PMGSY : GM कविता पटवा पर पक्षपात व संरक्षण के आरोप ..

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में भ्रष्टाचार …!

GM कविता पटवा पर बढ़ते सवाल, चहेते इंजीनियरों की खुली मनमानी, ग्रामीणों की पीड़ा चरम पर

छिंदवाड़ा // प्रधानमंत्री ग्रामीण विकास प्राधिकरण इकाई छिंदवाड़ा में चल रहे कथित भ्रष्टाचार, पक्षपातपूर्ण कार्रवाई, ठेकेदारों के शोषण और जनता को मूलभूत सुविधाओं से वंचित करने के आरोपों की आग अब और भड़क चुकी है। जहां एक ओर जीएम कविता पटवा द्वारा चुनिंदा ठेकेदारों पर एकतरफा कार्रवाई कर दमनात्मक टर्मिनेशन किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ख़राब सड़कों, अधूरे संधारण, घटिया निर्माण और गंभीर लापरवाहियों के बावजूद कई “चहेते” ठेकेदारों पर कार्यवाही का एक शब्द तक न बोला जाना अब बड़े खेल की ओर संकेत दे रहा है।

एक गुट पर कार्रवाई – दूसरे पर खुला संरक्षण क्यों ?

यही है सबसे बड़ा सवाल…!

जिलेभर के सड़क पैकेजों में कई स्थानों पर सड़कों की हालत किसी “खण्डहर” से कम नहीं है। गिट्टी से पटे रास्ते, उखड़ी बी.टी., जगह–जगह गड्ढे, टूटी पुलिया, झाड़ियों से भरे मार्ग—सब कुछ स्पष्ट चीख–चीख कर बता रहा है कि संधारण का पैसा कहां गया…?
क्या ठेकेदारों की जवाबदेही सिर्फ कुछ चुनिंदा लोगों के लिए है ?
क्या कार्रवाई का तराज़ू “रिश्तों, दबाव और लाभ” के हिसाब से सेट किया गया है ?

ग्रामीणों की जान जोखिम में – लेकिन GM के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही

जहां ग्रामीणों, बच्चों, मरीजों, किसानों और आम नागरिकों को रोज जोखिम उठाते हुए इन सड़कों से गुजरना पड़ रहा है, वहीं विभागीय तंत्र और GM कविता पटवा सिर्फ नोटिस, गोलमोल जवाब, और “कारण बताओ” की दिखावटी कार्यवाही तक सीमित है।
जनता पूछ रही है—
• खराब सड़कों वाले चहेते ठेकेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं ?
• सिर्फ उन पर प्रहार क्यों, जिनकी आवाज उठाई…?
• क्या “यूनियन से नाराजगी” ही कार्रवाई का आधार है ?
• क्या योजना का उद्देश्य जनता या “कमाई का खेल” बन चुका है ?

योजना का उद्देश्य खो गया – बच गया सिर्फ दबदबा और तानाशाही!

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना गांव–गांव तक बेहतर संपर्क और विकास पहुंचाने के लिए बनी थी,
लेकिन छिंदवाड़ा इकाई में इसका स्वरूप बदल चुका है—
यहां नियमों की जगह “मनमानी”
पारदर्शिता की जगह “गुप्त सौदे”
और जवाबदेही की जगह “अहंकार” काम कर रहा है।

सूत्रों का बड़ा खुलासा – ‘एक तंत्र विशेष’ चला रहा है पूरा खेल

सूत्रों का दावा है कि विभाग में ऐसे इंजीनियर और अधिकारी सक्रिय हैं,
जो अपने चहेते ठेकेदारों के संरक्षण के लिए हर स्तर पर ढाल बने हुए हैं।
रिपोर्ट, निरीक्षण, संधारण मूल्यांकन—सब कुछ “इशारों” पर होता है।
और जीएम कविता पटवा पर आरोप है कि वह इस पूरी व्यवस्था की “मुख्य कमांडर” बनी बैठी हैं।

जनता से अपील – अब चुप न रहें, सच्चाई सामने आएगी

हमारी टीम द्वारा जुटाए जा रहे तथ्य, दस्तावेज, स्थल निरीक्षण रिपोर्ट और अधिकारियों के विरोधाभासी बयान सच्चाई की परतें खोल रहे हैं।
यह सिर्फ ठेकेदारों की लड़ाई नहीं—
यह ग्रामीणों के अधिकार
जनहित के साथ खिलवाड़
और सरकारी योजना के नाम पर चल रही “जमकर लूट” का मुद्दा है।

अगली कड़ी में होगा बड़ा धमाका…!

अगली रिपोर्ट में—
✔ किन–किन सड़कों की हालत “मरम्मत” नहीं बल्कि “पुनर्निर्माण” लायक ?
✔ किन पैकेजों में करोड़ों खर्च दिखाए गए पर जमीन पर नामोनिशान नहीं ?
✔ कौन–कौन है GM कविता पटवा के इस खेल का असली संरक्षक ?
✔ और कहां–कहां दबाया गया सच ?

जुड़े रहिए… यह लड़ाई सिर्फ खबर नहीं—जनहित की आवाज है !