पूर्व छिन्दवाड़ा वनमण्डल: बाघ के शिकार का पुराना सनसनीखेज राजफाश; आरोपी के घर से वन्यप्राणी के अंग जब्त
छिन्दी/छिन्दवाड़ा: प्रकृति के सबसे शानदार और संरक्षित जीवों में शुमार बाघ के शिकार से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला सामने आया है। पूर्व छिन्दवाड़ा वनमण्डल के अंतर्गत आने वाले परिक्षेत्र छिन्दी में वन विभाग की टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए वन्यप्राणी के अंगों की तस्करी और उन्हें अवैध रूप से छिपाकर रखने के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।
गुप्त सूचना पर त्वरित एक्शन: घर में दी दबिश
वन विभाग को मुखबिर से पुख्ता सूचना मिली थी कि क्षेत्र में एक वन्यप्राणी (बाघ) का शिकार कर उसके बेशकीमती और प्रतिबंधित अंगों को अवैध रूप से छिपाकर रखा गया है। पर्यावरण और वन्यजीव सुरक्षा के लिहाज से इस बेहद संवेदनशील इनपुट को गंभीरता से लेते हुए वनमण्डल के उच्चाधिकारियों के निर्देश पर तत्काल कानूनी प्रक्रिया के तहत ‘सर्च वारंट’ जारी किया गया।
वारंट हाथ में आते ही वन अमले की एक विशेष टीम ने पूरी सतर्कता के साथ संदेही आरोपी दिनेश कुमार नेमा के आवास पर घेराबंदी कर अचानक तलाशी शुरू कर दी।
जब्ती: घर के भीतर दफन थे वन्यजीव के अवशेष
वन अमले द्वारा बारीकी से ली गई तलाशी के दौरान आरोपी के घर से वन्यप्राणि के जो अंग बरामद हुए, उसने अधिकारियों के होश उड़ा दिए। मौके से निम्नलिखित प्रतिबंधित सामग्रियां जब्त की गईं:
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1 नग वन्यप्राणी (बाघ) का नाखून
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2 नग दांत
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वन्यप्राणि की हड्डियों के टुकड़े
इन अंगों की बरामदगी इस बात का पुख्ता प्रमाण थी कि देश के सबसे शीर्ष शिकारी को मौत के घाट उतारकर उसके अंगों को क्रूरतापूर्वक बाजार में खपाने या किसी अंधविश्वास/अवैध शौक के चलते सहेजकर रखा गया था।
2019 के शिकार कांड से जुड़े तार: बयानों में चौंकाने वाला खुलासा
जब्ती के बाद जब वन विभाग की टीम ने आरोपी दिनेश कुमार नेमा को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने एक पुराने और बड़े आपराधिक गठजोड़ का राज उगल दिया। आरोपी के बयानों से जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं:
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पुरानी क्रूरता का इतिहास: आरोपी ने स्वीकार किया कि ये अंग वर्ष 2019 में किए गए एक बाघ के शिकार से संबंधित हैं। यानी पिछले करीब 7 वर्षों से प्रकृति के इस अनमोल हिस्से को कानून की नजरों से छिपाकर घर में डंप किया गया था।
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पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज है मामला: पूछताछ में पता चला कि वर्ष 2019 में पुलिस विभाग द्वारा इस वन्यप्राणी (बाघ) के शिकार का एक बड़ा प्रकरण पहले ही दर्ज किया जा चुका था।
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10 अन्य आरोपियों का सिंडिकेट: उक्त पुराने मामले में मुख्य आरोपी दिनेश कुमार नेमा के साथ कुल 11 लोग (अन्य 10 आरोपी) शामिल थे, जिन्होंने मिलकर इस जघन्य पर्यावरणीय अपराध को अंजाम दिया था।
वैज्ञानिक जांच के लिए पेंच टाइगर रिजर्व से संपर्क
जब्त किए गए अंगों (नाखून, दांत और हड्डियां) की शत-प्रतिशत वैज्ञानिक पुष्टि और डीएनए प्रोफाइलिंग के लिए वन विभाग बेहद गंभीर है। इस हेतु पेंच टाईगर रिजर्व (सिवनी) के विशेषज्ञ अधिकारियों और फॉरेंसिक टीम से तुरंत संपर्क साधा गया है, ताकि इन अवयवों की सटीक जांच कराकर अदालत में मजबूत साक्ष्य पेश किए जा सकें।
सख्त धाराओं में मामला दर्ज, बड़े खुलासे की उम्मीद
वन विभाग ने आरोपी के खिलाफ वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम की विभिन्न संगीन और गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
उप वनसंरक्षक अनादि बुधौलिया ने बताया कि “मामले में गहन जांच और कड़ाई से पूछताछ का सिलसिला लगातार जारी है। आरोपी से मिल रहे सुरागों के आधार पर वन्यप्राणियों के शिकार और अंगों की तस्करी से जुड़े कुछ अन्य बड़े और अंतर्राज्यीय मामलों के उजागर होने की पूर्ण संभावना है। इस नेटवर्क में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”
वन विभाग की इस त्वरित और सटीक कार्रवाई से क्षेत्र के शिकारियों और वन्यजीव के दुश्मनों में हड़कंप मच गया है। आगामी वैधानिक कार्यवाही और तफ्तीश तेजी से प्रगति पर है।