गोदी मीडिया बनाम यूट्यूब शिक्षक: टीआरपी के भूखे पत्रकारों का असली चेहरा .. 

टीआरपी के गिद्ध और ‘दो कौड़ी’ की पत्रकारिता का नग्न नृत्य ! 

वाह रे गोदी मीडिया ! सुबह की पहली किरण से लेकर रात के अंधेरे तक नफरत का जो धंधा तुम सजाते हो, आज उसकी चमक थोड़ी फीकी क्या पड़ी, तुमने अपनी औकात का असली पैमाना ही समाज के सामने रख दिया। जो खुद झूठ के मलबे पर बैठकर ‘टीआरपी’ की मलाई चाट रहे हैं, वो आज देश के उन ईमानदार शिक्षकों को “दो कौड़ी” का बता रहे हैं, जो संसाधनों के अभाव में भी लाखों गरीब बच्चों की तकदीर और देश का भविष्य संवार रहे हैं।

हाँ, सच ही तो है! इन ईमानदार यूट्यूब शिक्षकों की औकात वाकई तुम्हारे सामने कुछ भी नहीं है। क्योंकि इनमें और तुममें जमीन-आसमान का फर्क है:

  • तुम लाशों पर टीआरपी बटोरते हो: ये शिक्षक तुम्हारी तरह ‘टीआरपी’ की भूख में किसी जिंदा इंसान को नहीं मारते। पूरा देश गवाह है कि कैसे तुम्हारी दलाल पत्रकारिता ने बॉलीवुड के दिग्गज धर्मेंद्र जी के जिंदा रहते ही उनकी मौत की झूठी खबर चला दी थी। थू है ऐसी गिद्ध पत्रकारिता पर!

  • तुम नफरत बोते हो, ये ज्ञान: तुम वातानुकूलित स्टूडियो में बैठकर चौबीस घंटे हिंदू-मुस्लिम की नफरत का जहर घोलते हो, जबकि ये शिक्षक देश के युवाओं को इस काबिल बनाते हैं कि वे रोजगार पा सकें, अपने पैरों पर खड़े हो सकें।

  • तुम फेक न्यूज की दुकान हो, ये शिक्षा के मंदिर: तुम्हारी दुकान फेक न्यूज और प्रोपेगैंडा के दम पर चलती है, जबकि इन गुरुओं का जीवन किताबों के ज्ञान और ईमानदारी के सिद्धांतों से रोशन है।

असली दर्द क्या है, जानते हैं ?

दर्द यह नहीं है कि शिक्षकों ने कुछ गलत किया। दर्द तो तुम्हारी घटती साख और खाली होते जा रहे बटुए का है! देश का युवा अब तुम्हारी स्क्रीन पर परोसी जाने वाली नफरत के कचरे को लात मारकर यूट्यूब पर इन शिक्षकों की क्लास में बैठ रहा है। जब तुम्हारा झूठ का धंधा पिटने लगा, जब तुम्हारी टीआरपी का गुब्बारा फूटने लगा, तो तुम्हें मुफ्त में शिक्षा बांटने वाले देश के गुरु “दो कौड़ी” के नजर आने लगे?

सुनो ओ बिकाऊ कलमकारों और कैमरे के दलालों ! दूसरों को कौड़ियों का बताने से पहले जरा अपने गिरेबान में झांक कर देखो। जो मीडिया एक जिंदा लीजेंड की मौत का झूठा तमाशा बनाकर बेच सकता है, उसकी खुद की साख कितने कौड़ी की बची है? जवाब है—शून्य! तुम कौड़ी के भाव भी बिकने के लायक नहीं बचे हो।

देश का युवा जाग चुका है !

नफरत के एंकरों और एजेंडा चलाने वाले आकाओं कान खोलकर सुन लो—तुम्हारे इस घटिया और आक्रामक प्रोपेगैंडा से गुरु का सम्मान कम नहीं होगा। देश का युवा अब अंधा नहीं है; वह तुम्हारी नफरत की दुकान को भी बखूबी समझता है और अपने गुरु के चरणों की धूल की कीमत भी जानता है। झूठ बेचने वाले एंकरों से लाख गुना बेहतर हैं वो शिक्षक, जो मौन रहकर राष्ट्र निर्माण कर रहे हैं।

अपनी नफरत की स्क्रिप्ट संभाल कर रखो, क्योंकि इस देश में गुरु का स्थान भगवान से ऊपर था, है और हमेशा रहेगा। तुम्हारी ‘दो कौड़ी’ की पत्रकारिता को देश का युवा इतिहास के कूड़ेदान में फेंकने के लिए तैयार बैठा है!