दूसरी कड़ी..
जन-मन योजना में भी ‘भ्रष्टाचार का साम्राज्य’—महाप्रबंधक पर उठे गंभीर सवाल, आदिवासी विकास अधर में
आज की बात :राकेश प्रजापति
छिंदवाड़ा // प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में भ्रष्टाचार के बाद अब केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जन-मन योजना भी भारी अनियमितताओं की चपेट में आ गई है। आदिवासी अंचलों के विकास के लिए बनाई गई यह योजना अब विभागीय अफसरों के कमाई और सांठगांठ का ठिकाना बनती दिख रही है। सीधे सवालों के केंद्र में हैं—महाप्रबंधक कविता पटवा।
एक इंजीनियर के भरोसे पूरी जन-मन योजना – क्या यह विकास या सेटिंग का खेल ?
जिले में जन-मन योजना की लगभग 70% परियोजनाएं चल रही हैं, जिनमें जुन्नारदेव, तामिया और हर्रई जैसे दुर्गम व भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण इलाके शामिल हैं।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि—
➡️ पूरा जन-मन प्रोजेक्ट मात्र एक इंजीनियर के हवाले !
न तो पर्याप्त मॉनिटरिंग,
न निरीक्षण, न तकनीकी टीम—तो फिर करोड़ों के कार्य कैसे “सही” बताकर आगे बढ़ रहे हैं ?
स्पष्ट है—यहां संगठित गोलमाल, ठेकेदारों से वसूली और उसका आपसी बंटवारा हो रहा है।
और सबसे बड़ा प्रश्न— महाप्रबंधक ने आखिर किन दबावों या हितों के चलते केवल एक खास व्यक्ति को पूरी योजना का प्रभार क्यों दे दिया ?
फर्जी रिपोर्टों से आगे बढ़ रहे काम – आदिवासी क्षेत्रों का भविष्य दांव पर
दुर्गम आदिवासी अंचलों में सड़कें ही विकास का आधार हैं, पर यहां—
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साइट विजिट नहीं
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मैटेरियल टेस्टिंग नहीं
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फील्ड मॉनिटरिंग नहीं
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और कागजों पर सब “उत्तम” दर्ज
यानी जल्दबाज़ी नहीं, बल्कि जुगाड़ और जेब भरने का खेल चल रहा है।
शो-कॉज नोटिस सिर्फ ड्रामा—कार्रवाई ‘रेटकार्ड’ के हिसाब से
जिले में दो दर्जन से अधिक ठेकेदारों को शो-कॉज नोटिस जारी किए गए।
लेकिन कड़वी हकीकत यह है—
* कार्रवाई सिर्फ़ चुनिंदा ठेकेदारों पर
* बाकी मामलों में भारी लेन-देन के बाद फाइलें दफन
* जर्जर सड़कों के बावजूद भुगतान जारी
यह व्यवस्था नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का खुलेआम व्यापार है।
जर्जर सड़कें, अधूरे पुल—लेकिन फाइलों में सब उत्तम
जिले में कई सड़कें मरम्मत तक मांग रही हैं, लेकिन उन सड़कों के ठेकेदारों को भी भुगतान किया जा रहा है।
ग्रामीण परेशान, वाहन फंस रहे हैं—पर विभागीय कागज़ों में सब कुछ “मानक अनुसार” बताया जा रहा है।
पीड़ित ठेकेदार लामबंद – एकरूप कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग
लंबे समय से हो रही भेदभावपूर्ण कार्यवाही से परेशान ठेकेदार अब लामबंद होकर मांग कर रहे हैं—
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सभी जर्जर सड़कों की जांच
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एक समान कार्रवाई
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फर्जी रिपोर्ट बनाने वालों पर कार्रवाई
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और महाप्रबंधक की भूमिका की जांच
महाप्रबंधक कविता पटवा की कार्यशैली पर बड़े सवाल
लगातार आरोप, चयनित इंजीनियरिंग टीम, एकाएक एकाधिकार, चुनिंदा कार्रवाई और सिस्टम पर असामान्य पकड़—
ये सभी तथ्यों को जोड़ने पर एक ही दिशा उभरती है—
➡️ क्या विभाग में “भ्रष्टाचार का संगठित नेटवर्क” चल रहा है ?
➡️ क्यों आदिवासी क्षेत्रों की योजनाएं लूट का केंद्र बनाई जा रही हैं ?
➡️ क्यों जन-मन योजना को जानबूझकर एक ही व्यक्ति के हवाले छोड़ा गया ?
यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह योजना भी अपने उद्देश्य से भटककर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगी, और इसकी सबसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी— दूरस्थ आदिवासी और ग्रामीण जनता को …. जारी