खुशियों की दावत पर ‘फूड पॉइजनिंग’ का ग्रहण: नागपुर गई बारात में बिगड़ी सौ से अधिक मेहमानों की तबीयत ..
कहते हैं ‘शादी का लड्डू’ जो खाए वो पछताए, लेकिन नागपुर गई इस बारात में लड्डू तो दूर, दही-बड़ों ने ही बारातियों को ‘अस्पताल के फेरे’ लगवा दिए। बारात बोरगांव से पूरी शान के साथ निकली थी, पर किसे पता था कि विदाई से पहले ही ‘गुलाब जामुन’ अपना रंग दिखा देंगे। दावत की मेज पर सजे जिस दही-बड़े को मेहमान बड़े चाव से गटक रहे थे, उसे क्या मालूम था कि वह बारातियों के पेट में जाकर सीधा ‘इमरजेंसी वार्ड’ का टिकट कटा देगा ..
राकेश प्रजापति
सौसर/बोरगांव रेमंड: खुशियों के जश्न और शहनाइयों की गूंज के बीच उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक शादी समारोह की दावत ‘बीमारी का सबब’ बन गई। सौसर के बोरगांव रेमंड से नागपुर गई एक बारात में शामिल मेहमानों के लिए भोजन का स्वाद उस वक्त कड़वा हो गया, जब दही-बड़े और गुलाब जामुन खाने के बाद अचानक एक-एक कर सौ से अधिक लोग फूड पॉइजनिंग का शिकार हो गए।
दही-बड़े और गुलाब जामुन बने ‘विलेन’
जानकारी के मुताबिक, बोरगांव के मोहखेड़े परिवार की बारात नागपुर के एक मांगलिक समारोह में शामिल होने गई थी। शानदार स्वागत और सत्कार के बीच बारातियों ने जैसे ही भोजन ग्रहण किया, कुछ ही देर बाद माहौल बदल गया। बारातियों का कहना है कि मेनु में शामिल दही-बड़ा और गुलाब जामुन खाने के बाद अचानक लोगों को उल्टी, दस्त और तेज पेट दर्द की शिकायत होने लगी। देखते ही देखते शादी का पंडाल अफरा-तफरी के केंद्र में तब्दील हो गया।
सरहद पार तक फैला असर
इस विवाह समारोह में केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि मुलताई, बैतूल और महाराष्ट्र के कई क्षेत्रों से मेहमान पहुंचे थे। जैसे ही जहर फैले भोजन का असर शुरू हुआ, अलग-अलग क्षेत्रों के बाराती अपने-अपने गृह नगरों की ओर लौटे और वहां के अस्पतालों में भर्ती हुए। फिलहाल बोरगांव क्षेत्र के करीब 30 से अधिक मरीजों का उपचार सौसर के सिविल अस्पताल में युद्धस्तर पर जारी है।
अस्पताल में मुस्तैदी: खतरे से बाहर हैं मरीज
मरीजों के अस्पताल पहुंचते ही बीएमओ डॉ. रुपेश बोकडे के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने मोर्चा संभाला। अस्पताल प्रबंधन की त्वरित कार्रवाई और विशेष निगरानी के चलते फिलहाल सभी मरीजों की स्थिति स्थिर और खतरे से बाहर बताई जा रही है। एहतियात के तौर पर सभी को ऑब्जर्वेशन में रखा गया है।
सियासी दिग्गजों ने बढ़ाया ढांढस
घटना की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय विधायक विजय चौरे और पूर्व मंत्री नाना भाऊ मोहोड़ तत्काल सिविल अस्पताल पहुंचे। उन्होंने एक-एक मरीज से मिलकर उनका हालचाल जाना और डॉक्टरों को सख्त निर्देश दिए कि इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही न बरती जाए।
यह घटना एक बार फिर सार्वजनिक कार्यक्रमों में खान-पान की शुद्धता और हाइजीन पर बड़े सवाल खड़े कर रही है। फिलहाल राहत की बात यही है कि समय रहते उपचार मिलने से एक बड़ा हादसा टल गया।
संदेश: यह घटना केवल एक खबर नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए एक कड़वी चेतावनी है जो शादी-ब्याह के पंडालों में ‘मुफ्त के स्वाद’ के आगे अपनी सेहत को गिरवी रख देते हैं। गर्मियों की दस्तक के बीच बासी दही और मिलावटी मिठाइयां अक्सर दावत के जश्न को मातम में बदल देती हैं। याद रखिए, प्लेट में परोसा गया हर लुभावना व्यंजन सुरक्षित नहीं होता। अगर खाते वक्त थोड़ी सावधानी और परख नहीं बरती, तो अगली दावत की जगह अस्पताल की खिचड़ी नसीब हो सकती है।