छिंदवाड़ा के जंगलों से निकली आत्मनिर्भरता की गूंज: ‘चिलक’ वन धन केंद्र ने भोपाल में गाड़ा सफलता का झंडा !
राकेश प्रजापति
छिंदवाड़ा के घने जंगलों के बीच बसी जनजातीय संस्कृति और उनकी मेहनत अब अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी चमक बिखेर रही है। पूर्व वनमण्डल छिंदवाड़ा के अंतर्गत आने वाले प्रधानमंत्री वनधन विकास केंद्र (VDVK) चिलक ने भोपाल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय वन मेला 2025 में प्रथम स्थान प्राप्त कर जिले का नाम पूरे प्रदेश में रोशन कर दिया है।
सफलता की नींव: 300 दीदियों के संकल्प से बनी पहचान
यह गौरवपूर्ण उपलब्धि केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि छिंदवाड़ा की 300 महिलाओं के कठिन परिश्रम और आत्मनिर्भर बनने के सपने का परिणाम है।
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स्थापना: इस केंद्र की शुरुआत वर्ष 2020-21 में पश्चिम बटकाखापा वन परिक्षेत्र के ग्राम अतरिया में की गई थी।
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संगठन की शक्ति: यहां कुल 15 स्व-सहायता समूह कार्यरत हैं, जिनमें प्रत्येक समूह में 20-20 सदस्य शामिल हैं।
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आत्मनिर्भरता: कुल 300 सदस्य मिलकर वनों के उपहारों को आधुनिक रूप देकर बाजार तक पहुंचा रहे हैं।
जंगल की ‘शुद्धता’ को मिला ‘तकनीक’ का साथ
पूर्व वनमंडलाधिकारी श्री स्वरूप दीक्षित ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए बताया कि वनांचल के उत्पादों को बेहतर बनाने के लिए केंद्र को आधुनिक मशीनों से लैस किया गया है। वर्तमान में यहाँ उच्च स्तर की प्रसंस्करण इकाइयां कार्य कर रही हैं:
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चिरौंजी सीड डेकोर्डिकेटर (3HP): गुठली से बीज निकालने की आधुनिक मशीन।
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ट्रे ड्रायर (12 ट्रे): उत्पादों को सुरक्षित तरीके से सुखाने की सुविधा।
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ऑटोमैटिक पाउच सीलिंग व वेइंग मशीन: बेहतर पैकेजिंग और सटीक माप के लिए।
प्रकृति का खजाना: चिलक केंद्र के ‘सुपर फूड्स’
चिलक वनधन केंद्र के सदस्य केवल संग्रहण नहीं करते, बल्कि जंगल की जड़ी-बूटियों को सेहत के खजाने में बदल देते हैं। इनके द्वारा तैयार किए गए प्रमुख उत्पादों की मांग अब शहरों में भी तेजी से बढ़ रही है:
मुख्य उत्पाद: शहद, चिरौंजी, आंवला कैंडी, अर्जुन पाउडर, अर्जुन छाल, बाल हर्रा, त्रिफला चूर्ण, कोदो, कुटकी और मिलेट्स आटा।
दुर्लभ जड़ी-बूटियाँ: शतावर, काली मूसली और केवकन्द जैसी बेशकीमती औषधियां भी यहाँ से प्रसंस्कृत होकर निकल रही हैं।
जिला यूनियन पूर्व छिंदवाड़ा के अंतर्गत वर्तमान में 02 प्रधानमंत्री वनधन विकास केंद्र और 05 PVTG वनधन केंद्र संचालित हैं, जो आदिवासी समुदायों के आर्थिक उत्थान का मुख्य आधार बन रहे हैं।
भोपाल के अंतरराष्ट्रीय वन मेले में मिली यह जीत इस बात का प्रमाण है कि यदि स्थानीय कौशल को सही मार्गदर्शन और तकनीक मिले, तो छिंदवाड़ा का ‘वोकल फॉर लोकल’ मंत्र दुनिया के लिए मिसाल बन सकता है। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग के साझा प्रयासों से आज अतरिया गांव का यह छोटा सा केंद्र प्रदेश के लिए विकास का एक नया ‘रोल मॉडल’ बन चुका है।
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