पीआईयू में ‘एकाधिकार राज’, जिले की सड़कों पर ‘भ्रष्टाचार का पहिया’—महाप्रबंधक पर गंभीर सवाल
छिंदवाड़ा// प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का उद्देश्य ग्रामीण भारत के विकास और बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध कराना था, लेकिन जिले में यह योजना कुछ अफसरों के ‘कमाई के ठिकाने’ में तब्दील होती दिख रही है। जिलेभर की करीब 950 सड़कों का मेंटेनेंस और संचालन एक ही PIU के कब्जे में, और इसके केंद्र में बैठे महाप्रबंधक की कार्यशैली पर अब गंभीर आरोप खड़े हो रहे हैं।
5 पीआईयू से घटकर 1 — क्यों और किसके दबाव में ?
कभी जिले में 5 PIU हुआ करते थे। काम बंटता था, जिम्मेदारी तय रहती थी और गुणवत्ता दिखती थी। पर सवाल यह है कि अचानक व्यवस्था बदली किसके इशारे पर ? क्यों और किसके दबाव में पूरा कंट्रोल एक ही PIU के हाथों में सौंप दिया गया ?
महाप्रबंधक पर आरोप — सत्ता का संरक्षण और ‘वसूली का खेल’
योजना की महाप्रबंधक पर आरोप है कि उन्होंने राजनीतिक संबंधों और दबाव के दम पर पूरे सिस्टम पर कब्ज़ा जमा लिया है।
उनके इर्द–गिर्द कुछ पसंदीदा इंजीनियरों का गिरोह तैयार कर ठेकेदारों पर दबाव, मनमानी, कमीशनखोरी और कार्यों में हस्तक्षेप किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि महाप्रबंधक का ध्यान मौके पर निरीक्षण करने से ज्यादा बिल रोककर वसूली करने पर रहता है।
जिले में 20 से अधिक सड़कें और 10–15 ब्रिज निर्माणाधीन—पर सिस्टम ‘भगवान भरोसे’
जबकि इतने बड़े स्तर पर कार्य चल रहे हैं—
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ब्रिज निर्माण बिना उचित मॉनिटरिंग
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साइट पर मैटेरियल टेस्टिंग की व्यवस्था नहीं
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फर्जी रिपोर्टों के आधार पर भुगतान
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गुणवत्ताहीन निर्माण और खुलेआम लापरवाही , यानी करोड़ों के प्रोजेक्ट ‘प्रोटोकॉल’ पर नहीं,
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बल्कि‘प्रभाव और प्रबंधन’ पर चल रहे हैं।
ग्रामीण विकास का गला घोंट रही यह कार्यशैली
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना कभी अपनी गुणवत्ता के लिए जानी जाती थी— आज उसी योजना का नाम भ्रष्टाचार, एकाधिकार और लापरवाही के साथ लिया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें दम तोड़ रही हैं, पुल अधूरे हैं, काम सुस्त है—और जनता परेशान।
9 विकासखंड, 950 सड़कें—फिर भी सिर्फ 1 PIU क्यों ?
जिले के 9 विकासखंडों को देखते हुए कम से कम दो PIU होना जरूरी है, लेकिन सवाल वही—
किसके हित में यह ‘एकाधिकार व्यवस्था’ कायम है ? यह फैसला सिस्टम के हित में है या किसी व्यक्ति विशेष के दबदबे के लिए ?
अब जवाबदेही तय हो—निष्पक्ष जांच, कार्रवाई की मांग
जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और आम नागरिक अब सवाल पूछ रहे हैं— क्या प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना इसी दिन के लिए बनाई गई थी ? क्या यह जनता की योजना है या कुछ चुनिंदा अफसरों का निजी ‘सत्ता केंद्र’ ?
लोगों ने स्पष्ट मांग रखी है—
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उच्च स्तरीय जांच
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कम से कम 2 PIU की स्थापना
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जिम्मेदार अफसरों पर कड़ी कार्रवाई
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और महाप्रबंधक की कार्यशैली पर जवाब
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स्वतंत्र जांच की मांग तेज
जिले के जनप्रतिनिधियों व सामाजिक संगठनों ने मामले में उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच, जिले में कम से कम दो PIU स्थापित करने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द हस्तक्षेप नहीं हुआ तो यह योजना अपने उद्देश्य से भटक जाएगी और करोड़ों की सार्वजनिक धनराशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगी …….जारी