श्रीकृष्णार्जुन संवाद धारावाहिक की 86वी कड़ी.. 

मध्य प्रदेश के नरसिंगपुर जिले की माटी के मूर्धन्य साहित्यकार स्वर्गीय डॉक्टर रमेश कुमार बुधौलिया जी द्वारा रचित ‘श्रीकृष्णार्जुन संवाद ,धार्मिक साहित्यिक धरोहर है, जिसमे डॉक्टर साहब द्वारा श्रीमद्भगवतगीता  का भावानुवाद किया है ! श्रीमद्भगवतगीता के 700 संस्कृत श्लोकों को ‘श्रीकृष्णार्जुन संवाद में मात्र 697 विलक्ष्ण छंदों में समेटा गया है। गीता के समस्त अठारह अध्यायों का डॉ. बुधौलिया ने गहन अध्ययन करके जो काव्यात्मक प्रदेय हमें सौंपा है, वह अभूतपूर्व है। इतना प्रभावशाली काव्य-रूप बहुत कम देखने को मिलता है। जिनमें सहज-सरल तरीके से गीताजी को समझाने की सार्थक कोशिश की गई है।
इस दिशा में डॉ. बुधौलिया ने स्तुत्य कार्य किया। गीता का छंदमय हिंदी अनुवाद प्रस्तुत करके वह हिंदी साहित्य को दरअसल एक धरोहर सौंप गए।
आज वह हमारे बीच डॉ. बुधोलिया सशरीर भले नहीं हैं, लेकिन उनकी यह अमर कृति योगों युगों तक हिंदी साहित्य के पाठकों को अनुप्राणित करती रहेगी ! उन्ही के द्वारा श्रीमद्भगवतगीता महाकाव्य की छंदोंमयी श्रंखला श्रीकृष्णार्जुन संवाद धारावाहिक की 86वी कड़ी.. 

दसवाँ अध्याय : विभूति-योग

(श्री भगवान का ऐश्वर्य )

ग्यारह रूद्रो में मैं हूँ शिव, मैं यक्ष राक्षसों में कुबेर,

वसुओं में मैं पावक अर्जुन शिखों में मैं हूँ शिखर मेरू।-23

हे अर्जुन प्रमुख पुरोहितों में, देव बृहस्पति सुरगुरू हूँ,

सेनापतियों में युद्धेश्वर, मैं कार्तिकेय शिवनन्दन हूँ।

मैं हूँ जलाशयों में जलनिधि, सीमित विभूतियों में महिमा,

आभास मात्र मेरा देती, निस्सीम रही मेरी महिमा।-24

 

मैं भृगु हूँ प्रमुख महर्षियों में दिव्य ओंकार वाणी में हूँ,

यज्ञों में भगवन्नाम जाप, मैं नगपति अचल नगों में हूँ।-25

 

सब वृक्षों में मैं पीपल हूँ, नारद हूँ मैं देवर्षियों में,

गन्धवों में चित्ररथ रहा मैं कपिल मुनी हूँ सिद्धों में।-26

 

मैं अश्वों में उच्चैःश्रवा, ऐरावत हूँ गजराजों में,

सागर मन्थन से सुधोत्पन्न, मैं हूँ नरेश नर पालों में।-27

 

शास्त्रों में मैं ही वज्र रहा, गायों में कामधेनु मैं हूँ,

कन्दर्प हेतु सनतति का मैं सर्पों में मैं वासुकी हूँ।-28

 

सब नागों में हूँ शेषनाग, हूँ वरूण देवता जलचर में,

पितरों मैं अर्यमा पितरेश्वर, यमराज शासनाधीशों में। 29

 

दैत्यों में, मैं प्रहलाद पार्थ, हूँ काल दमनकर्ताओं में

खग में मैं गरूड़ विष्णु वाहन, वनराज सिंह हूँ पशुओं में।-30

 

मैं पवन पवित्र कारकों में भगवान राम आयुधधर में,

मैं सरिताओं में सुरसरि हूँ, मैं मगरमच्छ हूँ जलचर में।-31  क्रमशः…