PMGSY घोटाले का खुलासा: PIU महाप्रबंधक कविता पटवा को नोटिस ..

OMMAS पोर्टल पर 100 करोड़ से ज्यादा के अतिरिक्त देयक चढ़ाने का आरोप – विभागीय मॉनिटरिंग पर गंभीर सवाल ..

भोपाल/छिंदवाड़ा : प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण में एक बड़ा वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। प्राधिकरण के मुख्य महाप्रबंधक (वित्त) द्वारा जारी नोटिस ने PIU छिंदवाड़ा की महाप्रबंधक कविता पटवा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जारी नोटिस में साफ कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में इकाई को 655.07 लाख रुपए का आवंटन दिया गया था, जबकि जांच में पाया गया कि OMMAS पोर्टल पर 755.73 लाख रुपए के देयक निर्मित कर दिए गए। यानी आवंटित बजट से करीब 100 लाख 73 हजार रुपए अधिक के भुगतान का मामला सामने आया है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार यह केवल तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला माना जा रहा है। नोटिस में इसे स्पष्ट रूप से “वित्तीय अनुशासनहीनता” बताया गया है और चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

मॉनिटरिंग में लापरवाही या सुनियोजित खेल ?

विभागीय जानकारों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि के देयक OMMAS पोर्टल पर अपलोड होना अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है। यह तभी संभव है जब मॉनिटरिंग तंत्र पूरी तरह से फेल हो जाए या फिर जानबूझकर अनदेखी की जाए।

सूत्रों का दावा है कि PIU छिंदवाड़ा में लंबे समय से विवादास्पद कार्यप्रणाली को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। आरोप यह भी है कि महाप्रबंधक द्वारा अपने चहेते इंजीनियरों को अतिरिक्त प्रभार देकर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं, जिससे कामकाज की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठे।

विभाग की साख पर लगा दाग

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी जनकल्याणकारी योजना में इस तरह की अनियमितता सामने आना बेहद गंभीर मामला है। ग्रामीण इलाकों में सड़क निर्माण के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा बड़ी राशि खर्च की जाती है, लेकिन यदि बजट से अधिक भुगतान के देयक ही तैयार हो जाएं तो यह पूरे सिस्टम पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

विभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं विभाग की गरिमा को नुकसान पहुंचाती हैं और इससे सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

प्रशासनिक हलकों में अब यह मांग तेज हो गई है कि महाप्रबंधक कविता पटवा को तत्काल पद से हटाया जाए और उनके कार्यकाल में हुए सभी वित्तीय और प्रशासनिक निर्णयों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

जानकारों का कहना है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हुई तो PMGSY से जुड़े कई और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।

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