रहस्य बनकर घूम रहा है जंगल का राजा : ड्रोन भी नहीं ढूंढ पाया गजराज को, 5 दिन से हवा में है हाथी की कहानी ….
कान्हा के जंगलों से भटका एक जंगली हाथी अब छिंदवाड़ा जिले में दहशत के साथ-साथ गहरे रहस्य का विषय बन गया है। पिछले चार दिनों से परासिया के जंगलों में भटक रहा यह हाथी रविवार को अमरवाड़ा रेंज के चिखली-चनेरी से निकलकर परासिया रेंज में दाखिल हो गया है। इस रहस्यमय हाथी की वीट और पदचिन्हों की निशान देहि के आसरे वन विभाग गजराज की तलाश में जुटी हुई है ! वन विभाग के मुताबिक ताजा लोकेशन परासिया रेंज के तिरोड़ा, जोबनाला, मथनी, पगारा और अनखावाड़ी के जंगलों में ट्रेस हो रही है। रात में मूवमेंट तेज हो सकता है, इसलिए हिरीं, सोनपुर, खिरेटी, नागरी सहित परासिया-छिंदी रेंज के सीमावर्ती गांवों में हाई अलर्ट है।
वन विभाग ने हाथी की निगरानी के लिए 3 स्पेशल ग्राउंड टीमों के साथ-साथ ड्रोन से भी सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ड्रोन कैमरे में भी गजराज कैद नहीं हुआ। न कोई तस्वीर मिली, न कोई वीडियो।
परासिया रेंजर हिमांशु विश्वकर्मा ने बताया कि मुनादी कराकर ग्रामीणों और चरवाहों को जंगल न जाने की हिदायत दी जा रही है। छिंदी रेंजर गयाप्रसाद त्रिपाठी के मुताबिक टीमें लगातार गश्त कर लोगों को जागरूक कर रही हैं।
एक दिन पहले किया था हमला
रविवार को चिखली चनेरी में हाथी ने खेत में काम कर रहे किसान सुरेश कुमरे पर हमला कर घायल कर दिया था, जिसके बाद विभाग और ज्यादा अलर्ट हो गया है।
पर सबसे बड़ा सवाल – आखिर हाथी है कहां ?
कहानी 26 अगस्त को शुरू हुई, जब सिवनी वन विभाग ने छिंदवाड़ा वनवृत्त को सूचना दी कि एक हाथी सीमा में घुसा है। प्रभारी CCF मधु वी राज ने DFO को अलर्ट किया और मुनादी करा दी गई। तब से 5 दिन बीत गए।
आश्चर्य इस बात का है कि आज के मोबाइल और ड्रोन के दौर में भी इस हाथी को किसी ने अपनी आंखों से नहीं देखा। न वन विभाग के मैदानी कर्मचारियों को दिखा, न ग्रामीणों के कैमरे में कैद हुआ और अब तो ड्रोन की नजर से भी गायब है।
अगर हाथी ने किसान पर पैर रख दिया होता तो बचना नामुमकिन था, फिर ये हमला कैसा ? क्या पगमार्कों के सहारे ही पूरी कहानी गढ़ी जा रही है ? जंगल में घूम रहा गजराज वाकई है या सिर्फ अफवाहों का हाथी है, यह सवाल अब और गहरा गया है।
डीएफओ की दो टूक अपील – ‘हीरो बनने की कोशिश न करें’
इस पूरे मामले पर पूर्व वनमंडल के डीएफओ स्वरूप दीक्षित ने कहा -“हाथी दिखाई देने पर उसके पास जाने, उसे घेरने या भगाने की कोशिश बिल्कुल न करें। हीरो बनने की कोशिश न करें। हाथी को उकसाना बेहद खतरनाक हो सकता है। खासतौर पर शराब के नशे में हाथी के पास जाना जानलेवा साबित हो सकता है।”
डीएफओ दीक्षित ने बताया कि यह हाथी कान्हा क्षेत्र में अपने झुंड से बिछड़कर यहां पहुंचा है। उसकी निगरानी के लिए तीन टीमें लगाई गई हैं और मुनादी से लोगों को सतर्क किया जा रहा है। फिलहाल हाथी जंगल क्षेत्र में ही है।
लेकिन सवाल वही है – जब ड्रोन भी नहीं देख पाया, किसी कैमरे में कैद नहीं हुआ, तो क्या सिर्फ गोबर और पैरों के निशान पर ही गजराज की कहानी चल रही है ? जंगल का यह रहस्यमय मेहमान हकीकत है या अफवाहों का हाथी, इसका खुलासा तो आने वाले दिनों में ही होगा।