छिंदवाड़ा विवांता हॉस्पिटल में युवक की मौत और हंगामा..

सिम्स बना ‘सफेद हाथी’, प्राइवेट अस्पतालों में कट रही ‘लूट की फसल’: विवांता हॉस्पिटल में लापरवाही से युवक की मौत!

✍️   राकेश प्रजापति 

छिंदवाड़ा// जिले की दम तोड़ती और खोखली हो चुकी स्वास्थ्य व्यवस्था ने एक बार फिर एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। जिला मुख्यालय में सिम्स (SIMS) जैसे भारी-भरकम मेडिकल कॉलेज के होने का खूब ढिंढोरा पीटा जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह सिर्फ एक ‘सफेद हाथी’ बनकर रह गया है। यहां न उचित उपचार है और न ही समुचित व्यवस्थाएं। इसी बदहाली का नतीजा है कि गरीब, मासूम और जरूरतमंद मरीजों को मजबूरी में उन प्राइवेट अस्पतालों की चौखट पर जाना पड़ता है, जो इलाज के नाम पर सिर्फ मौत बांट रहे हैं।

ताजा और बेहद शर्मनाक मामला परासिया रोड स्थित विवांता हॉस्पिटल का है। आज यहां एक युवक महज कमर दर्द की शिकायत लेकर पहुंचा था, लेकिन अस्पताल से उसकी लाश बाहर निकली।

इलाज से पहले होता है जेब का ‘पोस्टमार्टम’ जिले के प्राइवेट अस्पतालों पर “ऊंची दुकान, फीके पकवान” वाली कहावत पूरी तरह से चरितार्थ होती है। इन अस्पतालों में मरीज का इलाज शुरू होने से पहले ही उनके परिजनों की जेब का बेरहमी से ‘पोस्टमार्टम’ कर दिया जाता है। छोटी-छोटी और सामान्य बीमारियों का बिल हजारों में बनाकर जबरदस्त लूट मची हुई है।

कुकरमुत्ते की तरह फैले हैं मौत के ये अड्डे जिला मुख्यालय से लेकर गली-मोहल्लों तक कुकरमुत्ते की तरह फल-फूल रहे इन तथाकथित अस्पतालों में न तो कोई एक्सपर्ट चिकित्सक मौजूद है और न ही संतोषजनक उपचार की कोई गारंटी। सिर्फ चमचमाती इमारतों और दिखावे के नाम पर यहां मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर लूट की फसल जमकर काटी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग इन पर नकेल कसने के बजाय मौन साधे बैठा है।

क्या है पूरा मामला ? जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान दमुआ निवासी ज्वाला बिहारे के रूप में हुई है, जो 108 एंबुलेंस चलाकर लोगों की जान बचाने का काम करता था। परिजनों का सीधा और गंभीर आरोप है कि विवांता अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही और गलत दवा (रिएक्शन) के कारण युवक की हालत बिगड़ी और उसने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।

युवक की मौत के बाद जब परिजनों का आक्रोश फूटा और उन्होंने अस्पताल में जमकर हंगामा किया, तब देहात थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने किसी तरह स्थिति को संभाला और मामले में कार्रवाई का आश्वासन देकर शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवाया।

रटा-रटाया जवाब इस गंभीर मामले में देहात थाना निरीक्षक जीएस राजपूत ने बताया कि प्रबंधन का कहना है कि युवक को पीठ दर्द के चलते भर्ती कराया गया था और सुबह अचानक ‘अटैक’ आने से उसकी मौत हो गई। फिलहाल मर्ग कायम कर लिया गया है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा होगा।

प्रशासन पर खड़े होते तीखे सवाल:

  • जब जिले में मेडिकल कॉलेज मौजूद है, तो मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में लुटने के लिए क्यों छोड़ दिया गया है ?

  • कुकरमुत्ते की तरह खुले इन अस्पतालों की नियमित जांच और इनके डॉक्टरों की डिग्री का सत्यापन क्यों नहीं होता ?

  • कमर दर्द जैसी सामान्य शिकायत में मरीज की मौत हो जाना क्या प्रशासन को अस्पताल को सील करने के लिए पर्याप्त कारण नहीं लगता ?

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