पातालकोट नेशनल ट्रेकिंग 2026, ‘पाताल’ से ‘प्रकृति’ तक का सफर

पातालकोट की रहस्यमयी वादियों में गूँजी रोमांच की पदचाप: प्रकृति के आलिंगन में 15 यायावरों का अविस्मरणीय सफर

✍️  राकेश प्रजापति , छिंदवाड़ा

जहाँ सूर्य की किरणें भी धरती को छूने से पहले बादलों से इजाज़त मांगती हैं, जहाँ हवाएँ आदिम युग की कहानियां सुनाती हैं और जहाँ नीरवता में भी एक दिव्य संगीत गूँजता है- वह है ‘पातालकोट’

मध्य प्रदेश के इस भू-भाग में, जहाँ प्रकृति ने अपने हाथों से सौंदर्य की अदभुत रचना की है, हाल ही में 24 से 27 जनवरी तक एक ऐतिहासिक साहसिक यात्रा (ट्रेकिंग) का साक्षी बना। मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड, जिला प्रशासन और ‘इंडिया हाइक्स’ के साझा प्रयासों से आयोजित इस राष्ट्रीय ट्रेकिंग कार्यक्रम ने पातालकोट की अतुलनीय सुंदरता को एक नया आयाम दिया।

दूधी नदी के किनारे: आत्मा और प्रकृति का साक्षात्कार

देश के महानगरों—बेंगलुरु की भागदौड़, मुंबई के शोर और हैदराबाद की व्यस्तता को पीछे छोड़, 15 साहसी ट्रेकर्स जब पातालकोट की अतल गहराइयों में उतरे, तो उन्हें समय के ठहर जाने का आभास हुआ। लगभग 25 किलोमीटर की इस दुर्गम किंतु रमणीय यात्रा में, दूधी नदी की कलकल करती धारा ने उनका स्वागत किया। पथरीले रास्तों, सुनहरी रेत और घने अरण्य के बीच, इन यायावरों ने केवल जंगल को नहीं नापा, बल्कि जीवन के एक नए दर्शन को अनुभव किया।

माटी की गंध और संस्कृति का स्पंदन : यह यात्रा केवल पहाड़ों को लांघने की नहीं थी, बल्कि एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीने की थी। चिमटीपुर के होमस्टे में ‘परार्थ समिति’ द्वारा किए गए आत्मीय स्वागत ने अतिथियों का मन मोह लिया। जब स्थानीय कलाकारों ने गेड़ी और सताम नृत्य की थाप छेड़ी, तो ट्रेकर्स भी उस आदिम उल्लास में झूम उठे। होमस्टे की व्यवस्था ने न केवल स्थानीय जनजातीय युवाओं को रोजगार का संबल दिया, बल्कि शहरी मेहमानों को वनवासियों की निश्छल जीवनशैली और परंपराओं से रूबरू कराया।

पर्यटन और स्वावलंबन का संगम : इस साहसिक महाकुंभ में उत्साह भरने के लिए जिला कलेक्टर श्री हरेंद्र नारायन, जिला पंचायत सीईओ श्री अग्रिम कुमार और एसडीएम श्री शुभम यादव स्वयं चिमटीपुर के बेस कैंप पहुँचे। उन्होंने ट्रेकर्स के अनुभवों को साझा किया और पातालकोट को विश्व स्तरीय ईको-टूरिज्म हब बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह प्रशासन की दूरदर्शी सोच ही है कि पातालकोट का सौंदर्य अब स्थानीय निवासियों के लिए ‘अर्थ और रोजगार’ का द्वार खोल रहा है।

‘अनंत हरियाली’: एक पवित्र संकल्प : इस यात्रा की सबसे पावन बात थी इसका ‘प्रकृति संरक्षण’ के प्रति समर्पण। “जंगल से हम केवल यादें लेकर जाएं और पीछे केवल अपने पदचिह्न छोड़ें”—इस ध्येय वाक्य के साथ यह पूरा आयोजन ‘प्लास्टिक मुक्त’ रहा। ट्रेकर्स ने कोहरे में लिपटी चोटियों और जैव-विविधता को संरक्षित करने का जो संकल्प लिया, वह अनुकरणीय है।

एक जादुई सम्मोहन ट्रेकर्स के लिए यह चार दिन किसी स्वप्न से कम नहीं थे। उनका कहना है कि पातालकोट की शांत वादियाँ अंतरात्मा को सुकून देती हैं और यहाँ का कण-कण एक बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है। वास्तव में, पातालकोट ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि वह केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि एक जीवंत कविता है जिसे केवल महसूस किया जा सकता है।