दिग्विजय सिंह का ‘संगठन मॉडल’ और कांग्रेस की पुनरुद्धार योजना, सत्ता के बजाय संगठन पर फोकस..
दिग्विजय सिंह के हालिया बयान जिसमें दिग्गी राजा ने Rss के संगठनात्मक ढांचे की प्रशंसा की इससे यह स्पष्ट है कि वे कांग्रेस को “इवेंट-बेस्ड” राजनीति से हटाकर “कैडर-बेस्ड” राजनीति की ओर ले जाना चाहते हैं। कमलनाथ के दौर में पार्टी ‘मैनेजमेंट’ पर आधारित थी, जबकि दिग्विजय अब इसे ‘मैनपावर’ पर आधारित करने की वकालत कर रहे हैं।

1. ‘फर्श से अर्श’ वाला सांगठनिक ढांचा : दिग्विजय सिंह का मॉडल भाजपा/आरएसएस की तर्ज पर “पन्ना प्रमुख” की काट के रूप में एक समर्पित कैडर तैयार करने पर केंद्रित है।
ग्राउंड-अप अप्रोच: नेताओं को एसी कमरों से निकालकर जिलों और तहसीलों में ‘फर्श पर बैठने’ के लिए मजबूर करना। इसका उद्देश्य कार्यकर्ताओं के बीच यह विश्वास पैदा करना है कि नेतृत्व उनके साथ खड़ा है।
मंडल और सेक्टर का सशक्तिकरण: दिग्विजय का मानना है कि चुनाव प्रदेश मुख्यालय से नहीं, बल्कि मतदान केंद्रों (Booths) से जीते जाते हैं। उनकी योजना हर बूथ पर 10 समर्पित ‘स्थानीय रक्षक’ तैयार करने की है।
2. हिंदुत्व के नैरेटिव का ‘काउंटर-मैकेनिज्म’ : दिग्विजय सिंह की रणनीति भाजपा के हिंदुत्व को सीधे चुनौती देने के बजाय उसे ‘समावेशी’ बनाने की है। “जय सियाराम” बनाम “जय श्री राम”: वे कांग्रेस को ‘राम’ के मुद्दे पर रक्षात्मक होने के बजाय आक्रामक देखना चाहते हैं। उनका मॉडल धार्मिक यात्राओं (जैसे नर्मदा परिक्रमा) और स्थानीय मंदिरों के पुजारियों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने पर जोर देता है, ताकि भाजपा के ‘हिंदू एकाधिकार’ को तोड़ा जा सके।
धार्मिक ध्रुवीकरण की काट: अल्पसंख्यकों के साथ खड़े रहने के साथ-साथ बहुसंख्यक समाज की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना, ताकि भाजपा उन्हें “हिंदू विरोधी” करार न दे सके।
3. ‘कमलनाथ युग’ के बाद का नेतृत्व परिवर्तन : कमलनाथ की घटती सक्रियता के बीच, दिग्विजय का मॉडल नए और पुराने के ‘मिश्रण’ की वकालत करता है: दिग्विजय सिंह स्वयं एक ‘मेंटर’ (मार्गदर्शक) की भूमिका में रहेंगे, जो रणनीति बनाएंगे।
युवा चेहरों का उपयोग: जीतू पटवारी, उमंग सिंघार और जयवर्धन सिंह जैसे नेताओं को फ्रंट पर रखकर आक्रामक कैंपेन चलाना, लेकिन उनकी कमान अनुभवी हाथों में रखना।
4. आर्थिक और कानूनी मोर्चे पर घेराबंदी : जैसा कि खंडवा के आईएएस अधिकारियों वाले मामले में देखा गया, दिग्विजय का मॉडल ‘डेटा-आधारित’ आक्रमण पर केंद्रित है। फर्जीवाड़े का पर्दाफाश: नौकरशाहों और सरकार के बीच के गठजोड़ को कानूनी दस्तावेजों और आरटीआई (RTI) के माध्यम से जनता के सामने लाना।
कर्ज और भ्रष्टाचार: प्रदेश के बढ़ते कर्ज को आम जनता की जेब से जोड़कर एक बड़ा जन-आंदोलन खड़ा करना।
5. आगामी कार्ययोजना: कार्यान्वयन की चुनौतियां : दिग्विजय सिंह के इस मॉडल को लागू करने में कुछ प्रमुख बाधाएं भी हैं:
आंतरिक गुटबाजी: क्या कमलनाथ खेमा और अन्य गुट दिग्विजय के ‘एकल वर्चस्व’ को स्वीकार करेंगे ? दिग्विजय के कुछ पुराने बयानों को भाजपा हथियार बनाकर मूल मुद्दों से ध्यान भटका सकती है।
दिग्विजय सिंह की यह कार्ययोजना कांग्रेस के लिए “करो या मरो” वाली स्थिति है। यदि वे अगले 6 महीनों में संगठन को इस मॉडल पर ढालने में सफल रहते हैं, तो मध्य प्रदेश कांग्रेस एक बार फिर भाजपा के अभेद्य दुर्ग में सेंध लगाने में सक्षम होगी। अन्यथा, संशय और नेतृत्व का शून्य पार्टी को और अधिक रसातल में ले जा सकता है।