गुलशन कंपनी में मजदूर की दर्दनाक मौत, मशीन में फंसने से गई जान

मशीनों के शोर में दब गई ‘धनराज’ की चीख, मुनाफे के लिए मजदूरों की जान से खिलवाड़ कब तक ?

गुलशन कंपनी में दर्दनाक हादसा: बॉयलर की सफाई करते वक्त बेल्ट में फंसा मजदूर, मौके पर ही दर्दनाक मौत आक्रोश: शव के पास धरने पर बैठे विधायक और परिजन, उठ रहे गंभीर सवाल— आखिर श्रम विभाग की नींद कब खुलेगी ?

✍️  त्वरित टिप्पणी : राकेश प्रजापति 

सौसर/छिंदवाड़ा // सौसर का औद्योगिक क्षेत्र अब ‘विकास’ का नहीं, बल्कि मजदूरों के लिए ‘मौत का कारखाना’ बनता जा रहा है। कंपनियों की गगनचुंबी चिमनियों से निकलता धुआं यह बता रहा है कि यहाँ मुनाफे की आग में गरीब मजदूरों की सुरक्षा और जिंदगी को कैसे स्वाहा किया जा रहा है। महज दो दिन के भीतर यह दूसरा बड़ा हादसा है, जिसने कंपनी प्रबंधन की अमानवीयता और श्रम विभाग की लचर कार्यप्रणाली की पोल खोलकर रख दी है।

ताज़ा मामला गुलशन कंपनी का है, जहाँ शनिवार को सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए एक 52 वर्षीय मजदूर धनराज गुजवार को मौत के मुंह में धकेल दिया गया।

लोधीखेड़ा थाना अंतर्गत ग्राम कबर पिपला निवासी धनराज गुजवार शनिवार को कंपनी में बॉयलर की सफाई कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों और साथी मजदूरों के अनुसार, वहां सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे। सफाई के दौरान अचानक धनराज का संतुलन बिगड़ा और वे सीधे चलती मशीन के बेल्ट की चपेट में आ गए।

मशीन की रफ्तार और बेल्ट की जकड़ इतनी भयावह थी कि धनराज को संभलने का मौका तक नहीं मिला और उनका शरीर बुरी तरह मशीन में फंस गया। मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई।

यह हादसा नहीं, ‘संस्थागत हत्या’ है ?

यह घटना सवाल खड़े करती है कि आखिर एक मजदूर को चलती मशीन के पास बिना सुरक्षा गार्ड या इमरजेंसी स्टॉप प्रोटोकॉल के सफाई के लिए क्यों भेजा गया ?

  1. सुरक्षा किट नदारद: साथी श्रमिकों का आरोप है कि मृतक के पास हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट या अन्य सुरक्षा संसाधन नहीं थे।

  2. दो दिन में दूसरा हादसा: अभी केजेवी (KJV) कंपनी के हादसे की आग ठंडी भी नहीं हुई थी कि गुलशन कंपनी में यह कांड हो गया। यह संयोग नहीं, बल्कि लापरवाही का एक पैटर्न है।

श्रम विभाग: मौन तमाशबीन या भागीदार ?

छिंदवाड़ा जिले का औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग (Industrial Health and Safety Department) और श्रम विभाग सिर्फ फाइलों में जीवित है।

  • सवाल: क्या श्रम विभाग के अधिकारियों ने कभी इस कंपनी का औचक निरीक्षण किया ?

  • सवाल: क्या बॉयलर और भारी मशीनों के पास ‘सेफ्टी ऑडिट’ की रिपोर्ट मौजूद थी ? अगर नहीं, तो यह माना जाना चाहिए कि मजदूरों के खून के छींटे सिर्फ मशीन पर नहीं, बल्कि उन भ्रष्ट अधिकारियों की वर्दी पर भी हैं जो निरीक्षण के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करते हैं।

सड़क पर उतरा गुस्सा:

विधायक का धरना हादसे की खबर मिलते ही कबर पिपला गांव से परिजनों और ग्रामीणों का हुजूम कंपनी गेट पर जमा हो गया। माहौल को तनावपूर्ण देख टीआई एबी मर्सकोले भारी पुलिस बल के साथ मौके पर तैनात हो गए। स्थानीय विधायक विजय चौरे ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल मोर्चा संभाला। वे परिजनों के साथ वहीं धरने पर बैठ गए। विधायक ने स्पष्ट शब्दों में प्रबंधन को चेतावनी दी है कि जब तक मृतक के परिवार को उचित मुआवजा और स्थायी नौकरी की मांग पर आड़े हुए थे।यह सब घटनाक्रम कल देर शाम तक चलता रहा

कानूनी पहलू: क्या कार्रवाई होनी चाहिए ?

इस मामले में सिर्फ मुआवजे से बात नहीं बननी चाहिए। भारतीय न्याय संहिता और फैक्ट्री एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई जरूरी है:

  • IPC 304A (लापरवाही से मौत): कंपनी के मैनेजर और सेफ्टी ऑफिसर पर सीधे तौर पर यह धारा लागू होनी चाहिए।

  • Factory Act 1948 (Section 7A): यह धारा कहती है कि कामगारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। इसका उल्लंघन गैर-जमानती अपराध होना चाहिए।

धनराज गुजवार अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका परिवार अब कंपनी की दया और प्रशासन की फाइलों के बीच न्याय की भीख मांग रहा है। अगर आज भी प्रशासन ने सख्त नजीर पेश नहीं की, तो कल किसी और ‘धनराज’ की चीख किसी और मशीन के शोर में दब जाएगी।