धरती का श्रृंगार: नरसिंहपुर में रची गई एक अद्वितीय हरित क्रांति..

“जब समाज और प्रकृति एक साथ कदम मिलाते हैं, तो बंजर धरती के माथे पर भी हरियाली की नई लकीरें खिंच जाती हैं।”

नरसिंहपुर जिले ने ‘जल गंगा संवर्धन अभियान – 2026’ के अंतर्गत एक ऐसा अभूतपूर्व इतिहास रचा है, जो पूरे देश और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल है। बिना एक भी सरकारी रुपया खर्च किए, केवल जनभागीदारी की असीम शक्ति से धरती को फिर से संवारने का यह एक जादुई प्रयास है।

✍️   सुशांत पुरोहित के साथ राकेश प्रजापति 

जल संचयन का महायज्ञ: 70 हज़ार ‘अमृत कलश’

  • जनता का श्रमदान: आमजन, पर्यावरण प्रेमियों और जन-प्रतिनिधियों के अटूट संकल्प से 70 हज़ार से अधिक खंतियां (कंटूर ट्रेंच) खोदी गई हैं, जिसमें सरकार का एक भी रुपया नहीं लगा।

  • अतिक्रमण मुक्त धरा: कलेक्टर रजनी सिंह के कुशल निर्देशन में, ये खंतियां उन जमीनों पर बनाई गई हैं जिन्हें अतिक्रमण की बेड़ियों से मुक्त कराया गया था।

  • जल-धारण की असीम क्षमता: प्रत्येक खंती अब लगभग 600 लीटर वर्षा जल को अपने भीतर सहेजने की क्षमता रखती है, जिससे धरती की प्यास बुझेगी और भूजल स्तर फिर से जीवंत होगा। अब इन क्षेत्रों में पारंपरिक खेती की जगह केवल प्रकृति फलेगी-फूलेगी।

नदियों का पुनर्जीवन: नर्मदा और सींगरी का नया सवेरा

नदियों की कल-कल को फिर से प्राकृतिक और शुद्ध बनाने के लिए पूरी तरह से ईको-फ्रेंडली (Eco-friendly) कदम उठाए गए हैं:

  • नर्मदा का हरित आँचल: नर्मदा नदी के तटवर्ती 91 गांवों में करीब 250 एकड़ भूमि की फेंसिंग कर एक विशाल ‘हरित क्षेत्र’ विकसित किया जा रहा है।

  • सींगरी नदी का शृंगार: मगरधा, रौंसरा और नकटुआ ग्राम पंचायतों में नदी के दोनों छोर पर पाथवे बनाकर पत्थरों से पिचिंग की गई है, ताकि नदी का स्वरूप और भी निखर सके।

  • शून्य-ऊर्जा जल शोधन : जिला पंचायत सीईओ गजेंद्र सिंह नागेश के अनुसार, पर्यावरण को बिना नुकसान पहुँचाए 6 ऐसे ‘वाटर ट्रीटमेंट प्लांट’ तैयार किए जा रहे हैं जो बिना किसी मशीन या बिजली के संचालित होंगे। इनमें रेत, गिट्टी, बोल्डर और पत्तियों के प्राकृतिक फिल्टर से छनकर ही शुद्ध जल जीवनदायिनी नर्मदा में प्रवाहित होगा।

हरित क्षेत्र और औषधीय वाटिका का उदय

  • दानवीरता और प्रकृति प्रेम: करकबेल के मेख गांव में मालगुजार परिवार द्वारा दान की गई 21 एकड़ ज़मीन को अतिक्रमण से मुक्त कर एक सुंदर तालाब का रूप दिया गया है।

  • हरियाली का विस्तार: यहाँ जबलपुर की एनईएस संस्था द्वारा 500 पौधों का रोपण किया गया। जिले भर की खंतियों में संजीवनी समान औषधीय पौधे रोपे गए हैं।

  • सुरक्षित भविष्य: सरकारी जमीनों पर अब केवल वानिकी और उद्यानिकी को बढ़ावा दिया जाएगा। इन जमीनों को पंचायतों की देखरेख में सौंपा गया है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि प्रकृति का यह आभूषण हमेशा महफूज़ रहेगा।

नरसिंहपुर की यह अभिनव पहल सिद्ध करती है कि जब दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो सरकारी बजट कभी बाधा नहीं बनता। यह केवल मिट्टी की खुदाई नहीं है, बल्कि धरती माँ के आंचल में प्राण-वायु और अमृत-जल भरने का एक महान अनुष्ठान है।