सावरवानी : जहाँ मिट्टी की खुशबू ने जीता 12 देशों के पर्यटकों का दिल

प्रकृति के आँचल में बसा ‘सावरवानी’: छिंदवाड़ा का वो जन्नत जहाँ मिट्टी की खुशबू और हरियाली देती है जीवन का असली सुकून

  • बेमिसाल तीन साल: कंक्रीट के जंगलों से दूर, सावरवानी बना इको-टूरिज्म का नया अध्याय

  • कुदरत का करिश्मा: 12 देशों और 15 राज्यों के 10 हजार से अधिक सैलानियों ने निहारा ग्रामीण भारत का नैसर्गिक सौंदर्य

  • फाइव ग्रीन लीफ रेटिंग: पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबल टूरिज्म का अनुपम उदाहरण बना यह मॉडल गांव

✍️   राकेश प्रजापति 

कल्पना करें एक ऐसी सुबह की, जहाँ नींद अलार्म घड़ी के शोर से नहीं, बल्कि मुर्गों की बांग और पक्षियों की चहचहाहट से खुले। जहाँ हवा में वाहनों का धुआँ नहीं, बल्कि गीली मिट्टी की सौंधी खुशबू घुली हो। यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि छिंदवाड़ा जिले के तामिया विकासखंड की सुरम्य वादियों में बसे ‘पर्यटन ग्राम सावरवानी’ की हकीकत है।

बीते तीन सालों में, सावरवानी ने खुद को केवल एक गंतव्य के रूप में नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीने की एक शानदार कला के रूप में परिभाषित किया है। यह गाँव आज शहरी आपाधापी से दूर, शांति और पर्यावरणीय सौंदर्य चाहने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए एक आदर्श ‘इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन’ बन चुका है।

प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत संगम

14 जनवरी 2023 को अपनी यात्रा शुरू करने वाला सावरवानी आज ग्रामीण पर्यटन का एक सुनहरा अध्याय लिख रहा है। यहाँ आने वाले पर्यटक कंक्रीट की दुनिया छोड़कर, मिट्टी से बने पारंपरिक घरों में सुकून तलाशते हैं। हरे-भरे लहराते खेत, कच्चे रास्ते, गलियों में खेलते बछड़े, और बकरियों की मिमियाहट—यह सब मिलकर एक ऐसा प्राकृतिक संगीत रचते हैं, जो मन को गहरा विश्राम देता है।

12 देशों और भारत के 15 प्रदेशों से आए 10 हजार से अधिक पर्यटकों ने यहाँ आकर महसूस किया है कि असली ‘हेल्दी एंड हैप्पी लाइफ’ प्रकृति के सानिध्य में ही है। यहाँ का देसी स्वाद, लोक-संस्कृति की जीवंतता और सादगी भरा जीवन पर्यटकों को बार-बार यहाँ खींच लाता है।

पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास का मॉडल सावरवानी यह साबित करता है कि पर्यटन का विकास पर्यावरण की कीमत पर नहीं, बल्कि उसके संरक्षण के साथ हो सकता है। छिंदवाड़ा कलेक्टर श्री हरेंद्र नारायन और जिला पंचायत सीईओ श्री अग्रिम कुमार के कुशल मार्गदर्शन में, मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के सहयोग से यह गाँव एक ‘मॉडल विलेज’ के रूप में उभरा है।

वर्तमान में यहाँ संचालित 09 होम स्टे और निर्माणाधीन दो नए होम स्टे, पर्यटकों को प्रकृति के बीच रहने का सुरक्षित और आरामदायक अनुभव प्रदान करते हैं। यही कारण है कि मध्यप्रदेश में सर्वाधिक होम स्टे बुकिंग का रिकॉर्ड इस छोटे से, मगर बेहद खूबसूरत गाँव के नाम है। यहाँ का हर पल पर्यटकों को प्रकृति के करीब ले जाता है।

हरियाली से आई खुशहाली: सतत रोजगार का सृजन सावरवानी ने दिखाया है कि जब हम अपनी प्राकृतिक विरासत को संजोते हैं, तो वह हमें आर्थिक रूप से भी समृद्ध करती है। यहाँ की आबोहवा और उपजाऊ मिट्टी ही यहाँ की ताकत है। स्थानीय महिलाओं ने अपने खेतों और बगीचों में उगाई गई शुद्ध दालें, सब्जियां और ज्वार-मक्के का आटा बेचकर, तथा अपने हाथों से बना शुद्ध देसी घी पर्यटकों को परोसकर 11 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित की है।

होम स्टे योजना ने गाँव की तस्वीर बदल दी है। बैलगाड़ी चालक, गाइड, और लोकनृत्य कलाकार के रूप में 100 से अधिक ग्रामीण प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपनी संस्कृति और प्रकृति को प्रदर्शित कर रोजगार पा रहे हैं। यह आत्मनिर्भरता की एक शानदार मिसाल है।

ग्रीन टूरिज्म का सिरमौर: अवार्ड्स और पहचान सावरवानी की सफलता की गूंज अब दूर-दूर तक है। पर्यावरणीय मानकों का पालन करने और शानदार आतिथ्य के लिए इसे देश के पहले ‘फाइव ग्रीन लीफ रेटिंग होम स्टे’ का खिताब मिला है। पर्यटन के क्षेत्र में दो बार ‘गोल्डन कैटेगरी’ के सर्वश्रेष्ठ अवार्ड और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा सम्मान, इसकी उत्कृष्टता का प्रमाण है।

आज सावरवानी देश भर के गांवों के लिए ‘एक्सपोजर विजिट’ का एक मॉडल बन चुका है, जो सिखाता है कि कैसे प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान करते हुए एक विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल विकसित किया जा सकता है। सावरवानी सिर्फ एक गाँव नहीं, बल्कि प्रकृति प्रेमियों के लिए एक तीर्थ स्थल बन गया है।