीदार के रूप में परासिया के शेख सलमान का नाम आगे किया गया। बाघ की खाल और अंगों का सौदा २० लाख रुपये में पक्का हुआ, लेकिन शर्त यह थी कि माल पूरी तरह असली होना चाहिए।
तस्कर बेहद शातिर और शक्की मिजाज के थे। वे लगातार लोकेशन बदल रहे थे ताकि किसी जाल से बच सकें:
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पहली मीटिंग: हर्रई कोतवाली के पास (तस्करों ने माहौल भांपा)
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दूसरी मीटिंग: परासिया के शिवपुरी में (सस्पेंस बढ़ता गया)
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तीसरी मीटिंग: उमरिया इसरा (तस्करों को शक हुआ)
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चौथी मीटिंग: उमरानाला (यहाँ बात बनते-बनते बिगड़ गई)
चार मीटिंग्स फेल होने के बाद वनरक्षकों का सब्र का बांध टूट रहा था और खतरा बढ़ रहा था। तब टीम ने एक खतरनाक ‘माइंड गेम’ खेला। उन्होंने तस्करों के दो सदस्यों—दानसा और हरिराम को अकेले में बुलाकर बड़ा लालच दिया:
“अगर तुम लोग आज के आज सौदा करवा देते हो, तो इस २० लाख के अलावा तुम दोनों को ५-५ लाख रुपये अलग से कमीशन देंगे। हमारी पार्टी बाहर की है, अगर आज रात सौदा नहीं हुआ तो वो चली जाएगी और डील हमेशा के लिए कैंसिल!”
यह मास्टरस्ट्रोक काम कर गया। लालच में आकर तस्करों ने घुटने टेक दिए। रात के सन्नाटे में डिलीवरी की जगह तय हुई—हर्रई के पास स्थित “आयुष्मान ढाबा”।
नकली नोटों की गड्डियां और आयुष्मान ढाबे का वो ‘कयामत का सन्नाटा’
अब वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी—दिखाने के लिए ३० लाख रुपये कहाँ से लाएं? आनन-फानन में टीम ने अपने ही एक साथी के पिता (जो आबकारी विभाग में थे) से ३ लाख रुपये और अन्य जगहों से ५ लाख रुपये का जुगाड़ किया। बाकी बचे २२ लाख रुपयों के लिए नकली चूरन वाले बच्चों के नोटों की गड्डियां बनाई गईं। ऊपर-नीचे असली नोट और बीच में चूरन के नोट! अगर तस्करों ने गड्डियां बीच से देख ली होतीं, तो वनरक्षकों की जान जाना तय था।
रात के घने अंधेरे में चारों तस्कर और वन विभाग का अंडरकवर साथी अजय ‘आयुष्मान ढाबे’ पहुंचे। हवा में भारी तनाव था। कुछ ही देर बाद, ५ जांबाज वनरक्षक आम ग्राहकों की तरह ढाबे पर दाखिल हुए। उन्होंने बेहद सामान्य दिखने का नाटक करते हुए खाने-पीने का ऑर्डर दिया।
उनकी नजरें चारों तरफ घूम रही थीं—बैकअप टीम कहाँ है? तस्करों के पास कोई हथियार तो नहीं? माहौल पूरी तरह अनुकूल होते ही, जैसे ही नोटों का बैग खुला… वनरक्षकों ने बिजली की फुर्ती से तस्करों पर धावा बोल दिया! तस्करों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। ठीक उसी वक्त, पर्दे के पीछे से बैकअप दे रहे SDO अनादि बुधौलिया और सांवरी रेंजर कीर्तिबाला गुप्ता अपनी गाड़ियों के साथ वहां आ धमके। ऑपरेशन सफल हो चुका था!
करेली के घने जंगलों का वो खौफनाक सच
तस्कर तो पकड़े गए, लेकिन असली सबूत जुटाना अभी बाकी था। टीम इन तस्करों को रात के उसी अंधेरे में नरसिंहपुर के करेली के उन घने और डरावने जंगलों में ले गई, जहां सूरज की किरणें भी रास्ता भूल जाती हैं। तस्करों की निशानदेही पर जो मंजर सामने आया, उसने सबके रोंगटे खड़े कर दिए।
वहां से बाघ का मांस और अन्य जैविक अंग बरामद हुए। बाद में फोरेंसिक जांच में पुष्टि हुई कि यह अंग उसी बाघ के थे, जिसका शिकार महज १५ से २० दिन पहले किया गया था।
जब्ती सूची: जो देखकर वन्यजीव प्रेमियों की रूह कांप जाए
जब वन विभाग ने इन तस्करों के ठिकानों और कब्जे से जब्ती की, तो देश के सबसे खूंखार वन्यजीव तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ। इनके पास से बरामद हुआ:
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🐅 बाघ की पूरी खाल, पैर और खोपड़ी , मूछ के बाल
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🦚 राष्ट्रीय पक्षी मोर के १३ नग पैर
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🐍 जहरीले कोबरा सांप का सिर
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🦔 दो दर्जन से अधिक(२९) सेई के कांटे , कछुए की खाल २ नग
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🐆 तेंदुए की खोपड़ी और एक पुराना बाघ का नाखून
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🦦 आधा दर्जन से अधिक(७) पैंगोलिन के स्केल्स (शल्क)
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🐗 जंगली सूअर के दांत और सांभर के सींग
जांबाज सलामत, शिकारी सलाखों के पीछे
अपनी जान हथेली पर रखकर, बिना किसी आधुनिक हथियार के, सिर्फ दिमाग और हौसले के दम पर इन जांबाज वनरक्षकों ने इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया। आज वो चारों तस्कर जेल की सलाखों के पीछे अपने गुनाहों की सजा काट रहे हैं। खोजी पत्रकारिता के इस सफर में यह घटना इस बात का गवाह है कि जब रक्षक अपनी वर्दी का फर्ज निभाने पर आ जाएं, तो अपराधियों का पाताल से भी बच निकलना नामुमकिन है।
सलाम है वन विभाग के इन जांबाजों को जिसमे : सौरभ चौहान,रविन्द्र सोनी,शैलेन्द्र वाड़ीवार,अनूप कंसाना,लिंकन सिंह राठोर,फैज खान ,पंकज सोनी,धनकुमार,अरबिन्द,पियूष,विवेक,ओमचंद,योगेश,उमंग,मनोज मस्त्कार,राहुल शर्मा,फैज खान, स्नेहा,सविता व अन्य और उनके अधिकारियों को !