छिंदवाड़ा भाजपा में ‘गृहयुद्ध’, सत्ता-संगठन की जंग में पिस रहा कार्यकर्ता ..

‘भैया में भैया’ के शोर में गुम हुआ अनुशासन, गुटबाजी की भेंट चढ़ रहा छिंदवाड़ा भाजपा का ‘कैडर’

भोपाल में ‘क्लास’, छिंदवाड़ा में ‘कलह’: सांसद और जिलाध्यक्ष की नूराकुश्ती से कार्यकर्ता पस्त, जनता त्रस्त ● आलाकमान की फटकार: बंद कमरे में सुलझाएं झगड़े, वरना जनता सिखा देगी सबक

संपादक : राकेश प्रजापति

छिंदवाड़ा/भोपाल // ‘पार्टी विद द डिफरेंस’ का दम भरने वाली भारतीय जनता पार्टी के छिंदवाड़ा किले में इन दिनों अनुशासन तार-तार हो रहा है। वजह कोई बाहरी दुश्मन नहीं, बल्कि घर के ही दो मजबूत स्तंभों सांसद विवेक बंटी साहू (सत्ता) और भाजपा जिलाध्यक्ष शेषराव यादव (संगठन) के बीच छिड़ी वर्चस्व की जंग है। हालात यह हैं कि ‘भैया में भैया…’ के नारे ने भोपाल तक भूचाल ला दिया है। इस नूराकुश्ती में सबसे बुरा हाल उस जमीनी कार्यकर्ता का है, जो असमंजस में है कि वह ‘सांसद की जय’ बोले या ‘जिलाध्यक्ष की जी-हुजूरी’ करे।

कार्यकर्ता बेहाल: इधर कुआं, उधर खाई छिंदवाड़ा भाजपा में गुटबाजी का जहर इस कदर घुल चुका है कि कार्यकर्ता “दो पाटों के बीच पिस रहा है”। स्थिति यह हो गई है कि यदि कोई कार्यकर्ता सांसद विवेक बंटी साहू के साथ दिखता है, तो जिलाध्यक्ष की भौहें तन जाती हैं। और यदि वह जिलाध्यक्ष के करीब जाने की कोशिश करता है, तो उसे सांसद खेमे के कोप का शिकार होना पड़ता है। यह असमंजस न केवल कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ रहा है, बल्कि पार्टी की जड़ों में मठा डालने का काम कर रहा है।

भोपाल तलब: ‘मुर्दे को कंधा देने’ वाले बयान पर आलाकमान खफा विवाद की चिंगारी तब भड़की जब एक कार्यक्रम में ‘भैया में भैया…’ नारे पर जिलाध्यक्ष शेषराव यादव ने मंच से ही आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। उन्होंने कह दिया कि “आदमी इतना चढ़ जाता है कि अंतिम समय में चार कांधे भी नहीं मिलते।” अपनों पर ही ऐसा प्रहार ? मामला जब भोपाल पहुंचा, तो प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा ने दोनों नेताओं को तलब किया। बंद कमरे में हुई ‘क्लास’ में जिलाध्यक्ष को सार्वजनिक बयानबाजी के लिए जमकर फटकार लगाई गई। आलाकमान ने स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस को बैठे-बिठाए मुद्दा देने की यह हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोनों को नसीहत दी गई कि “संगठन और सत्ता, गाड़ी के दो पहिए हैं, मिलकर चलें वरना परिणाम भुगतने होंगे।”

पोस्टर वॉर: कार्यालय में चस्पा हुआ ‘अनुशासन’ का फरमान विवाद का असर भाजपा कार्यालय की दीवारों पर भी दिख रहा है। हाल ही में भाजपा कार्यालय में नए पोस्टर चस्पा किए गए हैं, जो इशारों-इशारों में बहुत कुछ कहते हैं। पोस्टर में साफ लिखा है—“व्यक्तिगत नारे लगाना मना है,” “पैर छूना अपेक्षित नहीं है,” और “व्यक्तिगत आलोचना से बचें।” ये निर्देश बताते हैं कि गुटबाजी किस हद तक हावी हो चुकी है कि अब ‘गाइडलाइन’ लगाकर नेताओं को अनुशासन सिखाना पड़ रहा है। सांसद के कार्यालय पहुंचने पर हुई नारेबाजी और उसके बाद जिलाध्यक्ष द्वारा जारी ये निर्देश साफ बताते हैं कि रार अब भी थमी नहीं है।

जनता परेशान: विकास की जगह ‘विवाद’ पर फोकस इस पूरी सियासी नौटंकी का खामियाजा छिंदवाड़ा की जनता भुगत रही है। जब सांसद और जिलाध्यक्ष आपस में ही लड़ने में ऊर्जा खपाएंगे, तो क्षेत्र के विकास और जनसमस्याओं पर बात कौन करेगा ? सत्ता और संगठन में तालमेल न होने से कई प्रशासनिक और विकास कार्य अधर में लटके हैं। जनता ने जिसे विकास के लिए चुना, वे ‘अहंकार की लड़ाई’ लड़ रहे हैं।

आईना देखने की जरूरत छिंदवाड़ा में कांग्रेस का सूपड़ा साफ करने का दावा करने वाली भाजपा को अब आत्ममंथन की जरूरत है। यदि सांसद और जिलाध्यक्ष ने अपना ‘ईगो’ छोड़कर कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान और जनता के हितों की चिंता नहीं की, तो यह गुटबाजी आने वाले समय में पार्टी के लिए आत्मघाती साबित होगी। कार्यकर्ता ‘बंधुआ मजदूर’ नहीं है, और जनता ‘तमाशबीन’ नहीं। वक्त है कि दोनों नेता हकीकत का आईना देखें और ‘मैं’ से ऊपर उठकर ‘हम’ की राजनीति करें।