PHE विभाग में भ्रष्टाचार का ‘दर्पण’ हुआ साफ! लोकायुक्त ने ₹14k रिश्वत लेते दबोचा ..

छिंदवाड़ा में ‘साहबों’ की नाक के नीचे रिश्वत का ‘खुला खेल’: ₹14,000 में बिकी ईमानदारी, रंगे हाथ धराया PHE का घूसखोर क्लर्क ! मीटिंगों में व्यस्त अफसरों की नाक के नीचे चल रहा था लूट का खेल ..

छिंदवाड़ा // जिला मुख्यालय में जहाँ एक ओर आला अधिकारी एयरकंडीशन्ड कमरों में बैठकर ‘सुशासन’ की लंबी-चौड़ी फाइलें पलट रहे हैं और अंतहीन मीटिंगों में विकास का खाका खींच रहे हैं, वहीं उन्हीं की नाक के नीचे भ्रष्टाचार का घोंघा अपनी जड़ें गहरी कर चुका है। ताजा मामला लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHED) का है, जहाँ लोकायुक्त की टीम ने दबिश देकर विभाग के चेहरे पर कालिख पोत दी है।

चाय की चुस्की के साथ ‘रिश्वत की डील’

भ्रष्टाचार का यह घिनौना खेल खजरी रोड स्थित PHE कार्यालय के पास एक चाय की दुकान पर चल रहा था। विभाग का क्लर्क दर्पण मिश्रा, शिकायतकर्ता सौरव मिश्रा से एक लंबित बिल पास कराने के नाम पर ₹14,000 की रिश्वत डकारने पहुँचा था। उसे लगा था कि वह ‘सिस्टम’ की आड़ में बच निकलेगा, लेकिन लोकायुक्त की सतर्क टीम ने जाल बिछाकर उसे सरेआम दबोच लिया।

सिस्टम में बैठे ‘दीमक’: संदेश गजभिए का नाम भी आया सामने

जानकारों के मुताबिक इस पूरी साजिश की स्क्रिप्ट लिखने में संदेश गजभिए का नाम प्रमुखता से सामने आया है। आरोप है कि रिश्वत की मांग की मुख्य कड़ी यही चेहरा था। लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि पीएचई विभाग में बिना ‘कमीशन’ के फाइलों को पहिए नहीं लगते।

सवाल यह है कि क्या यह भ्रष्टाचार केवल एक क्लर्क तक सीमित है, या इस मलाई का हिस्सा ऊपर ‘साहबों’ तक भी पहुँचता था ?

मीटिंगों में मस्त प्रशासन, भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता !

जिले के प्रशासनिक गलियारों में यह कार्रवाई चर्चा का विषय है, लेकिन इसके साथ ही एक तीखा सवाल उन अधिकारियों पर भी उठता है जो दिन-भर मॉनिटरिंग और सुशासन का ढोल पीटते हैं:

  • क्या अधिकारियों को अपने विभाग में चल रही इस ‘अवैध वसूली’ की भनक तक नहीं थी ?

  • क्या मीटिंगों का दौर सिर्फ कागजी खानापूर्ति के लिए है ?

  • जब क्लर्क स्तर का कर्मचारी सरेआम रिश्वतखोरी कर रहा है, तो विभाग के मुखिया की जवाबदेही क्या है ?

हड़कंप या सिर्फ दिखावा ?

कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप तो मचा है, लेकिन जनता पूछ रही है कि यह हड़कंप कितने दिन रहेगा ? पकड़े गए आरोपी अब सलाखों के पीछे होंगे, लेकिन सिस्टम में बैठे उन ‘बड़े खिलाड़ियों’ का क्या, जो परदे के पीछे से ऐसी डीलिंग को शह देते हैं ?

लोकायुक्त की टीम अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है और उम्मीद है कि इस सिंडिकेट के अन्य चेहरे भी बेनकाब होंगे। छिंदवाड़ा की यह घटना एक सबक है कि जब जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी भूलकर केवल कागजी कार्रवाई में उलझ जाते हैं, तो ‘दर्पण मिश्रा’ जैसे लोग जनता का हक मारने का साहस जुटा लेते हैं।

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