मध्य प्रदेश बजट 2026: ‘सिंघस्थ’ की तैयारी और ‘नारी शक्ति’ पर भारी –
समीक्षा : राकेश प्रजापति
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश कर दिया है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा प्रस्तुत यह बजट स्पष्ट रूप से राज्य की भविष्य की राजनीति और आर्थिकी की दिशा तय करता है। यदि इस बजट का सूक्ष्म विश्लेषण किया जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि सरकार ने ‘वेलफेयर स्टेट’ (कल्याणकारी राज्य) की अवधारणा को मजबूत करते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर और धार्मिक पर्यटन पर एक बड़ा दांव खेला है।
इस बजट को मुख्य रूप से चार स्तंभों पर टिका हुआ माना जा सकता है: कृषि, महिला सशक्तिकरण, सिंहस्थ की तैयारी और बुनियादी ढांचा।
किसान कल्याण: सरकार ने वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ घोषित कर अपने इरादे साफ कर दिए हैं। बजट में किसानों के लिए जो सबसे महत्वपूर्ण घोषणा है, वह है 1 लाख सोलर पंपों का वितरण। 3000 करोड़ रुपये की यह योजना केवल सिंचाई की सुविधा नहीं है, बल्कि यह किसानों की बिजली पर निर्भरता कम करने और उनकी ‘इनपुट कॉस्ट’ (लागत) घटाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
इसके अलावा, सीएम कृषक उन्नति योजना के लिए 5,500 करोड़ रुपये और फसल बीमा के लिए 1,299 करोड़ रुपये का प्रावधान यह दर्शाता है कि सरकार किसानों को बाजार के जोखिमों से बचाना चाहती है। जैविक और प्राकृतिक खेती के लिए 21 लाख हेक्टेयर से अधिक का पंजीकरण और 1 लाख हेक्टेयर में इसे बढ़ावा देने का लक्ष्य, मध्य प्रदेश को ‘देश की जैविक राजधानी’ के रूप में स्थापित करने की कोशिश है।
महिला सशक्तिकरण: बजट के आंकड़ों पर नजर डालें तो ‘महिलाएं’ इस बजट के केंद्र में हैं। कुल 1.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान महिला कल्याण के लिए किया गया है, जो अपने आप में ऐतिहासिक है।
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लाड़ली बहना योजना (23,882 करोड़): यह राशि बताती है कि सरकार अपनी सबसे सफल योजना को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देना चाहती। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी के प्रवाह को बनाए रखने का एक जरिया भी है।
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सखी भवन और लाड़ली लक्ष्मी: कामकाजी महिलाओं के लिए आवास और बच्चियों के लिए फंड का आवंटन सामाजिक सुरक्षा के ढांचे को मजबूत करता है।
सिंहस्थ 2028: इस बजट की सबसे अनूठी बात है सिंहस्थ महापर्व के लिए अभी से की गई भारी-भरकम तैयारी। सरकार इसे केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक ‘इकोनॉमिक बूस्टर’ के रूप में देख रही है।
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इंदौर-उज्जैन कॉरिडोर, ग्रीनफील्ड हाईवे और सिक्स-लेन चौड़ीकरण के लिए हजारों करोड़ का आवंटन न केवल सिंहस्थ के लिए है, बल्कि यह मालवा क्षेत्र की कनेक्टिविटी को हमेशा के लिए बदल देगा।
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सिंहस्थ के लिए 13,851 करोड़ के कार्य स्वीकृत करना और इस वर्ष 3,060 करोड़ का प्रावधान करना, उज्जैन को एक वैश्विक धार्मिक शहर बनाने की प्रतिबद्धता है।
युवा, रोजगार और खेल: युवाओं के लिए बजट मिश्रित परिणाम लेकर आया है। 22,500 पुलिस पदों पर भर्ती की घोषणा निश्चित रूप से राहत देने वाली है, लेकिन प्रदेश में बेरोजगारी की चुनौती को देखते हुए अन्य विभागों में भर्तियों पर और स्पष्टता की आवश्यकता थी। हालांकि, ‘हर विधानसभा में स्टेडियम’ की अवधारणा (815 करोड़ रुपये) एक सकारात्मक पहल है। यह खेलों का विकेंद्रीकरण है, जिससे ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच मिलेगा। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ‘सरदार पटेल कोचिंग योजना’ भी एक स्वागत योग्य कदम है, खासकर गरीब छात्रों के लिए।
सामाजिक सुरक्षा और प्रगतिशील निर्णय : श्रम विभाग के लिए 1,335 करोड़ का बजट और असंगठित कामगारों को सामाजिक सुरक्षा से जोड़ना, समाज के निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति की चिंता दर्शाता है। बजट का एक बहुत ही मानवीय और प्रगतिशील पहलू तलाकशुदा पुत्री को परिवार पेंशन देने का निर्णय है। यह एक छोटा सा प्रशासनिक बदलाव लग सकता है, लेकिन सामाजिक रूप से यह एक बड़ा सहारा है।
संतुलन साधने का प्रयास : कुल मिलाकर वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा का यह बजट ‘रेवड़ी संस्कृति’ और ‘पूंजीगत व्यय’ (Capital Expenditure) के बीच संतुलन साधने का प्रयास है। जहां एक ओर लाड़ली बहना और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं के जरिए सीधे नकद हस्तांतरण जारी है, वहीं दूसरी ओर सड़कों (12,690 करोड़) और सिंहस्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च से विकास की गति बनाए रखने की कोशिश की गई है।
चुनौती केवल बजट आवंटन की नहीं, बल्कि ‘क्रियान्वयन’ की होगी। विशेषकर कृषि वानिकी और सोलर पंप जैसी योजनाओं का लाभ अंतिम किसान तक कैसे पहुंचता है, यह देखने वाली बात होगी। यह बजट 2026 के लिए सरकार की प्राथमिकताओं का एक स्पष्ट दस्तावेज है, जो बताता है कि सरकार ‘धर्म, विकास और कल्याण’ के रथ पर सवार होकर आगे बढ़ना चाहती है।