छिंदवाड़ा में गजराज का 100 KM का सफर: 6 दिन बाद तामिया में दूसरा हादसा, बुजुर्ग घायल ..

6 दिन, 100 किलोमीटर का सफर और एक रहस्यमय गजराज : सिवनी से तामिया तक दहशत, कौतूहल और अब हादसा

कान्हा के जंगलों से बिछड़ा एक विशालकाय जंगली हाथी पिछले 6 दिनों से छिंदवाड़ा जिले के लिए पहेली बना हुआ है। कभी वह अदृश्य रहता है, कभी उसके पदचिन्ह मिलते हैं, तो कभी ड्रोन को भी चकमा दे देता है। और अब जब उसने तामिया के जंगलों में अपने दीदार कराए हैं, तो एक और हादसा सामने आ गया है। यह रिपोर्ट उसी रहस्यमय यात्रा की पूरी कहानी है, जो सिवनी से शुरू होकर आज तामिया के बीजाढाना तक पहुंच गई है। और अब इस यात्रा का सबसे ताजा अध्याय जुड़ा है पश्चिम वनमंडल के सांगाखेड़ा के पास ग्राम बीजाढाना से..

✍️  राकेश प्रजापति 

आज दोपहर रिमझिम बारिश और घने कोहरे के बीच 60 वर्षीय बुजुर्ग चतुर्सी पिता दसनलाल शीलू, निवासी बीजाढाना के सामने अचानक यह विशालकाय हाथी आ गया। अचानक सामने गजराज को देखकर बुजुर्ग घबरा गया और जान बचाकर भागने लगा, इसी भागदौड़ में गिरने से वह घायल हो गया। यह सीधा हमला नहीं था, बल्कि दहशत में हुआ हादसा था।

पश्चिम वनमंडल के DFO साहिल गर्ग ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि “क्षेत्र में लगातार रिमझिम बारिश और कोहरे के चलते विजिबिलिटी बेहद कम थी, अचानक सामने हाथी आ जाने से बुजुर्ग घबराकर भागा और चोटिल हो गया।”

ग्रामीणों और वन विभाग की टीम ने तत्काल घायल बुजुर्ग को तामिया के शासकीय अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार जारी है। घटना के बाद बीजाढाना, सांगाखेड़ा और बिजोरी सहित पूरे तामिया क्षेत्र में दहशत का माहौल है।

6 दिन में लगभग 100 किलोमीटर चल चुका यह हाथी अब तामिया के घने जंगलों में है, जहां भोजन-पानी प्रचुर है। वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।

यह घटना हमें एक बार फिर सिखा रही है कि यह संघर्ष नहीं, सह-अस्तित्व का समय है। हाथी अपना रास्ता नहीं भूला है, हम अपने जंगल की सीमाएं भूल रहे हैं। उसे घेरना नहीं, बल्कि सुरक्षित रूप से उसके कॉरिडोर की ओर लौटने देना ही सबसे बड़ा संरक्षण होगा।