वन विभाग का शर्मनाक सच: कट गया जंगल, अब फोटोबाजी का दिखावा ..

वन विभाग का शर्मनाक सच: 20 हेक्टेयर जंगल कटने तक एसी कमरों में सोते रहे अफसर, अब अतिक्रमण हटाने के नाम पर फोटोबाजी की बेशर्मी !

वन विभाग के वातानुकूलित (AC) कमरों में बैठकर मोटी तनख्वाह डकारने वाले साहबों की नींद तब खुलती है, जब हरा-भरा जंगल कटकर वीरान मैदान बन चुका होता है। जब बड़े अधिकारी ही अपने एसी कमरों के विलासिता भरे माहौल से बाहर कदम नहीं निकालेंगे, तो मैदानी अमले का लापरवाह और बेलगाम होना तय है। छिंदवाड़ा रेंज के पनिहारी बीट में यही शर्मनाक वाकया सामने आया है।

✍️  राकेश प्रजापति 

आंखों के सामने कट गया 20 हेक्टेयर जंगल, अफसरों के कानों पर नहीं रेंगी जूं यह कितनी घोर शर्म और विडंबना की बात है कि पनिहारी बीट के कक्ष क्रमांक 1649 में अतिक्रमणकारियों ने लगभग 20 हेक्टेयर जंगल की बेतहाशा कटाई कर डाली। वहां बाकायदा खेती की पूरी तैयारी कर ली गई, लेकिन पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा का दंभ भरने वाले वन विभाग के आलाधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी !

क्या 20 हेक्टेयर का विशाल जंगल रातों-रात कट गया ? महीनों से कुल्हाड़ियां चलती रहीं, बेतहाशा पेड़ गिरते रहे, लेकिन विभाग गहरी और भ्रष्ट नींद में सोया रहा।

शिकायतों के बाद जागी नींद, बेशर्मी से खिंचवा रहे फोटो जब मामला शिकायतों और समाचार पत्रों की सुर्खियों तक पहुंचा, तब जाकर अफसरों की तंद्रा टूटी और उनका ‘मैदानी अमला’ नींद से जागा। अब मुख्य वनसंरक्षक कमल अरोरा, डीएफओ स्वरुप दीक्षित के ‘निर्देशों’ का ढिंढोरा पीटते हुए, रेंजर नीरज सिंह बिसेन और उनकी टीम मौके पर पहुंची। ग्रामीणों के हल्के विरोध के बाद अतिक्रमण हटाकर वहां पौधरोपण शुरू कर दिया गया। लेकिन विडंबना देखिए, वन विभाग के अधिकारी बड़ी बेशर्मी के साथ मौके पर फोटो खिंचवाकर इस पूरी कार्रवाई को अपनी ‘सक्रियता’ और ‘उपलब्धि’ बताकर वाहवाही लूटने में लगे हैं। अपनी ही घोर लापरवाही पर पर्दा डालकर उसे उपलब्धि की तरह पेश करना विभाग की नाकामी को चीख-चीख कर बयां कर रहा है।

जवाब दे वन विभाग: कौन करेगा इस विनाश की भरपाई ? इन अधिकारियों को यह स्पष्ट जवाब देना होगा कि जनता के टैक्स की गाढ़ी कमाई से जो भारी-भरकम तनख्वाह ये हर महीने वसूल रहे हैं, वह किस बात की है ? क्या जंगलों, पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा करना इनका एकमात्र कर्तव्य नहीं है ?

  • 20 हेक्टेयर में हुए इस अपूरणीय पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई अब कौन करेगा ?

  • इतने बड़े पैमाने पर हुए जंगल के विनाश का असली जिम्मेदार आखिर है कौन ?

सबसे बड़ा अनुत्तरित सवाल यही है कि क्या जनता को इन सवालों के जवाब कभी मिल भी पाएंगे? या फिर जंगल में चलने वाली कुल्हाड़ी की आवाज़ की तरह, जवाबदेही की यह मांग भी वन विभाग के भ्रष्टाचार और लीपापोती के शोर में हमेशा के लिए गुम हो जाएगी ?