CHMO कार्यालय में रिश्वत लेते कंप्यूटर ऑपरेटर गिरफ्तार..

छिंदवाड़ा स्वास्थ्य विभाग में रिश्वत का खेल बेनकाब: CMHO कार्यालय लोकायुक्त के शिकंजे में, सिस्टम पर बड़ा सवाल

छिंदवाड़ा // जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर शर्मसार हो गई है। लोकायुक्त पुलिस ने गुरुवार को सीएमएचओ कार्यालय में छापा मारकर कंप्यूटर ऑपरेटर जितेंद्र यदुवंशी को 50 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
रिश्वत एक किडनी पीड़ित और दिव्यांग नर्सिंग ऑफिसर से उनकी पदस्थापना (अटैचमेंट) के बदले मांगी गई थी। यह मामला सिर्फ एक कर्मचारी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग की कथित भ्रष्ट प्रणाली का कड़वा सच उजागर करता है।

मानवता को शर्मसार करने वाला मामला : रोहनकला में पदस्थ नर्सिंग ऑफिसर पुष्पा बरकड़े, जो गंभीर किडनी बीमारी और दिव्यांगता से जूझ रही हैं, ने इलाज की सुविधा के लिए सीएमएचओ कार्यालय में बीते पांच महीनो से अटैचमेंट का आवेदन दिया था। बार बार गुहार लगाने के बाद भी कोई कर्यवाही न होने पर पीडिता ने हर मंगलबार होने बाली कलेक्टर जनसुनवाई में गुहार लगाई

कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को समझाते हुए जनसुनवाई में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि उन्हें कार्यालय में अटैच किया जाए। लेकिन जब पुष्पा आदेश लेकर कार्यालय पहुंचीं, तो वहां पैसे की मांग कर दी गई !आरोप है कि कंप्यूटर ऑपरेटर ने कहा— “सीएमएचओ को पूरे पैसे चाहिए, कम में बात नहीं बनेगी।” यह कथन पूरे सिस्टम की मानसिकता पर सवाल खड़ा करता है।

पीड़िता के अनुसार, जब उन्होंने कलेक्टर के आदेश का हवाला दिया, तो सीएमएचओ डॉ. नरेश गुन्नाड़े ने कथित तौर पर कहा—
“कलेक्टर हमारे कोई अधिकारी नहीं हैं। ”यदि यह कथन सही है, तो यह प्रशासनिक अनुशासन और शासन व्यवस्था पर सीधा तमाचा है।
यह दर्शाता है कि विभागीय तंत्र किस हद तक सत्ता के निर्देशों की अनदेखी कर रहा है।

रंगे हाथ रिश्वतखोर गिरफ्तार : मजबूर होकर पीड़िता ने जबलपुर लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत सत्य पाए जाने पर लोकायुक्त टीम ने जाल बिछाया और जैसे ही 50 हजार रुपए दिए गए, कंप्यूटर ऑपरेटर को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया।
अब आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।

डॉ. नरेश गुन्नाड़े पर गंभीर सवाल : स्वास्थ्य विभाग के जानकारों के अनुसार, सीएमएचओ डॉ. नरेश गुन्नाड़े शुरू से ही विवादास्पद कार्यशैली के लिए चर्चित रहे हैं। जानकारों का कहना है कि उनकी कार्यप्रणाली को लेकर कलेक्टर और स्वास्थ्य मंत्री स्तर तक नाराजगी जताई जा चुकी है।

जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गिरती हालत, मरीजों की शिकायतें और प्रशासनिक अव्यवस्थाएं उनके कार्यकाल में लगातार सुर्खियों में रही हैं।
आरोप है कि बिना “रिश्वत की चाशनी” कोई काम आगे नहीं बढ़ता, और यह घटना उन आरोपों को और बल देती है।

भ्रष्ट सिस्टम की परतें खुलीं : यह मामला केवल 50 हजार रुपए का नहीं है। यह उस सिस्टम का पर्दाफाश है जिसमें बीमार और दिव्यांग कर्मचारी से रिश्वत मांगी जाती है , कलेक्टर के आदेशों की खुलेआम अनदेखी होती है , प्रशासनिक तंत्र में घूस को “सामान्य प्रक्रिया” बना दिया गया है

लोकायुक्त ने निचले स्तर के कर्मचारी को पकड़ लिया, लेकिन बड़ा सवाल यह है— क्या केवल कंप्यूटर ऑपरेटर ही दोषी था ? या यह एक संगठित सिस्टम का हिस्सा है ? क्या सीएमएचओ स्तर तक जांच पहुंचेगी ? अगर उच्च स्तर पर जिम्मेदारी तय नहीं हुई, तो यह गिरफ्तारी केवल दिखावटी कार्रवाई बनकर रह जाएगी।

भ्रष्ट स्वास्थ्य तंत्र पर सर्जिकल स्ट्राइक : छिंदवाड़ा की जनता अब केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग की सफाई चाहती है।
बीमारों की जिंदगी से खेलने वाले तंत्र पर कठोर कार्रवाई ही लोकतंत्र और प्रशासन की साख बचा सकती है।

यह घटना छिंदवाड़ा स्वास्थ्य विभाग के लिए चेतावनी है। अगर सिस्टम नहीं सुधरा, तो लोकायुक्त की अगली दस्तक और भी बड़े नामों पर पड़ सकती है। अब देखना यह है कि शासन और प्रशासन इस भ्रष्ट तंत्र पर कब और कैसे सर्जिकल स्ट्राइक करता है।