PMGSY में बड़ा खेल ! GM की कार्यप्रणाली पर सवाल, डेमेज कंट्रोल मीटिंग फेल

PMGSY में बवाल की जड़ — GM कविता पटवा की विवादित कार्यप्रणाली, जर्जर सड़कें और ‘डेमेज कंट्रोल मीटिंग’ का नाकाम खेल

छिंदवाड़ा // प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जिले में अब विकास की नहीं, बल्कि घटिया निर्माण, जर्जर सड़कों और अफसरशाही की तानाशाही की पहचान बनती जा रही है। इस पूरे विवाद के केंद्र में हैं — महाप्रबंधक (GM) कविता पटवा, जिनकी कार्यप्रणाली को लेकर पहले से ही ठेकेदारों, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में भारी असंतोष है।

जिले भर में सड़कें बदहाल, लेकिन अफसर आंख मूंदे

जिले के ग्रामीण अंचलों में हालात यह हैं कि—

  • कई सड़कों पर डामर उखड़ चुका है

  • गिट्टी खुलेआम बिखरी है

  • घटिया निर्माण सामग्री का खुला इस्तेमाल

  • पुल-पुलियाओं की हालत खतरनाक

वहीं दूसरी ओर जन-मन योजना जैसे संवेदनशील आदिवासी क्षेत्रीय कार्यों में भी घोर लापरवाही के आरोप हैं। मॉनिटरिंग नाममात्र की है, और अधिकांश कार्य कागजों में पूरे दिखाए जा रहे हैं।

भोपाल में फटकार के बाद हरकत में आया विभाग

जानकार सूत्रों के मुताबिक, बीते दिनों राजधानी भोपाल में वरिष्ठ अधिकारियों ने इन सभी मामलों पर संज्ञान लिया और समीक्षा बैठक में GM कविता पटवा की जमकर खिंचाई की गई।
इसी के बाद विभाग में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में डेमेज कंट्रोल की रणनीति बनाई गई।

संजू के ढाबे पर गुप्त बैठक, समन्वय का दिखावा

विभागीय सूत्र और असंतुष्ट ठेकेदारों बताते हैं कि GM कविता पटवा के निर्देश पर उनके चहेते इंजीनियरों ने कल स्थानीय संजू के ढाबे पर एक गुप्त डेमेज कंट्रोल बैठक रखी। इस बैठक में—

  • जिले के समस्त ठेकेदारों को आमंत्रित किया गया, खासकर असंतुष्ट ठेकेदार जिन्हें तरह तरह के प्रलोभन दिए गए

  • आपसी विरोध भुलाकर “समन्वय” से काम करने और रुके भुगतान करने , काली सूची से बेदखल करने पर सहमति बनानी थी ,

  • ताकि बाहर उठ रही आवाजों को दबाया जा सके

  • असंतुष्ट ठेकेदारों के मना करने पर, gm के चाहते इंजीनियरों ने ठेकेदारों के मान–मनव्वल में हुई देरी और मीटिंग की सूचना मीडिया में लीक होने से मचा हड़कंप

मीडिया पहुंची तो मच गई भगदड़

लेकिन जैसे ही इस बैठक की भनक स्थानीय मीडिया को लगी और पत्रकार मौके पर पहुंचे—
# हड़बड़ाहट मच गई
# अफसर इधर-उधर फोन घुमाने लगे
# ठेकेदार असमंजस में पड़ गए

सूत्रों का दावा है कि जैसे ही GM के ‘विश्वस्त लोगों’ ने मीडिया की मौजूदगी की सूचना दी, उसी पल GM कविता पटवा ने डेमेज कंट्रोल मीटिंग को अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया।

सबसे बड़ा सवाल—

@अगर सब कुछ पारदर्शी था, तो मीडिया से डर क्यों ?
@ ढाबे पर बैठक क्यों, दफ्तर में क्यों नहीं ?
@ किसे और क्या छिपाया जा रहा था ?