ऑपरेशन ‘अंडरकवर’ : बाघ नरसिंहपुर में मारा, छिंदवाड़ा में 5 पकड़े गए

ऑपरेशन ‘अंडरकवर’: जब वन रक्षकों ने बिछाया मौत के सौदागरों के लिए खुफिया जाल

नरसिंहपुर में जंगल के राजा का कत्ल, छिंदवाड़ा के हर्रई में स्टिंग ऑपरेशन… और बाघ के 5 कातिल गिरफ्तार !

जंगल की खामोशी में एक खौफनाक साजिश रची जा रही थी। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर के घने जंगलों से शुरू हुआ मौत का यह खेल छिंदवाड़ा के हर्रई तक पहुंच चुका था। लेकिन इन ‘मौत के सौदागरों’ को भनक तक नहीं थी कि उनके हर कदम का पीछा वन विभाग के जांबाज कर रहे हैं। १५ दिनों की रोंगटे खड़े कर देने वाली रेकी, बिचौलिया बनने का भारी जोखिम और एक दुस्साहसिक स्टिंग ऑपरेशन… अंततः ७ जून को बाघ के पांच खूंखार शिकारी सलाखों के पीछे थे।

✍️ राकेश प्रजापति 

कत्ल की वो खौफनाक रात

करीब एक महीने पहले नरसिंहपुर जिले के करेली रेंज (हिनोतिया) का जंगल एक खामोश चीख का गवाह बना। शिकारियों ने फंदे का ऐसा जानलेवा और अचूक जाल बिछाया था कि जंगल का महाबली बाघ उसमें उलझ कर अपनी जान गंवा बैठा। इस निर्मम हत्या के बाद शुरू हुआ बाघ के अंगों की तस्करी और काले जादू (झाड़-फूंक) का वीभत्स खेल।

शिकारी खुद बने शिकार: ‘ऑपरेशन जामुनिया’

जब पूर्व वनमंडल की टीम को इस खौफनाक तस्करी की भनक लगी, तो एक ऐसा खुफिया तंत्र बिछाया गया जो किसी सस्पेंस थ्रिलर से कम नहीं था। वर्दी उतारकर वन विभाग के जांबाज कर्मचारी खुद तस्करों की महफिल में ‘खरीददार’ बनकर उतरे। एक छोटी सी चूक और जान जा सकती थी!

सौदा तय हुआ, बाघ के अवशेषों की पुष्टि हुई और फिर… शिकारियों के गढ़ में अचानक धावा बोल दिया गया। घेराबंदी इतनी अचूक थी कि पूर्व हर्रई स्थित जामुनिया गांव में मौजूद इन पांचों तस्करों को भागने का एक पल भी नहीं मिला।

मौत के खजाने की बरामदगी

छापामार कार्रवाई में तस्करों के पास से जो मिला, वह रूह कंपा देने वाला था। वन अमले ने सघन तलाशी के दौरान काले बाजार में बेशकीमती माने जाने वाले अंग बरामद किए:

  • बाघ की खाल: 01 नग

  • बाघ की खोपड़ी: 01 नग

  • बाघ के पंजे (नाखून सहित): 04 नग

  • अन्य अवशेष: मोर के पंजे, सांभर के सींग सहित अन्य वन्यप्राणियों के अंग।

वो जांबाज, जिन्होंने मौत के मुंह में घुसकर दिया अंजाम

इस पूरे खुफिया ऑपरेशन की बिसात सीएफ कमल अरोरा के निर्देशन में बिछाई गई थी। लेकिन असली रणभूमि में मोर्चा संभाला एसडीओ अनादि बुधौलिया और सांवरी परिक्षेत्र अधिकारी सुश्री कीर्ति बाला गुप्ता की संयुक्त टीम ने। यह कोई आम छापामारी नहीं थी; इस अभियान को अंजाम तक पहुंचाने के लिए टीम ने दो बार नरसिंहपुर के जंगली इलाकों में खुफिया घुसपैठ की और जान जोखिम में डालकर इस नेटवर्क को नेस्तनाबूद किया।

“असली सरगना अभी बाकी हैं…”

पूर्व वनमंडल के डीएफओ स्वरुप दीक्षित ने इस साहसिक कामयाबी पर मुहर लगाते हुए बताया:

“मुखबिर की सटीक सूचना पर हमारी टीम ने जांच शुरू की और हर्रई के जामुनिया के पास से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में एसडीओ बुधोलिया के साथ सांवरी परिक्षेत्र टीम की भूमिका बेहद सराहनीय रही है।”

अब इन कातिलों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की गंभीर और गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। वन विभाग का खुफिया रडार अब उन मुख्य ‘सफेदपोश’ सरगनाओं को तलाश रहा है, जो इस अवैध शिकार और तस्करी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की असली जड़ हो सकते हैं। जंगल के राजा के कातिलों का यह सिर्फ एक मोहरा है, इस सिंडिकेट के खात्मे की असली जंग अभी शुरू हुई है!