कर्ज के नाम पर किसानों की ‘किडनी’ निकाल रहे निजी फाइनेंस और शोरूम संचालक
800 से 1500 किसानों पर थोपे गए फर्जी चेक बाउंस केस; न्यायपालिका को ढाल बनाकर करोड़ों की वसूली का खेल
अन्नदाता कहे जाने वाले किसानों के साथ छिंदवाड़ा जिले में धोखाधड़ी का एक ऐसा संगठित गिरोह (Scam) सक्रिय है, जो न केवल किसानों की मेहनत की कमाई डकार रहा है, बल्कि कानून की आंखों में धूल झोंककर उन्हें जेल भेजने की साजिश भी रच रहा है। ट्रैक्टर विक्रेताओं और निजी फाइनेंस कंपनियों ने मिलकर एक ऐसा चक्रव्यूह बुना है, जिसमें अब तक जिले के लगभग 800 से 1500 किसान फंस चुके हैं।
केस स्टडी: एक ट्रैक्टर, पांच शिकार :
मामले का खुलासा तब हुआ जब ग्राम तुमड़ी के किसान ब्रज कुमार नागवंशी ने अपनी आपबीती सुनाई। ब्रज कुमार ने ‘एल.एंड टी. फाइनेंस’ से कर्ज लेकर ‘शानू ऑटोमोबाइल्स’ से ट्रैक्टर खरीदा था।
किसान का आरोप है कि पूरी राशि चुकाने के बाद भी डीलर ने न तो ट्रैक्टर दिया और न ही रजिस्ट्रेशन कराया। हद तो तब हो गई जब किसान के खाली चेक का दुरुपयोग कर उस पर 1,34,000 रुपये का झूठा केस ठोक दिया गया। अधिवक्ता अनुपम गढ़ेवाल के अनुसार, एक ही ट्रैक्टर को 4-5 अलग-अलग किसानों को बेचकर उन सभी से खाली चेक ले लिए जाते हैं और फिर शुरू होता है ‘चेक बाउंस’ का अंतहीन खेल।
लूट का ‘ब्लैक बॉक्स’ मॉडल
यह संगठित गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता है:
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ब्लैंक चेक का जाल: ट्रैक्टर फाइनेंस करते वक्त किसानों से सुरक्षा के नाम पर कई खाली चेक लिए जाते हैं।
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विवरण में हेराफेरी: न्यायालय में जब चेक बाउंस के मामले पेश किए जाते हैं, तो उनमें जानबूझकर इंजन और चेसिस नंबर नहीं डाले जाते, ताकि एक ही चेक का इस्तेमाल बार-बार या अन्य अवैध वसूली के लिए किया जा सके।
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पुलिस की संदिग्ध चुप्पी: पीड़ित किसानों ने एसपी छिंदवाड़ा और हरिजन कल्याण थाने में शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन आरोप है कि पुलिस केस दर्ज करने के बजाय ‘जांच’ के नाम पर किसानों को ही प्रताड़ित कर रही है।
न्यायपालिका को गुमराह करने की साजिश
अधिवक्ता अनुपम गढ़ेवाल ने इस पूरे मामले की शिकायत माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के विजिलेंस जज और रजिस्ट्रार जनरल से की है। उन्होंने दावा किया है कि निचली अदालतों में चल रहे ये सैकड़ों मामले वास्तव में एक बड़े ‘अवैध व्यवसाय’ का हिस्सा हैं। अगर निष्पक्ष जांच हुई तो यह करोड़ों रुपये का घोटाला साबित होगा, जिसमें निजी फाइनेंस कंपनियों और शोरूम मालिकों की मिलीभगत से अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग किया जा रहा है।
“यह केवल व्यापारिक विवाद नहीं, बल्कि किसानों के खिलाफ एक संगठित अपराध है। किसानों के खाली चेकों का दुरुपयोग कर उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ा जा रहा है। हमने उच्च न्यायालय से इस पर अंकुश लगाने की मांग की है।” — अनुपम गढ़ेवाल, अधिवक्ता
मुख्य मांगें:
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निजी फाइनेंस कंपनियों और ट्रैक्टर विक्रेताओं के बैंक खातों और फाइलों की फोरेंसिक जांच हो।
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निचली अदालतों में लंबित ‘चेक बाउंस’ के संदिग्ध मामलों की विशेष जांच (SIT) कराई जाए।
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दोषी शोरूम संचालकों और फाइनेंस कंपनी के अधिकारियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज हो।
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