जिले में पहली बार केल की खेती का नवाचार….
छिंदवाडा जिले को प्रकृति ने बड़ी फुरसत से गढा है ! यहाँ के मौसम और मिटटी में हर प्रकार की फसले और फलों को उत्पादित करने की क्षमता से नवाजा गया है ! मौजूदा वक्त में इसे जिले के लिए शुभ माना जायगा की यहाँ की प्रक्रति को समझने बाले कृषि और उधानकी विभाग के आलाधिकारियों के प्रयासों से जिले के किसान भाइयों को नवाचार करने का मौका तो मिला ही रहा है साथ ही उनकी आर्थिक उन्नति के द्वार खुल गए है ! धीरे-धीरे आधुनिक तरीके से खेती करके जिले के किसान भाइयों के लिए खेती किसानी लाभ का धंधा बनते जा रहा है ,जो जिले के किसान भाइयों के लिए शुभ संकेत है ….
छिंदवाड़ा विकासखंड के ग्राम उमरड में केल की 8 से 10 एकड़ में खेती कमलनाथ उर्फ घनानंद पटेल पिता भूरेलाल पटेल द्वारा की जा रही है। केल गोभीवर्गीय कुल की सब्जी है, जो कि ठंडे इलाके में होती है। इस बात की भनक लगते ही कि जिला कलेक्टर ने खेती किसानी में हो रहे नवाचार को देखा और मुक्तकंठ से सराहा ..
छिंदवाड़ा जिले में केल फसल का उत्कृष्ट उत्पादन होना जिले के लिए शुभ संकेत है। इसका उपयोग सलाद, सब्जी के साथ-साथ केल पाउडर के रूप में प्रयोग किया जाता है। केल एक तरह से ओषधी तत्वों से भरपूर है, बिशेष तौर से केल में एंटी कैंसर तत्व, खनिज, कोलेस्ट्रॉल, वजन एवं रक्त शर्करा को कम करने का कार्य करती है। इसे लगाने का उपयुक्त समय मध्य सितंबर से मध्य अक्टूबर के बीच का है। साथ ही इसकी उपज 10 से 12 टन प्रति एकड़ प्राप्त की जा सकती है।
बड़े शहरों में इसकी कीमत 200 से 300 रूपये प्रति किलो की दर से है। साथ ही केल पाउडर की कीमत 1500 से 2000 रूपये प्रति किलो तक मिलती है। इसका एक महीने का तैयार रोपा खेत में लगाया जाता है तथा इसकी पहली तूड़ाई रोपाई के 55 से 70 दिन के बाद की जा सकती है।
जिले के प्रगतिशील कृषक संदीप रघुवंशी के यहां कलेक्टर श्री सिंह द्वारा हाईटेक नर्सरी एवं हाईटेक विद्युत पंप के साथ ही केल की खेती का अवलोकन किया गया। प्रगतिशील कृषक द्वारा सब्जियों की नर्सरी तैयार कर छिंदवाड़ा जिले के साथ ही अन्य जिलों में भी उपलब्ध कराई जा रही है। इस नवाचार से कृषक का वर्ष भर का टर्नओवर एक से डेढ़ करोड़ के बीच होता है।
इस दौरान जिले के उप संचालक कृषि जितेंद्र कुमार सिंह, उद्यानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ.आर.सी.शर्मा, उप संचालक उद्यानिकी एम.एल.उईके, कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ.डी.सी.श्रीवास्तव, वैज्ञानिक रिया ठाकुर, अनुभागीय कृषि अधिकारी नीलकंठ पटवारी, वरिष्ठ उद्यान अधिकारी उईके, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी जगन्नाथ कुमरे, सुधीर शर्मा एवं ग्राम के अन्य प्रगतिशील कृषक उपस्थित थे।