खाद की कालाबाजारी भाजपा नेताओं का धंधा : नकुलनाथ

झूठी घोषणाओं से नहीं चलेगा, किसान को मिलेगा उसका पूरा हक — नकुलनाथ का भाजपा सरकार पर सीधा वार

विशाल किसान बचाओ आंदोलन में गरजे नकुलनाथ — “किसान पूछ रहा हिसाब, भाजपा सरकार क्यों है खामोश?”

छिंदवाड़ा/चौरई…. चौरई ब्लॉक कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित विशाल किसान बचाओ आंदोलन में जिले के पूर्व सांसद नकुलनाथ ने भाजपा सरकार पर ऐसा हमला बोला कि पूरा जनसमूह गूंज उठा। चौरई कम्युनिटी हॉल के सामने मेन रोड पर हजारों किसानों की हुंकार ने यह साफ कर दिया कि अब किसान ठगा नहीं जाएगा, अब सिर्फ सच, मुआवजा और उचित दाम चाहिए — वादा नहीं। 2400 का वादा था, 1200 की लूट दे रहे… ये किसान का सम्मान है या अपमान ?

अपने तेज़ और सटीक तेवर में नकुलनाथ ने कहा—“कांग्रेस की पिछली आंदोलन की आवाज ने गूंगी-बहरी भाजपा सरकार को जगाया था, तभी खाद की आपूर्ति सुधरी थी। लेकिन खाद की कालाबाजारी आज भी भाजपा के नेताओं का धंधा बनी हुई है, इसलिए हर साल खाद संकट किसानों को तोड़ता है।”

उन्होंने यह भी कहा कि “2400 रुपए प्रति क्विंटल में मक्का खरीदने का वादा भाजपा सरकार ने किया था। लेकिन कुसमेली मंडी में किसानों की आंखों में आंसू थे, क्योंकि उन्हें सिर्फ 1200–1400 रुपए मिल रहे हैं। यह वादा था या किसानों के साथ धोखा ?
किसान की उपज पर पूरा दाम दो — यही हमारी मांग है और यही किसान का अधिकार है।

“किसान मांग रहा अपना अधिकार, भाजपा सरकार मौन क्यों? क्या किसानों की आवाज भाजपा को सुनाई नहीं देती?”

नकुलनाथ ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भी आड़े हाथों लेते हुए पूछा— रामनवमी के दिन डूब क्षेत्र के किसानों को 4 गुना मुआवजा देने की घोषणा का क्या हुआ? कब मिलेगा मुआवजा? कब मिलेगा न्याय ?

उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि “गन्ने का दाम 400 रुपए प्रति क्विंटल बिना कागजी खानापूर्ति के दिया जाए।
अगर घोषणाएं पूरी नहीं की गईं तो अगला आंदोलन इससे कहीं बड़ा होगा और भाजपा सरकार को जवाब देना ही पड़ेगा।

“भाजपा का झूठ सबसे मजबूत”— चौरई विधायक सुजीत चौधरी का हमला

विधायक सुजीत चौधरी ने कहा— “किसान, युवा, रोजगार, खाद, बीज, बिजली… हर मुद्दे पर भाजपा का एक ही सच है — झूठ का अंबार।
भाजपा सरकार किसानों की पीड़ा सुनने के बजाय झूठ और जिम्मेदारी से बचने की राजनीति कर रही है।”

उन्होंने नहरों की सफाई, पानी आपूर्ति और सिंचाई सुविधाओं में गंभीर लापरवाही को उजागर करते हुए तत्काल कदम उठाने की मांग की।

पांढुर्ना विधायक निलेश उइके ने भी सरकार की कृषि-विरोधी नीतियों को कड़े शब्दों में घेरा।

कांग्रेस का साफ संदेश — “किसान के हक पर समझौता नहीं”

आंदोलन के बाद कांग्रेस ने राज्यपाल के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए किसान हित में निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं—

कांग्रेस की किसान हितैषी मांगें

  • मक्का की खरीदी 3000 रुपए प्रति क्विंटल की दर से की जाए।

  • DAP, NPK (12:32:16), यूरिया की समय पर और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

  • खाद केन्द्रों पर पटवारी द्वारा खसरा-पावती की नाजायज मांग पर तुरंत रोक लगे।

  • सिंचाई हेतु 24 घंटे बिजली, खराब ट्रांसफॉर्मर का तत्काल बदलाव और रात्रिकालीन नहीं, दिन में बिजली आपूर्ति की जाए।

  • माचागोरा जलाशय की जमुनिया माइक्रो इरीगेशन परियोजना को तत्काल पूरा किया जाए।

  • पेंच माइक्रो-1 परियोजना का काम तुरंत शुरू किया जाए।

किसानों का जनसैलाब और कांग्रेस की जागृत राजनीति

कांग्रेस नेताओं—जिलाध्यक्ष विश्वनाथ ओकटे, गोविंद राय, तीरथ ठाकुर, पृथ्वीराज ठाकुर, प्रमेंद्र साहू, राजेंद्र पटेल सहित महिला कांग्रेस, युवक कांग्रेस, एनएसयूआई, किसान कांग्रेस और सेवादल के हजारों कार्यकर्ता किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मैदान में डटे रहे।

आंदोलन ने साफ कर दिया कि किसान जाग चुका है, कांग्रेस खेत-खलिहान की लड़ाई को सड़क से सदन तक लड़ने को तैयार है,
और भाजपा सरकार को अब झूठे वादों से नहीं, जवाबदेही से काम चलाना होगा।