150 साल का इंतज़ार खत्म: कान्हा के ‘सुल्तान’ की वापसी !

150 साल का इंतज़ार खत्म: कान्हा के ‘सुल्तान’ की वापसी ! 

“इतिहास ने खुद को दोहराया है और कान्हा की सोई हुई घासभूमियां आज जाग उठी हैं! पूरे 150 साल का लंबा वनवास खत्म हुआ और मध्यप्रदेश की धरती पर एक बार फिर ‘जंगली भैंसे’ की हुंकार गूँजी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हाथों शुरू हुआ यह स्वर्णिम अध्याय न केवल इकोसिस्टम को नया जीवन देगा, बल्कि एमपी को अब ‘वाइल्ड बफैलो स्टेट’ की नई और दमदार पहचान दिलाएगा।”

✍️ शशांक माहुले

मंडला/बालाघाट // मध्यप्रदेश के जंगलों में आज सिर्फ हवाएं नहीं चल रही थीं, बल्कि गौरव का एक नया अध्याय लिखा जा रहा था। करीब डेढ़ सदी (150 साल) के लंबे अंतराल के बाद, कान्हा टाइगर रिजर्व की धरती ने अपने पुराने ‘वारिस’ के कदमों की आहट सुनी।

असम से आया ‘वन्य-दूत’, कान्हा बना नया घर

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कान्हा की सूपखार रेंज में असम के काजीरंगा से आए 4 विशेष मेहमानों (3 मादा और 1 नर जंगली भैंसा) जंगली जल भैंस (एशियाई वाइल्ड बफैलो) का स्वागत किया। यह सिर्फ जानवरों का एक राज्य से दूसरे राज्य में जाना नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश और असम के बीच दोस्ती और संरक्षण की एक नई ‘इको-पार्टनरशिप’ की शुरुआत है।

“यह सिर्फ पुनर्स्थापन नहीं, बल्कि कुदरत के बिगड़े संतुलन को फिर से साधने की कोशिश है। अब हमारा लक्ष्य मध्यप्रदेश को ‘वाइल्ड बफैलो स्टेट’ के रूप में विश्व पटल पर चमकाना है।”

— डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री

क्यों खास है यह ‘घर वापसी’? * ऐतिहासिक पल: 1870 के दशक के बाद पहली बार कान्हा की घासभूमियों में जंगली भैंसा फिर से नज़र आएगा।

प्रकृति का इंजीनियर: ये भैंसे घास के मैदानों का प्राकृतिक प्रबंधन करेंगे, जिससे जैव-विविधता और अन्य वन्यजीवों को भी लाभ मिलेगा।

पर्यटन को पंख: टाइगर, चीता, लेपर्ड और वल्चर स्टेट के बाद, अब ‘बफैलो स्टेट’ का तमगा पर्यटकों को और भी आकर्षित करेगा।

मुख्यमंत्री का ‘इनाम’ और सम्मान इस मिशन को सफल बनाने वाले जमीन के नायकों—डॉक्टरों, फील्ड स्टाफ और कान्हा की टीम—के जज्बे को सलाम करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रत्येक सदस्य को ₹10,000 की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने विशेष तौर पर असम के सीएम हेमंत बिस्वा सरमा के सहयोग का आभार भी जताया।

अब टाइगर के साथ दौड़ेगा ‘जंगलीभैंसा’

कान्हा के विस्तृत मैदान और जल स्रोत अब इन नए मेहमानों की सुरक्षा और वंश बढ़ाने के लिए तैयार हैं। वह दिन दूर नहीं जब पर्यटकों की सफारी में ‘द बिग फाइव’ की तर्ज पर जंगली भैंसा भी मुख्य आकर्षण होगा।

“डेढ़ सौ साल का सन्नाटा टूटा और कान्हा के सूपखार रेंज में जैव-विविधता का नया सवेरा हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने असम के काजीरंगा से आए जंगली भैंसों का स्वागत कर मध्यप्रदेश के वन्यजीव इतिहास में एक ऐतिहासिक पुनर्स्थापन की नींव रखी है। असम और एमपी की इस अनूठी साझेदारी ने साबित कर दिया है कि जब इरादे नेक हों, तो प्रकृति अपनी खोई हुई विरासत को फिर से गले लगाती है।”

मध्यप्रदेश: जहाँ विरासत लौटती है, और प्रकृति मुस्कुराती है।