पोस्टर में ‘लापता विधायक’, लेकिन जनता पूछ रही—आख़िर जवाबदेह कौन ?
राजनैतिक विश्लेषण : राकेश प्रजापति
छिंदवाड़ा की राजनीति में ‘लापता विधायक’ के पोस्टरों ने एक नया सियासी शोर खड़ा कर दिया है। ग्राम जैतपुर कला में पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधायक कमलनाथ के खिलाफ लगाए गए पोस्टरों को भाजपा जनता की आवाज बता रही है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पोस्टरबाजी से जनता की समस्याओं का समाधान हो जाएगा, या फिर यह असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की एक और राजनीतिक कवायद है ?
यदि किसी विधायक की सक्रियता पर सवाल उठाना लोकतंत्र का अधिकार है, तो सत्ता में बैठी सरकार की जवाबदेही उससे कहीं अधिक बड़ी होती है। मध्यप्रदेश में लगभग 20 वर्षों से भाजपा सत्ता में है। केंद्र में भी भाजपा की सरकार है। छिंदवाड़ा नगर निगम भी भाजपा के नियंत्रण में है। यानी भाजपा जिस “ट्रिपल इंजन सरकार” का दावा करती है, उसकी असली परीक्षा कागजों और नारों से नहीं, बल्कि जनता के जीवन से होती है।
विडंबना यह भी है कि छिंदवाड़ा शहर की जनता ने नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी को महापौर चुना था। जनता को अपेक्षा थी कि भाजपा में शामिल होने के बाद प्रदेश और केंद्र की डबल इंजन सरकार का लाभ शहर को मिलेगा। लोगों को विश्वास दिलाया गया कि सत्ता के साथ तालमेल होने से विकास कार्यों में धन की कमी नहीं आएगी और शहर की मूलभूत सुविधाएं बेहतर होंगी।
लेकिन आज साढ़े तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद जनता यह पूछने लगी है कि उस राजनीतिक निर्णय से शहर को आखिर मिला क्या ? यदि भाजपा के दावों पर विश्वास करें तो नगर निगम के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं होनी चाहिए थी। इसके बावजूद शहर की बदहाल सड़कें, पेयजल संकट, सफाई व्यवस्था की शिकायतें और नगर निगम की वित्तीय एवं प्रशासनिक अव्यवस्था लगातार मीडिया की सुर्खियां बनती रही हैं। खुद भाजपा के पार्षद नालों में उतरकर सफाई करते नजर आते है। सवाल यह है कि जब सत्ता के तीनों इंजन एक ही पटरी पर दौड़ रहे हैं, तब विकास की गाड़ी आखिर किस स्टेशन पर अटक गई ?
राजनीति का पुराना सिद्धांत है—जब उपलब्धियां कम दिखाई दें, तो बहस का विषय बदल दो। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि “लापता विधायक” पोस्टर भी उसी रणनीति का हिस्सा माने जा सकते हैं। क्योंकि यदि चर्चा पानी, सड़क, नगर निगम की कार्यप्रणाली और ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाली पर होगी तो जवाब सरकार को देना पड़ेगा। लेकिन यदि पूरा विमर्श केवल पोस्टर और आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहे, तो जनता के असली सवाल पीछे छूट जाते हैं।
कमलनाथ जनता के बीच कितने सक्रिय हैं, इसका निर्णय जनता चुनाव में करेगी। लेकिन पानी की खाली टंकियां, सूखे नल और नगर निगम की बदहाल व्यवस्था किसी पोस्टर से नहीं सुधरती। जनता को राजनीतिक नाटक नहीं, परिणाम चाहिए।
राजनीतिक विशेषकों का मानना है कि लोकतंत्र में सबसे बड़ा पोस्टर दीवार पर नहीं, जनता के मन में लगता है। चुनावी नारों से कुछ समय के लिए माहौल बनाया जा सकता है, लेकिन प्यासे गांव, परेशान शहर और अधूरे विकास कार्य अंततः सत्ता से ही जवाब मांगते हैं। इसलिए आज छिंदवाड़ा में सबसे बड़ा सवाल “लापता विधायक” नहीं, बल्कि “लापता विकास” का है।