भगीरथ प्रयासों से लौट रही ‘सींगरी’ नदी की मुस्कान ..

भगीरथ प्रयासों से लौट रही ‘सींगरी’ की मुस्कान: वैज्ञानिक नवाचार, गैबियन संरचनाओं और अनुभवी प्रशासनिक विजन से नदी पुनर्जीवन को मिली नई गति

जल ही जीवन है, और जब किसी जीवनदायिनी नदी को उसका खोया हुआ अस्तित्व लौटाने का संकल्प लिया जाए, तो वह प्रयास एक महायज्ञ बन जाता है। इसी महायज्ञ की एक सुखद और भव्य तस्वीर नरसिंहपुर अंचल में देखने को मिली। मध्यप्रदेश शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने ‘सींगरी नदी पुनर्जीवन परियोजना’ के तहत चल रहे दूरगामी और जनहितैषी कार्यों का सघन निरीक्षण किया। यह पहल न केवल प्रकृति के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि जल संवर्धन की दिशा में एक ‘रोल मॉडल’ बनकर उभर रही है।

✍️ राकेश प्रजापति 

प्रकृति और विज्ञान का अनूठा संगम यह निरीक्षण मात्र एक प्रशासनिक दौरा नहीं था, बल्कि पर्यावरण और विज्ञान का एक बेहतरीन समन्वय था। माननीय मंत्री जी के साथ केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. योगेंद्र सक्सेना और सुप्रसिद्ध भू-गर्भ वैज्ञानिक डॉ. सुनील चतुर्वेदी मौजूद रहे। विशेषज्ञ द्वय ने सींगरी को ‘सदानीरा’ (वर्ष भर बहने वाली) बनाने, इसके प्रवाह को नियमित करने और जल की शुद्धता बनाए रखने के लिए अपने अमूल्य वैज्ञानिक सुझाव दिए।

परियोजना के प्रथम चरण में नरसिंहपुर शहर के समीपवर्ती ग्राम पंचायत मगरधा, रोसरा, नकटुआ और रानी पिपरिया में नदी संरक्षण का नया अध्याय लिखा जा रहा है।

  • तटबंधों की सुरक्षा: नदी के कटाव को रोकने और भू-जल स्तर को समृद्ध करने के लिए नदी तटों पर मजबूत ‘गैबियन संरचनाओं’ का निर्माण किया गया है, जिसने पुनर्जीवन के इस कार्य को अद्भुत गति प्रदान की है।

  • अपशिष्ट जल का वैज्ञानिक उपचार: बसाहटों से निकलने वाले तरल अपशिष्ट (गंदे पानी) को सीधे नदी में मिलने से रोकने के लिए आधुनिक जल शोधन इकाइयों (ट्रीटमेंट प्लांट) की स्थापना प्रगति पर है। इससे नदी का पारिस्थितिक संतुलन लंबे समय तक सुरक्षित रहेगा।

देवगढ़ की तर्ज पर सींगरी का कायाकल्प इस संपूर्ण भगीरथ प्रयास में नरसिंहपुर जिला पंचायत सीईओ श्री गजेंद्र सिंह नागेश का जल संरक्षण के प्रति सिद्धहस्त विजन भी एक मजबूत धुरी का काम कर रहा है। उल्लेखनीय है कि श्री नागेश ने अपनी पूर्व पदस्थापना के दौरान छिंदवाड़ा में जल संवर्धन का एक ऐसा ऐतिहासिक कीर्तिमान रचा था, जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है। कोविड महामारी के उस चुनौतीपूर्ण और भयावह दौर में, जब दुनिया थमी हुई थी, तब उनके नेतृत्व में गोंडवाना कालीन देवगढ़ में लगभग 53 दफ्न हो चुकीं ऐतिहासिक बावलियों को खोजकर पुनर्जीवित किया गया था।

आज उस पुनीत कार्य का ही परिणाम है कि देवगढ़ एक प्रमुख ‘पर्यटन ग्राम’ के रूप में विकसित हो चुका है। वहां पहुंचने वाले हजारों सैलानी जब सदियों पुरानी इन जल-संरचनाओं के भव्य स्वरूप को देखते हैं, तो आश्चर्य से दांतों तले अंगुली दबाने को मजबूर हो जाते हैं। देवगढ़ के इस अद्भुत जल संरक्षण और ऐतिहासिक धरोहरों के जीर्णोद्धार के लिए भारत सरकार द्वारा श्री नागेश को विशेष रूप से सम्मानित भी किया जा चुका है। अब उसी सफल अनुभव और प्रशासनिक दक्षता का सीधा लाभ नरसिंहपुर की सींगरी नदी को मिल रहा है।

‘सींगरी वाटिका’ में रोपे गए हरियाली के बीज नदी का शृंगार उसके किनारे बसी हरियाली से होता है। इसी को चरितार्थ करते हुए, ग्राम रानी पिपरिया और मगरधा में विकसित की जा रही ‘सींगरी वाटिकाओं’ में माननीय मंत्री महोदय, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा उत्साहपूर्वक पौधारोपण किया गया। जनसहभागिता की अनूठी मिसाल तब देखने मिली, जब स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा अपने हाथों से निर्मित ‘सीड बॉल’ को नदी के किनारों पर डाला गया।

महज कुछ महीनों के अल्प समय में सींगरी नदी का यह कायाकल्प सामूहिक संकल्प, जनसहभागिता और दृढ़ इच्छाशक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है। मंत्री श्री पटेल ने विश्वास व्यक्त किया कि जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में सींगरी नदी का यह पुनर्जीवन मॉडल न केवल नरसिंहपुर के लिए, बल्कि समूचे प्रदेश और देश के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

वह दिन अब दूर नहीं जब सींगरी नदी पूरी तरह प्रदूषण मुक्त और अविरल होकर अपने अंचल की प्यास बुझाएगी।