तीन मौतों के साये में जश्न : जुन्नारदेव विधायक की संवेदनहीनता पर सवाल

जुन्नारदेव में मानवता की मौत: जहरीली मिठाई से उजड़ गया ‘कथुरिया परिवार’, और मातम के बीच डीजे बजाकर जन्मदिन मनाते रहे विधायक सुनील उइके

✍️ टिप्पणी : राकेश प्रजापति 

जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा// जुन्नारदेव की फिजाओं में आज एक ही सवाल है—क्या सत्ता का नशा इंसान को इतना अंधा कर देता है कि उसे पड़ोस में पड़ी लाशें दिखाई नहीं देतीं ? घटना दिल दहला देने वाली है। जुन्नारदेव में जहरीली मिठाई खाने से कथुरिया परिवार के तीन सदस्यों की दर्दनाक मौत हो गई और दो लोग अभी भी जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। पूरा शहर गमगीन था, लेकिन जुन्नारदेव के विधायक सुनील उइके के कानों तक पीड़ित परिवार की चीखें नहीं पहुंचीं।

चाय का ठेला लगाने वाले मुकेश कथुरिया के आंसू और विधायक का जश्न पीड़ित मुकेश कथुरिया (45), जो चाय का ठेला लगाकर बमुश्किल अपना घर चलाते हैं, उनकी आंखों के आंसू सूख चुके हैं। जानकारों के मुताबिक मुकेश के पास अपनों के ‘गंगा पूजन’ तक के पैसे नहीं हैं। वे मदद की आस में दरवाजे की ओर देखते रहे, लेकिन मदद तो दूर, उनके घर के सामने से विधायक जी के जन्मदिन का जुलूस गुजरा। ढोल-नगाड़े बजे, आतिशबाजी हुई और शक्ति प्रदर्शन किया गया। जिस गली में मातम पसरा था, वहां जश्न मनाकर विधायक ने साबित कर दिया कि एक ‘जनप्रतिनिधि’ के तौर पर वे अपनी नैतिक जिम्मेदारी भूल चुके हैं।

कंडक्टरी के दिन भूले, अब सिर्फ सत्ता का नशा : यह वही सुनील उइके हैं, जो कभी निजी बसों में कंडक्टरी किया करते थे। एक-एक पैसे की अहमियत और गरीबी का दर्द इनसे बेहतर कौन जान सकता था ? जनता ने उन्हें फर्श से अर्श पर इसी उम्मीद में बिठाया था कि वे उनका दर्द समझेंगे। लेकिन देखते ही देखते अकूत संपत्ति के मालिक बने विधायक जी आज अपने पुराने दिन भूल गए हैं। तीन मौतों के बाद भी उनका दिल नहीं पसीजा। यह व्यवहार बताता है कि अब उनके लिए ‘सेवा’ नहीं, बल्कि ‘स्वयं का सुख’ सर्वोपरि है। क्षेत्रवासीयों का कहना है कि   इनका कद तो उसी दिन छोटा हो गया, जिस दिन इन्होंने जनसेवा को ‘मेवा’ खाने का जरिया बना लिया।

 राहुल गांधी की ‘मोहब्बत’ और कमलनाथ की ‘साख’ को बट्टा लगा रहे जुन्नारदेव विधायक, भाजपा को खुद थाली में परोस रहे मुद्दे

एक तरफ कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी हैं, जो देश भर में गरीबों, ड्राइवरों और मजदूरों के आंसू पोंछने उनके बीच पहुंच जाते हैं। दूसरी तरफ छिंदवाड़ा के कद्दावर नेता कमलनाथ हैं, जिन्होंने जनसेवा को धर्म माना है। और तीसरी तरफ जुन्नारदेव के विधायक सुनील उइके हैं, जो अपनी ‘बेजा हरकतों’ से पूरी पार्टी को शर्मसार कर रहे हैं।

कमलनाथ के गढ़ में कांग्रेस की लुटिया डुबोने की तैयारी ? जुन्नारदेव की इस घटना ने कांग्रेस के ‘आदिवासी हितैषी’ चेहरे पर कालिख पोत दी है। विधायक उइके खुद आदिवासी समाज से आते हैं, लेकिन जहरीली मिठाई कांड में उनकी निष्क्रियता और बेशर्म जश्न ने समाज को हिला कर रख दिया है। जब घर के सामने से अर्थियां उठने की नौबत हो और विधायक जश्न मनाएं, तो विपक्ष को बोलने का मौका अपने आप मिल जाता है। विधायक की इन हरकतों से भाजपा को बैठे-बिठाए कांग्रेस और कमलनाथ पर प्रहार करने का हथियार मिल गया है।

निकम्मेपन की हद: न प्रशासन जागा, न विधायक मुकेश कथुरिया का परिवार चीख-चीख कर कह रहा है कि न प्रशासन ने सुध ली, न नेताजी ने। विधायक जी, क्या आपकी संपत्ति और रसूख इतना भी काम नहीं आ सकता था कि उस गरीब परिवार को आर्थिक मदद कर सकें ? गैर-कानूनी कामों और दिखावे में मशगूल रहने वाले विधायक यह भूल रहे हैं कि पब्लिक सब जानती है। यह वही जनता है जिसने आपको ‘कंडक्टर’ से ‘विधायक’ बनाया है, और यदि यही अहंकार रहा, तो वह आपको वापस उसी जगह भेजने में देर नहीं लगाएगी।

राहुल गाँधी के सामने चेहरा और राजनीति चमकने के लिए इंदौर पहुंचे विधायक सुनील उइके को कमलनाथ और राहुल गांधी से परोपकार की भावना सीखनी चाहिए। यदि समय रहते उन्होंने अपनी कार्यशैली और यह ‘संवेदनहीन रवैया’ नहीं बदला, तो आने वाले समय में कांग्रेस को इस क्षेत्र में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।