स्वच्छता का ज्ञान, गंदगी में ध्यान – छिंदवाड़ा के सरकारी दफ्तरों की पोल खोल

छिंदवाड़ा में स्वच्छता का नया मॉडल: खुद गंदगी पालो, जनता को ज्ञान बांटो ..

छिंदवाड़ा में स्वच्छता अभियान अब किताबों से निकलकर कंटेनरों में पल रहा है। वो भी सरकारी कंटेनरों में। स्वास्थ्य  विभाग की टीम को गत दिवस बड़ी सफलता मिली है। वार्ड नंबर 32 में 50 घरों में से सिर्फ 5 घरों में डेंगू के लार्वा मिले। यानी आम जनता तो सुधर रही है। लेकिन जब टीम 15 शासकीय कार्यालयों में घुसी, तो स्वच्छ भारत मिशन की असली तस्वीर सामने आ गई। यहाँ ज्ञान दिया जाता है, वहाँ लार्वा पाला जाता है।

आंकड़े देखिए और शर्म से डूब जाइए –

विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय – जो बच्चों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाने का जिम्मा रखते हैं, उनके यहाँ 8 कंटेनरों में मच्छरों का फाइव स्टार होटल चल रहा था।
एमपीईबी कार्यालय में 6 कंटेनर, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में 3 कंटेनर, सीडब्ल्यूएसएन दिव्यांग छात्रावास – जहाँ सबसे ज्यादा संवेदनशीलता होनी चाहिए – वहाँ 2 कंटेनर, सावरी रेंज और पश्चिम वनमंडल कार्यालय में 2-2 कंटेनर। जनपद शिक्षा केंद्र और बीटीआई परिसर भी इस दौड़ में पीछे नहीं।

कुल मिलाकर सरकारी दफ्तर अब दफ्तर नहीं, एडीज मच्छर के लिए सरकारी आवास योजना बन चुके हैं।

सवाल तो बनता है साहब ?

जिन विभागों में रोज सैकड़ों आम लोग अपने काम के लिए आते हैं, जहाँ हजारों कर्मचारी-अधिकारी 8 घंटे सांस लेते हैं, वहाँ उनके स्वास्थ्य का जिम्मेदार कौन है ?

क्या BEO साहब, DEO साहब, MPEB के इंजीनियर साहब ने कभी अपने कार्यालय के पीछे पड़े कूलर, टायर, गमले और डिब्बों में झाँका है ? या स्वच्छता सिर्फ दीवारों पर लिखे नारों और फाइलों में होने वाले ‘स्वच्छता पखवाड़ा’ तक ही सीमित है ?

दिव्यांग छात्रावास में लार्वा मिलना तो संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। जिन बच्चों को सबसे ज्यादा सुरक्षा चाहिए, उनके ही हॉस्टल में आप डेंगू को पाल रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने तो अपना काम कर दिया – टेमीफॉस डालकर लार्वा नष्ट कर दिया। लेकिन असली लार्वा तो कुर्सियों पर बैठा है, जो साल भर अपने परिसर की सफाई तक सुनिश्चित नहीं कर सकता। और यही विभाग जनता को सिखाएंगे कि घर में पानी जमा न होने दें।

वाह रे सिस्टम! मच्छर भी कंफ्यूज है कि काटे तो किसे काटे – जनता को या ज्ञान देने वाले साहब को ?